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अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसैलाब, आधा रोकी वाहनों की आवाजाही
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रामपुर बुशहर। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का शनिवार को रामपुर में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। पदम पैलेस से जब उनकी अंतिम शवयात्रा निकाली गई तो एनएच-पांच पर हजारों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। एनएच के साथ-साथ महल परिसर और साथ लगते क्षेत्र में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए कड़ी धूप में खड़े रहे। हालांकि प्रशासन और पुलिस ने यातायात और सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किए थे। इस कारण पुलिस को जाम जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा।
शनिवार दोपहर जब राजमहल से वीरभद्र सिंह को पार्थिक देह श्मशानघाट की ओर ले जाया गया तो करीब 30 मिनट तक नेशनल हाईवे-पांच पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई। इस दौरान किन्नौर से आने वाले वाहनों को पीजी कॉलेज मैदान के साथ, जबकि शिमला से आने वाले वाहनों को खोपड़ी स्थित मां महालक्ष्मी महिषमर्दिनी मंदिर से आगे नहीं छोड़ा गया। भारी वाहनों की आवाजाही के लिए वजीर बावड़ी से ब्रौ होते हुए झाकड़ी की ओर से भेजा गया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए राजदरबार सहित अन्य स्थानों पर कड़ा पहरा लगाया था।
इस दौरान शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस नजर बनाए हुए थी। पुलिस और रिजर्व के करीब 120 जवानों ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने का जिम्मा संभाला। करीब आधा घंटे तक ही हजारों की भीड़ को देखते हुए वाहनों की आवाजाही को बाधित रखा गया। शहर आने के लिए केवल वीआईपी वाहनों को ही मंजूरी दी गई थी। इस दौरान लोगों ने वीरभद्र सिंह अमर रहे के नारे लगाकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
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डीएसपी रामपुर चंद्रशेखर कायथ ने बताया कि दो दिन तक रामपुर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए 120 जवानों की तैनाती की गई थी। हजारों की भीड़ होने के बावजूद भी शहर में कोई भी अप्रिय घटना पेश नहीं आई।
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शनिवार दोपहर जब राजमहल से वीरभद्र सिंह को पार्थिक देह श्मशानघाट की ओर ले जाया गया तो करीब 30 मिनट तक नेशनल हाईवे-पांच पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई। इस दौरान किन्नौर से आने वाले वाहनों को पीजी कॉलेज मैदान के साथ, जबकि शिमला से आने वाले वाहनों को खोपड़ी स्थित मां महालक्ष्मी महिषमर्दिनी मंदिर से आगे नहीं छोड़ा गया। भारी वाहनों की आवाजाही के लिए वजीर बावड़ी से ब्रौ होते हुए झाकड़ी की ओर से भेजा गया। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए राजदरबार सहित अन्य स्थानों पर कड़ा पहरा लगाया था।
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इस दौरान शहर के चप्पे-चप्पे पर पुलिस नजर बनाए हुए थी। पुलिस और रिजर्व के करीब 120 जवानों ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को बनाए रखने का जिम्मा संभाला। करीब आधा घंटे तक ही हजारों की भीड़ को देखते हुए वाहनों की आवाजाही को बाधित रखा गया। शहर आने के लिए केवल वीआईपी वाहनों को ही मंजूरी दी गई थी। इस दौरान लोगों ने वीरभद्र सिंह अमर रहे के नारे लगाकर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
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डीएसपी रामपुर चंद्रशेखर कायथ ने बताया कि दो दिन तक रामपुर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए 120 जवानों की तैनाती की गई थी। हजारों की भीड़ होने के बावजूद भी शहर में कोई भी अप्रिय घटना पेश नहीं आई।