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Rampur Bushahar News: स्वर्ग प्रवास को रवाना हुए देवता साहिब बद्रीनारायण, विष्णु नारायण और तपो नारायण
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पूजा-अर्चना और वाद्ययंत्रों की धुनों के साथ ग्रामीणों ने दी विदाई, पारंपरिक उतरेनी पर्व शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जिला किन्नौर के आदर्श गांव बटसेरी में ऐतिहासिक उतरेनी लोहड़ी मेला की मध्य रात्रि से शुरू हो गया है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक मेले को ग्रामीण हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाते हैं। मेले का मुख्य उद्देश्य नव वर्ष यानी लोहड़ी पर्व के आगमन का स्वागत करना है। लोहड़ी की मध्यरात्रि में ग्रामीण अपने ईष्ट देवता साहिब बद्री नारायण, विष्णु नारायण और तपो नारायण के मंदिर में एकत्रित हुए। तीनों देवताओं को ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर वाद्ययंत्रों की धुनों के साथ स्वर्ग प्रवास के लिए विदा किया। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। तीनों देवताओं के स्वर्ग प्रवास जाने से पूर्व गांव के दो नवयुवकों को चुनकर मेले की पूरी जिम्मेवारी सौंपी गई है। देवताओं के चुने गए दोनों बालकों को देवता स्वरूप माना जाता है और पांच दिनों तक चलने वाले उतरेनी पर्व को हर घर में मनाया जाता है। बालकों को किन्नौरी पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर पौराणिक संस्कृति से अवगत करवाकर पर्व की गतिविधियां शुरू की जाती हैं। इस पर्व के दौरान बर्फ पड़े, तो इसे शुभ माना जाता है। सभी लोग नववर्ष की मंगल कामना करने के साथ-साथ पांच दिनों तक भोजन साथ मिलकर करते हैं। पर्व के अंतिम दिन ग्रामवासी दोनों बालकों के साथ गांव की सुख-शांति और समृद्धि के लिए गांव का भ्रमण करते हैं। देवता बद्रीनारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन मनोज लोक्टस, कायथ गौतम जिंटू, माथस तुलसी दास शानटेशो, पुजारी योग सागर बिलांटू, माली महावीर बिलांटू, भंडारी वीरेंद्र रेपाल्टा और पाथरिकेस भानू आशीष लोक्ट्स ने कहा कि विशेष पर्व को मनाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पर्व को ग्रामीणों द्वारा हर्षोल्लास के साथ अलग अंदाज में मनाया जा रहा है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जिला किन्नौर के आदर्श गांव बटसेरी में ऐतिहासिक उतरेनी लोहड़ी मेला की मध्य रात्रि से शुरू हो गया है। इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक मेले को ग्रामीण हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाते हैं। मेले का मुख्य उद्देश्य नव वर्ष यानी लोहड़ी पर्व के आगमन का स्वागत करना है। लोहड़ी की मध्यरात्रि में ग्रामीण अपने ईष्ट देवता साहिब बद्री नारायण, विष्णु नारायण और तपो नारायण के मंदिर में एकत्रित हुए। तीनों देवताओं को ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर वाद्ययंत्रों की धुनों के साथ स्वर्ग प्रवास के लिए विदा किया। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं। तीनों देवताओं के स्वर्ग प्रवास जाने से पूर्व गांव के दो नवयुवकों को चुनकर मेले की पूरी जिम्मेवारी सौंपी गई है। देवताओं के चुने गए दोनों बालकों को देवता स्वरूप माना जाता है और पांच दिनों तक चलने वाले उतरेनी पर्व को हर घर में मनाया जाता है। बालकों को किन्नौरी पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर पौराणिक संस्कृति से अवगत करवाकर पर्व की गतिविधियां शुरू की जाती हैं। इस पर्व के दौरान बर्फ पड़े, तो इसे शुभ माना जाता है। सभी लोग नववर्ष की मंगल कामना करने के साथ-साथ पांच दिनों तक भोजन साथ मिलकर करते हैं। पर्व के अंतिम दिन ग्रामवासी दोनों बालकों के साथ गांव की सुख-शांति और समृद्धि के लिए गांव का भ्रमण करते हैं। देवता बद्रीनारायण मंदिर कमेटी के मोतमीन मनोज लोक्टस, कायथ गौतम जिंटू, माथस तुलसी दास शानटेशो, पुजारी योग सागर बिलांटू, माली महावीर बिलांटू, भंडारी वीरेंद्र रेपाल्टा और पाथरिकेस भानू आशीष लोक्ट्स ने कहा कि विशेष पर्व को मनाने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पर्व को ग्रामीणों द्वारा हर्षोल्लास के साथ अलग अंदाज में मनाया जा रहा है।