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Rampur Bushahar News: एक गैस सिलिंडर के लिए दो दिन की मशक्कत, नेरवा के उपभोक्ता बेहाल

Fri, 17 Jul 2026 11:38 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 11:38 PM IST
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Two-day struggle for a single gas cylinder; consumers in Nerwa in distress.
तपती धूप में पेड़ की छांव का आसरा लेते नेरवा में गैस बुक करवाने आए लोग। संवाद
18 पंचायतों के लोग बुकिंग और डिलीवरी के लिए लगा रहे दो-दो चक्कर, स्थायी बुकिंग काउंटर खोलने की मांग
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तपती और उमस भरी गर्मी में घंटों कतारों में खड़े होने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा (रोहड़ू)। सुबह के करीब 10 बजे हैं। तापमान 34 डिग्री के आसपास है और उमस से लोग पसीने से तर-बतर हैं। नेरवा गैस एजेंसी के बाहर सैकड़ों लोग हाथों में गैस बुकिंग की पर्चियां लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कतार में सबसे आगे बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग भी हैं, लेकिन उनकी परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। कई लोगों का कहना है कि गैस सिलिंडर लेने के लिए उन्हें एक नहीं, बल्कि दो-दो दिन खर्च करने पड़ रहे हैं।
नेरवा तहसील की 18 पंचायतों के हजारों गैस उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस लेना अब किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई महीनों से गांवों में गैस सिलिंडरों की नियमित आपूर्ति बंद होने जैसी स्थिति है। ऐसे में उपभोक्ताओं को पहले गैस सिलिंडर बुक कराने और फिर अगले दिन उसे लेने के लिए दो बार नेरवा आना पड़ता है।
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सबसे बड़ी समस्या यह है कि गैस बुकिंग की पूरी व्यवस्था केवल एक कर्मचारी के भरोसे चल रही है। यह कर्मचारी निर्धारित तिथि पर चौपाल से नेरवा पहुंचकर बुकिंग करता है। जिस दिन बुकिंग होती है, उस दिन एजेंसी में 400 से 500 तक उपभोक्ता पहुंच जाते हैं। भीड़ इतनी अधिक होती है कि कई लोगों का नंबर ही नहीं आ पाता और उन्हें अगले दिन फिर लंबी दूरी तय कर नेरवा आना पड़ता है।
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इस व्यवस्था का सबसे अधिक असर दूरदराज के गांवों के लोगों पर पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं को सुबह-सुबह अपने गांवों से निकलना पड़ता है। दिनभर कतार में खड़े रहने के बाद भी यदि नंबर नहीं आता तो उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ता है। अगले दिन फिर वही प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। इससे उनका समय, मेहनत और अतिरिक्त किराया—तीनों बढ़ रहे हैं।
बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए यह व्यवस्था और भी कठिन साबित हो रही है। उमस भरी गर्मी में घंटों खड़े रहना उनके लिए बेहद मुश्किल है। कई लोग इसे व्यवस्था की खामी बताते हुए कहते हैं कि डिजिटल युग में भी गैस सिलिंडर के लिए दो-दो दिन तक भटकना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नेरवा में स्थायी गैस बुकिंग काउंटर खोला जाए और पहले की तरह ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से गैस सिलिंडरों की आपूर्ति शुरू की जाए, तो हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। उनका कहना है कि इससे न केवल लोगों के समय और धन की बचत होगी, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज के गांवों के उपभोक्ताओं को भी अनावश्यक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा।

अब क्षेत्र के गैस उपभोक्ता प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग से मांग कर रहे हैं कि व्यवस्था में जल्द सुधार किया जाए, ताकि रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को दो-दो दिन तक मशक्कत न करनी पड़े।
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