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Rampur Bushahar News: ऐतिहासिक पजाई मेले ढोल नगाड़ों की थाप पर झूमे लोग
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ग्राम पंचायत दूराह में दो दिवसीय पजाई मेला में महिलाएं नाटी लगाते हुए।
महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर डाली
महानाटी सांस्कृतिक संध्या में लोक गायकों ने मचाया धमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। उपतहसील नित्थर की दुराह पंचायत में दो दिवसीय पजाई मेला धूमधाम से मनाया गया। ऐतिहासिक पजाई मेले में ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग दिनभर झूमे। वहीं मेले में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर महानाटी डाली। गौर हो कि माता भुवनेश्वरी के मंदिर प्रांगण में यह मेला सैकड़ों वर्षों से बड़े हर्षोल्लास के साथ हर वर्ष भगवान शिव के पवित्र मास सावन में मनाया जाता है। वक्त के अनुसार मंदिर में बदलाव भी हुए हैं, लेकिन मंदिर का गर्भगृह सैकड़ों साल पुराना ही है, जहां माता विराजमान हैं। माता भुवनेश्वरी मंदिर के पुजारी केशव राम शर्मा, देवी सिंह ठाकुर, प्रेम सिंह ठाकुर और शेर सिंह ठाकुर का कहना है कि ऐसी मान्यता है कि माता भुवनेश्वरी इस पवित्र मास सावन में सावन की एक प्रविष्टि को तपस्या में बैठती हैं और चार को तपस्या से बाहर निकलती हैं। इसी खुशी के उपलक्ष्य पर पांच प्रविष्टि को पजाई मेला मनाया जाता है। दूर-दूर से पहुंचे लोग माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मेले में ढोल-नगाड़ों की मधुर धुनों पर पहाड़ी नाटियों का खूब दौर चला। मेले में दुराह, सराहर, बशला, लगोनी, गौरा, ग्वाल, श्मोह, पानवी, ढवार्च, शरटी, पढोर, पेरी और नित्थर के सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक लोक नृत्य और देव नृत्य रहा है। क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने अपनी आराध्य देवी माता भुवनेश्वरी को रथ में विराजमान हुए उनके दर्शन किए। साथ ही सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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महानाटी सांस्कृतिक संध्या में लोक गायकों ने मचाया धमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। उपतहसील नित्थर की दुराह पंचायत में दो दिवसीय पजाई मेला धूमधाम से मनाया गया। ऐतिहासिक पजाई मेले में ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग दिनभर झूमे। वहीं मेले में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधज कर महानाटी डाली। गौर हो कि माता भुवनेश्वरी के मंदिर प्रांगण में यह मेला सैकड़ों वर्षों से बड़े हर्षोल्लास के साथ हर वर्ष भगवान शिव के पवित्र मास सावन में मनाया जाता है। वक्त के अनुसार मंदिर में बदलाव भी हुए हैं, लेकिन मंदिर का गर्भगृह सैकड़ों साल पुराना ही है, जहां माता विराजमान हैं। माता भुवनेश्वरी मंदिर के पुजारी केशव राम शर्मा, देवी सिंह ठाकुर, प्रेम सिंह ठाकुर और शेर सिंह ठाकुर का कहना है कि ऐसी मान्यता है कि माता भुवनेश्वरी इस पवित्र मास सावन में सावन की एक प्रविष्टि को तपस्या में बैठती हैं और चार को तपस्या से बाहर निकलती हैं। इसी खुशी के उपलक्ष्य पर पांच प्रविष्टि को पजाई मेला मनाया जाता है। दूर-दूर से पहुंचे लोग माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मेले में ढोल-नगाड़ों की मधुर धुनों पर पहाड़ी नाटियों का खूब दौर चला। मेले में दुराह, सराहर, बशला, लगोनी, गौरा, ग्वाल, श्मोह, पानवी, ढवार्च, शरटी, पढोर, पेरी और नित्थर के सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक लोक नृत्य और देव नृत्य रहा है। क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने अपनी आराध्य देवी माता भुवनेश्वरी को रथ में विराजमान हुए उनके दर्शन किए। साथ ही सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।

ग्राम पंचायत दूराह में दो दिवसीय पजाई मेला में महिलाएं नाटी लगाते हुए।