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Rampur Bushahar News: कुलगांव में संघेड़ा रस्म के साथ तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन शुरू
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कुलगांव मे देवता शालू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने जाते देव
शालू महाराज देवता के मंदिर में चल रहा प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम
पहले दिन हजारों देवलुओं के साथ पहुंचे देवता
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर देवलुओं ने किया नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। कुलगांव में देवता शालू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह रविवार को संघेड़ा रस्म के साथ शुरू हो गया। तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में कुपड़ी मेल्ठी से शालू देवता, नंडला से देवता परशुराम, बडियारा और मंगवाणी से देवता किलबालू तथा बखोली से देवता नाग हजारों देवलुओं के साथ पहुंचे।
काष्ठकुणी शैली में बने इस मंदिर के निर्माण में करीब 14 वर्ष लगे हैं। मंदिर निर्माण में दिमांटा परिवार के राजमिस्त्रियों सहित अन्य कारीगरों ने पारंपरिक देव विधियों और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए कार्य को पूरा किया। निर्माण पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
समारोह के पहले दिन दोपहर बाद मेहमान देवताओं का आगमन शुरू हुआ। इसके बाद सभी देवताओं का मिलन हुआ। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर देवलुओं का नृत्य मुख्य आकर्षण रहा। संघेड़ा रस्म के तहत धूड़ी मंडल (रास मंडप) की परंपरा निभाई गई।
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सोमवार को शिखा पूजन की मुख्य रस्म अदा की जाएगी। इसमें मंदिर की छत पर विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चारण के साथ प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इस दौरान कुलगांव, शिरोली, मंगवाणी, बखोली और बडियारा गांवों में मेहमानों के स्वागत का दौर भी शुरू हो गया है।
मंदिर कमेटी शालू महाराज के मोतमीन उत्तम चंद पप्टू ने बताया कि इस आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। मंदिर परिसर में विशेष धाम का आयोजन किया गया है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। कुलगांव कैंची से ऊपर मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी सेवा भी शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद देवता शालू महाराज अपने मूल मंदिर में विराजमान होंगे और इस पवित्र आयोजन के सफल संपन्न होने से क्षेत्र में सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।
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पहले दिन हजारों देवलुओं के साथ पहुंचे देवता
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर देवलुओं ने किया नृत्य
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। कुलगांव में देवता शालू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा समारोह रविवार को संघेड़ा रस्म के साथ शुरू हो गया। तीन दिवसीय इस भव्य आयोजन में कुपड़ी मेल्ठी से शालू देवता, नंडला से देवता परशुराम, बडियारा और मंगवाणी से देवता किलबालू तथा बखोली से देवता नाग हजारों देवलुओं के साथ पहुंचे।
काष्ठकुणी शैली में बने इस मंदिर के निर्माण में करीब 14 वर्ष लगे हैं। मंदिर निर्माण में दिमांटा परिवार के राजमिस्त्रियों सहित अन्य कारीगरों ने पारंपरिक देव विधियों और रीति-रिवाजों का पालन करते हुए कार्य को पूरा किया। निर्माण पर लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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समारोह के पहले दिन दोपहर बाद मेहमान देवताओं का आगमन शुरू हुआ। इसके बाद सभी देवताओं का मिलन हुआ। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर देवलुओं का नृत्य मुख्य आकर्षण रहा। संघेड़ा रस्म के तहत धूड़ी मंडल (रास मंडप) की परंपरा निभाई गई।
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सोमवार को शिखा पूजन की मुख्य रस्म अदा की जाएगी। इसमें मंदिर की छत पर विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चारण के साथ प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इस दौरान कुलगांव, शिरोली, मंगवाणी, बखोली और बडियारा गांवों में मेहमानों के स्वागत का दौर भी शुरू हो गया है।
मंदिर कमेटी शालू महाराज के मोतमीन उत्तम चंद पप्टू ने बताया कि इस आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। मंदिर परिसर में विशेष धाम का आयोजन किया गया है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने व भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। कुलगांव कैंची से ऊपर मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी सेवा भी शुरू की गई है।
उन्होंने कहा कि प्राण-प्रतिष्ठा के बाद देवता शालू महाराज अपने मूल मंदिर में विराजमान होंगे और इस पवित्र आयोजन के सफल संपन्न होने से क्षेत्र में सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी।