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Rampur Bushahar News: मौसम खुलते ही प्लम की प्रूनिंग में शुरू
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रामपुर में मौसम खुलते ही प्लम की प्रूनिंग में जुटे बागवान
जमीन में नमी आने के बाद अब तौलिये बनाने में जुटे बागवान
पेड़ों को कैंकर से बचाने के लिए की जाएगी पेस्टिंग
निचले क्षेत्रों में प्लम बागवानों की मुख्य आर्थिकी
तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। हाल ही में ऊपरी इलाकों में हुई बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश के बाद अब बागवान बगीचों को संवारने में जुट गए हैं। रामपुर उपमंडल के निचले क्षेत्रों में बागवानों ने प्लम के पेड़ों की प्रूनिंग कार्य शुरू कर दिया है। इन दिनों सूबे में कई जगह प्लम के पौधों की काट छांट के कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है।
गौर हो कि बीते करीब चार माह से सूखे की मार हजारों बागवान झेल रहे थे। वहीं अब बीते दिनों हुई झमाझम बारिश के बाद जमीन में नमी लौट आई है। ऐसे में मौसम खुलने के बाद बागवान बगीचों को संवारने में जुट गए हैं। फिलहाल इन दिनों में बागवान प्लम के पौधों की प्रूनिंग कर रहे हैं। इसके बाद बागवान पौधों में पेस्टिंग का कार्य शुरू करेंगे। इससे पौधों को कैंकर रोग से बचाया जा सके। इसके बाद पौधों में तौलिये बनाने का कार्य शुरू होगा। प्रदेश में सेब के बाद निचले क्षेत्रों में प्लम बागवानों की मुख्य फसल है। सेब के अलावा बागवान प्लम का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। रामपुर में लाखों प्लम की पेटियों का उत्पादन होता है। हालांकि, जहां दशकों से सेब ने अपनी बादशाहत कायम की है, वहीं अब कुछ वर्षों से निचले क्षेत्रों में बागवानों का प्लम की विभिन्न किस्में तैयार करने की और रुझान बढ़ा है।
सेब बगीचों को तैयार करने में जहां काफी ज्यादा खर्चा आता है, वहीं प्लम के बगीचे को तैयार करने में सेब की अपेक्षा बागवानों को कम खर्च वहन करना पड़ता है। ऐसे में निचले क्षेत्रों में प्लम के बगीचे तैयार करने में बागवान दिलचस्पी ले रहे हैं। राजपुरा, खनोटू, खखरोला, स्विच यार्ड, तलाई, निरसू, दत्तनगर, रचोली, रतनपुर, गसो और कोटगढ़ सहित अन्य निचले क्षेत्रों में प्लम के पौधों की काट छांट का कार्य जोरों पर है।
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बागवान देवेंद्र, कुलवंत, हर्ष, रणवीर, रजनीकांत, सुरेंद्र, आनंद और शेर सिंह ने कहा कि इन दिनों बगीचों में प्लम की प्रूनिंग का कार्य जोरों पर चला है। काट छांट के बाद पेड़ों की टहनियों में पेस्ट का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके बाद तौलिये बनाने और खाद डालने का काम शुरू होगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बागवानी विभाग रामपुर के एसएमएस डॉ. अश्वनी चौहान ने कहा कि बारिश के बाद अब बागवान अपने बागवानी संबंधी कार्य निपटा सकते हैं। बारिश के बाद जमीन में नमी आ गई है। प्रूनिंग सहित तौलिये कार्य के लिए यह समय उपयुक्त है।
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पेड़ों को कैंकर से बचाने के लिए की जाएगी पेस्टिंग
निचले क्षेत्रों में प्लम बागवानों की मुख्य आर्थिकी
तिलक राज कायथ
रामपुर बुशहर। हाल ही में ऊपरी इलाकों में हुई बर्फबारी और निचले क्षेत्रों में बारिश के बाद अब बागवान बगीचों को संवारने में जुट गए हैं। रामपुर उपमंडल के निचले क्षेत्रों में बागवानों ने प्लम के पेड़ों की प्रूनिंग कार्य शुरू कर दिया है। इन दिनों सूबे में कई जगह प्लम के पौधों की काट छांट के कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है।
गौर हो कि बीते करीब चार माह से सूखे की मार हजारों बागवान झेल रहे थे। वहीं अब बीते दिनों हुई झमाझम बारिश के बाद जमीन में नमी लौट आई है। ऐसे में मौसम खुलने के बाद बागवान बगीचों को संवारने में जुट गए हैं। फिलहाल इन दिनों में बागवान प्लम के पौधों की प्रूनिंग कर रहे हैं। इसके बाद बागवान पौधों में पेस्टिंग का कार्य शुरू करेंगे। इससे पौधों को कैंकर रोग से बचाया जा सके। इसके बाद पौधों में तौलिये बनाने का कार्य शुरू होगा। प्रदेश में सेब के बाद निचले क्षेत्रों में प्लम बागवानों की मुख्य फसल है। सेब के अलावा बागवान प्लम का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर रहे हैं। रामपुर में लाखों प्लम की पेटियों का उत्पादन होता है। हालांकि, जहां दशकों से सेब ने अपनी बादशाहत कायम की है, वहीं अब कुछ वर्षों से निचले क्षेत्रों में बागवानों का प्लम की विभिन्न किस्में तैयार करने की और रुझान बढ़ा है।
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सेब बगीचों को तैयार करने में जहां काफी ज्यादा खर्चा आता है, वहीं प्लम के बगीचे को तैयार करने में सेब की अपेक्षा बागवानों को कम खर्च वहन करना पड़ता है। ऐसे में निचले क्षेत्रों में प्लम के बगीचे तैयार करने में बागवान दिलचस्पी ले रहे हैं। राजपुरा, खनोटू, खखरोला, स्विच यार्ड, तलाई, निरसू, दत्तनगर, रचोली, रतनपुर, गसो और कोटगढ़ सहित अन्य निचले क्षेत्रों में प्लम के पौधों की काट छांट का कार्य जोरों पर है।
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बागवान देवेंद्र, कुलवंत, हर्ष, रणवीर, रजनीकांत, सुरेंद्र, आनंद और शेर सिंह ने कहा कि इन दिनों बगीचों में प्लम की प्रूनिंग का कार्य जोरों पर चला है। काट छांट के बाद पेड़ों की टहनियों में पेस्ट का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके बाद तौलिये बनाने और खाद डालने का काम शुरू होगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बागवानी विभाग रामपुर के एसएमएस डॉ. अश्वनी चौहान ने कहा कि बारिश के बाद अब बागवान अपने बागवानी संबंधी कार्य निपटा सकते हैं। बारिश के बाद जमीन में नमी आ गई है। प्रूनिंग सहित तौलिये कार्य के लिए यह समय उपयुक्त है।