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Rampur Bushahar News: चांशल, चंद्रनाहन और मोराल डंडा की चोटियों पर हिमपात, निचले क्षेत्रों में बूंदाबांदी से बढ़ी ठंड
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बागवानी को मिलेगा लाभ, जंगलों में आग का खतरा घटने की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। उपमंडल रोहड़ू की ऊंची पर्वत चोटियों चांशल, चंद्रनाहन और मोराल डंडा में हिमपात होने से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। वहीं, निचले क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम में आए बदलाव से क्षेत्र में सर्दी का एहसास बढ़ गया है।
मौसम में बदलाव को बागवानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों में सेब सहित अन्य फलदार पौधों के लिए सर्दियों में पर्याप्त ठंड जरूरी होती है। वहीं, हल्की बारिश से जमीन में नमी बढ़ने से बागीचों को लाभ मिल सकता है। इससे बागवानों को बगीचों के रखरखाव से जुड़े कार्य करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, बारिश और हिमपात से जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगने की संभावना है। अक्तूबर से दिसंबर तक शुष्क मौसम के दौरान जंगलों में आग फैलने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में नमी बढ़ने से आग लगने और उसके फैलने की आशंका कम हो सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। उपमंडल रोहड़ू की ऊंची पर्वत चोटियों चांशल, चंद्रनाहन और मोराल डंडा में हिमपात होने से ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। वहीं, निचले क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम में आए बदलाव से क्षेत्र में सर्दी का एहसास बढ़ गया है।
मौसम में बदलाव को बागवानी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोहड़ू और आसपास के क्षेत्रों में सेब सहित अन्य फलदार पौधों के लिए सर्दियों में पर्याप्त ठंड जरूरी होती है। वहीं, हल्की बारिश से जमीन में नमी बढ़ने से बागीचों को लाभ मिल सकता है। इससे बागवानों को बगीचों के रखरखाव से जुड़े कार्य करने में भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
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दूसरी ओर, बारिश और हिमपात से जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगने की संभावना है। अक्तूबर से दिसंबर तक शुष्क मौसम के दौरान जंगलों में आग फैलने का खतरा अधिक रहता है। ऐसे में नमी बढ़ने से आग लगने और उसके फैलने की आशंका कम हो सकती है।
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