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Rampur Bushahar News: फाइनेंस कंपनी को दिया चेक बाउंस, अब हुई छह की सजा
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. गाड़ी की किस्तें भरने के लिए दिया था चेक
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को फाइनेंस कंपनी को 6.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। दोषी ने अपनी गाड़ी को कंपनी से फाइनेंस करवाया था, जिसकी वह किस्तें नहीं भर पाया। बाद में दिया चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता फाइनेंस कंपनी से आरोपी चंदर नेगी ने महिंद्रा बोलेरो कैंपर को वित्तपोषित करवाया। आरोपी को मूल रकम और ब्याज मिलाकर 4.50 लाख रुपये देने थे। आरोपी समय-समय पर किस्तें नहीं दे पाया। कंपनी ने अपने अधिकारी के जरिये आरोपी से बकाया रकम की पेमेंट करने के लिए संपर्क किया। आरोपी ने साल 2017 को चेक दिया, जो बाउंस हो गया। कंपनी ने आरोपी को कानूनी नोटिस जारी किया, लेकिन उसने रकम का भुगतान नहीं किया। वहीं, अदालत ने फैसला दिया है कि शिकायतकर्ता कंपनी ने रिकॉर्ड पर ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करके मामला साबित कर दिया है। इसलिए, निष्कर्षों के अनुक्रम में आरोपी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को छह महीने के साधारण कारावास की सजा दी जाती है। दोषी को आदेश दिया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को 6.50 लाख रुपये का मुआवजा दे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को फाइनेंस कंपनी को 6.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। दोषी ने अपनी गाड़ी को कंपनी से फाइनेंस करवाया था, जिसकी वह किस्तें नहीं भर पाया। बाद में दिया चेक बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता फाइनेंस कंपनी से आरोपी चंदर नेगी ने महिंद्रा बोलेरो कैंपर को वित्तपोषित करवाया। आरोपी को मूल रकम और ब्याज मिलाकर 4.50 लाख रुपये देने थे। आरोपी समय-समय पर किस्तें नहीं दे पाया। कंपनी ने अपने अधिकारी के जरिये आरोपी से बकाया रकम की पेमेंट करने के लिए संपर्क किया। आरोपी ने साल 2017 को चेक दिया, जो बाउंस हो गया। कंपनी ने आरोपी को कानूनी नोटिस जारी किया, लेकिन उसने रकम का भुगतान नहीं किया। वहीं, अदालत ने फैसला दिया है कि शिकायतकर्ता कंपनी ने रिकॉर्ड पर ठोस और भरोसेमंद सबूत पेश करके मामला साबित कर दिया है। इसलिए, निष्कर्षों के अनुक्रम में आरोपी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को छह महीने के साधारण कारावास की सजा दी जाती है। दोषी को आदेश दिया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को 6.50 लाख रुपये का मुआवजा दे।