{"_id":"63b5ae7c03d5fa3b3a494b85","slug":"signature-campaign-will-be-run-on-the-demands-of-mnrega-workers-rampur-hp-news-sml432945734","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: मनरेगा निर्माण मजदूरों की मांगों को लेकर गांव और पंचायत स्तर पर होगा अभियान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: मनरेगा निर्माण मजदूरों की मांगों को लेकर गांव और पंचायत स्तर पर होगा अभियान
विज्ञापन
हिमाचल भवन एवं सड़क निर्माण मजदूर यूनियन, ब्लॉक यूनिट निरमंड चाटी में बैठक के दौरान चर्चा करते ह?
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। हिमाचल भवन एवं सड़क निर्माण मजदूर यूनियन ब्लॉक इकाई निरमंड संबंधित सीटू का चौथा सम्मलेन किसान मजदूर भवन चाटी में हुआ। सम्मेलन में जिला भर से लगभग 120 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन का उद्घाटन सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा और हिमाचल भवन एवं सड़क निर्माण मजदूर यूनियन जिला सचिव रंजीत ने किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मजदूर कर्मचारी, किसान, महिला, नौजवान, छात्र और दलित विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है।
100 साल से बने 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं और लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में कांग्रेस की नई सरकार बनी है। पिछली सरकार की जनविरोधी नीतियों के चलते जनता ने सरकार को बदलने का काम किया। मनरेगा मजदूरों को पिछली यूपीए सरकार ने वर्ष 2013 में निर्माण मजदूर घोषित किया था और उन्हें तब से लेकर अब तक राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड का सदस्य बनने और लाभ लेने का अधिकार था, जिसे अब बंद करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य सरकारों को पत्र लिखा है। बोर्ड से मजदूरों को मिलने वाली सहायता सामग्री जैसे वाशिंग मशीन, इंडक्शन हीटर, सोलर लैंप और अन्य सामग्री बंद कर दी है।
विज्ञापन
यूनियन मांग करती है कि मनरेगा में 120 दिन का काम और प्रदेश सरकार की निर्धारित 350 मजदूरी अदा की जाए। मजदूरों की मांगों को लेकर यूनियन 15 जनवरी से 28 फरवरी तक हस्ताक्षर अभियान चलाएगी और पचास हजार हस्ताक्षर वाला मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।
विज्ञापन
सम्मेलन का उद्घाटन सीटू शिमला जिला अध्यक्ष कुलदीप डोगरा और हिमाचल भवन एवं सड़क निर्माण मजदूर यूनियन जिला सचिव रंजीत ने किया। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मजदूर कर्मचारी, किसान, महिला, नौजवान, छात्र और दलित विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है।
विज्ञापन
100 साल से बने 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं और लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में कांग्रेस की नई सरकार बनी है। पिछली सरकार की जनविरोधी नीतियों के चलते जनता ने सरकार को बदलने का काम किया। मनरेगा मजदूरों को पिछली यूपीए सरकार ने वर्ष 2013 में निर्माण मजदूर घोषित किया था और उन्हें तब से लेकर अब तक राज्य श्रमिक कल्याण बोर्ड का सदस्य बनने और लाभ लेने का अधिकार था, जिसे अब बंद करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने राज्य सरकारों को पत्र लिखा है। बोर्ड से मजदूरों को मिलने वाली सहायता सामग्री जैसे वाशिंग मशीन, इंडक्शन हीटर, सोलर लैंप और अन्य सामग्री बंद कर दी है।
विज्ञापन
यूनियन मांग करती है कि मनरेगा में 120 दिन का काम और प्रदेश सरकार की निर्धारित 350 मजदूरी अदा की जाए। मजदूरों की मांगों को लेकर यूनियन 15 जनवरी से 28 फरवरी तक हस्ताक्षर अभियान चलाएगी और पचास हजार हस्ताक्षर वाला मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा।