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Rampur Bushahar News: शांतड़ी महायज्ञ में निभाई शिखा पूजन की रस्म
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देव अनुष्ठान में मौजूद रहे हजारों लोगों
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। डिसवानी में आयोजित शांतड़ी महायज्ञ में शिखा पूजन की मुख्य रस्म निभाई गई। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग डिसवानी पहुंचे। मंदिर की छत पर पारंपरिक ढंग से शिखा पूजन मेहमान देवताओं की उपस्थित में किया गया। इस दौरान देव अनुष्ठान में चिउनी से देवता परशुराम, नडला से देवता परशुराम, रोहड़ू से देवता शिकड़ू महाराज, छुपाड़ी से देवता गुडारू, थली से देवता गुडारू महाराज विशेष रूप से मौजूद रहे। शांतड़ी अनुष्ठान में महेमाननवाजी का दौरा भी जमकर चला।
देवता गुडारू के सानिध्य में आयोजित हो रही शांतड़ी महायज्ञ में बुधवार सुबह से ही लोग शिखा पूजन की रस्म देखने के लिए मंदिर प्रांगण व आसपास में एकत्र होना शुरू हो गए थे। दोपहर बाद करीब दो बजे मंदिर की छत पर मंत्रोच्चारण के साथ रस्म निभाई गई। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। हथियारों से लैस देवलु पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर दिन भर नाचते रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देवताओं का मिलन व देवताओं के साथ देवलुओं का नृत्य रहा।
वीरवार को उछड़ पाछड़ कार्यक्रम के साथ महायज्ञ संपंन होगा। इस दौरान सभी देवलुओं के लिए मंदिर कमेटी की ओर से धाम की व्यवस्था भी की गई थी। मंदिर कमेटी के मोतमीन रविंद्र रिठवान ने बताया कि महायज्ञ में शिखा पूजन मुख्य रस्म थी। इसे पारंपरिक ढंग से निभाया गया है। अब उछड़ पाछड़ की रस्म वीरवार को होगी। वीरवार को देवताओं की विदाई के साथ महायज्ञ संपंन होगा। राजेश हंसरेटा।
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रोहड़ू। डिसवानी में आयोजित शांतड़ी महायज्ञ में शिखा पूजन की मुख्य रस्म निभाई गई। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग डिसवानी पहुंचे। मंदिर की छत पर पारंपरिक ढंग से शिखा पूजन मेहमान देवताओं की उपस्थित में किया गया। इस दौरान देव अनुष्ठान में चिउनी से देवता परशुराम, नडला से देवता परशुराम, रोहड़ू से देवता शिकड़ू महाराज, छुपाड़ी से देवता गुडारू, थली से देवता गुडारू महाराज विशेष रूप से मौजूद रहे। शांतड़ी अनुष्ठान में महेमाननवाजी का दौरा भी जमकर चला।
देवता गुडारू के सानिध्य में आयोजित हो रही शांतड़ी महायज्ञ में बुधवार सुबह से ही लोग शिखा पूजन की रस्म देखने के लिए मंदिर प्रांगण व आसपास में एकत्र होना शुरू हो गए थे। दोपहर बाद करीब दो बजे मंदिर की छत पर मंत्रोच्चारण के साथ रस्म निभाई गई। इसे देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। हथियारों से लैस देवलु पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों पर दिन भर नाचते रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण देवताओं का मिलन व देवताओं के साथ देवलुओं का नृत्य रहा।
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वीरवार को उछड़ पाछड़ कार्यक्रम के साथ महायज्ञ संपंन होगा। इस दौरान सभी देवलुओं के लिए मंदिर कमेटी की ओर से धाम की व्यवस्था भी की गई थी। मंदिर कमेटी के मोतमीन रविंद्र रिठवान ने बताया कि महायज्ञ में शिखा पूजन मुख्य रस्म थी। इसे पारंपरिक ढंग से निभाया गया है। अब उछड़ पाछड़ की रस्म वीरवार को होगी। वीरवार को देवताओं की विदाई के साथ महायज्ञ संपंन होगा। राजेश हंसरेटा।
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