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Rampur Bushahar News: किन्नौर में वर्ष-दर-वर्ष घट रहा भेड़ पालन का व्यवसाय
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सांगला में छह माह से कार्यालय में खरबा ऊन पिंजाई मशीन
ऊन पिंजाई केंद्रों में पिछले वर्ष पहुंची थी 32 हजार किलोग्राम ऊन, इस वर्ष गिरकर 22 हजार किलोग्राम पहुंची
जिले के पांच ऊन पिंजाई केंद्रों में खराब पड़ी मशीनें, भेड़ पालक झेल रहे दिक्कतें
भेड़ पालन के लिए सरकार दे रही 25 से 35 फीसदी अनुदान
एक वर्ष के अंतराल में करीब दस हजार किलोग्राम ऊन उत्पादन घटा
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। एक दौर था, जब जनजातीय क्षेत्रों में भेड़ पालन मुख्य व्यवसाय हुआ करता था। आज आधुनिकता के दौर में भेड़ पालन घटता जा रहा है। किन्नौर जिले में एक वर्ष के अंतराल में करीब दस हजार किलोग्राम ऊन उत्पादन घटा है। यह आंकड़ा खादी ग्रामोद्योग केंद्रों से जुड़ा है। इसके अलावा भेड़ पालक वूल फेडरेशन को अपनी ऊन बेचते हैं। जिले के विभिन्न स्थानों पर भेड़ पालकों की सुविधा के लिए ऊन पिंजाई केंद्र खोले गए हैं, जहां मशीनें कई सालों से खराब पड़ी हुई हैं। ऐसे में भेड़ पालकों को समय पर ऊन पिंजाई की सुविधा नहीं मिल रही है। गौर हो कि आधुनिकता का दौर और भेड़-बकरियों के पलायन की समस्या को देखते हुए लोग अब इस व्यवसाय में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जिले के पांच ऊन पिंजाई केंद्रों में बीते वर्ष 32 हजार किलोग्राम ऊन की पिंजाई हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 22 हजार किलोग्राम तक पहुंच गई है।
पिंजाई केंद्राें में मशीनें खराब होने के कारण भी भेड़ पालक परेशानियां झेल रहे हैं। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ स्थिति ऊन पिंजाई केंद्र में जनवरी 2023 से एक मशीन खराब पड़ी है, जबकि एक अन्य मशीन से कार्य चल रहा है। इस वर्ष जून से भावानगर में एक खराब मशीन से काम चलाया जा रहा है। पूह में दो मशीनों में से एक से काम चलाया जा रहा है। यहां एक मशीन 2016 से खराब पड़ी है। सांगला में इस वर्ष जून माह से दो मशीनें खराब पड़ी हैं। ऐसे में यहां भेड़ पालकों को ऊन पिंजाई की सुविधा नहीं मिल रही। जिले के चोलिंग में बीते तीन माह से एक मशीन के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में यहां पहुंचने वाले भेड़ पालकों की ऊन की पिंजाई समय पर नहीं हो रही है।
खराब मशीनें ठीक करने की मांग
छितकुल के पूर्व उपप्रधान अरविंद नेगी, सुंगरा के उपप्रधान अजय नेगी, नाथपा के उपप्रधान संजय युलाम, बड़ा कंबा की प्रधान मोनिका नेगी, छोटा कंबा की प्रधान स्नेहप्रभा नेगी, व्यापार मंडल अध्यक्ष सांगला भूपेश नेगी, उपाध्यक्ष किशोरी नेगी, कोठी के प्रधान ओम प्रकाश नेगी, उपप्रधान महेश नेगी, पूह के प्रधान राजेश नेगी, ज्ञाबुंग के प्रधान ज्ञान सिंह नेगी सहित अन्य ने बताया कि ऊन पिंजाई केंद्रों में मशीनें खराब होने के कारण भेड़ पालकों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्हाेंने प्रदेश सरकार और खादी ग्रामोद्योग प्रबंधन से जल्द से जल्द खराब पड़ी मशीनों को दुरुस्त करने की मांग उठाई है।
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किन्नौर जिले में भेड़ पालन का व्यवसाय वर्ष-दर-वर्ष घट रहा है। जिले के लोग अब भेड़ पालन अपनी आर्थिकी सशक्त करने के लिए नहीं कर रहे हैं। भेड़ पालन का कार्य पलायन पर आधारित रहता है। इसके चलते अब लोग भेड़ पालन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। यदि कोई भेड़ पालन करना चाहता है, तो उसे प्रधानमंत्री सृजन योजना के तहत 25 से 35 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। - संजीव जस्टा, नोडल अधिकारी, हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग शिमला
किन्नौर जिले में भेड उत्पादन घट रहा है। वर्ष 2018 में हुई जनगणना के मुताबिक किन्नौर जिले में 84281 भेड़ें थी। इनसे110 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा था। जिले में इस वर्ष के अंत तक भेड़ उत्पादन के सही आंकड़े उपलब्ध हो पाएंगे। - डाॅ. अजय नेगी, उप निदेशक, पशुपालन विभाग किन्नौर
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जिले के पांच ऊन पिंजाई केंद्रों में खराब पड़ी मशीनें, भेड़ पालक झेल रहे दिक्कतें
भेड़ पालन के लिए सरकार दे रही 25 से 35 फीसदी अनुदान
एक वर्ष के अंतराल में करीब दस हजार किलोग्राम ऊन उत्पादन घटा
बीरबल नेगी
सांगला (किन्नौर)। एक दौर था, जब जनजातीय क्षेत्रों में भेड़ पालन मुख्य व्यवसाय हुआ करता था। आज आधुनिकता के दौर में भेड़ पालन घटता जा रहा है। किन्नौर जिले में एक वर्ष के अंतराल में करीब दस हजार किलोग्राम ऊन उत्पादन घटा है। यह आंकड़ा खादी ग्रामोद्योग केंद्रों से जुड़ा है। इसके अलावा भेड़ पालक वूल फेडरेशन को अपनी ऊन बेचते हैं। जिले के विभिन्न स्थानों पर भेड़ पालकों की सुविधा के लिए ऊन पिंजाई केंद्र खोले गए हैं, जहां मशीनें कई सालों से खराब पड़ी हुई हैं। ऐसे में भेड़ पालकों को समय पर ऊन पिंजाई की सुविधा नहीं मिल रही है। गौर हो कि आधुनिकता का दौर और भेड़-बकरियों के पलायन की समस्या को देखते हुए लोग अब इस व्यवसाय में कम दिलचस्पी दिखा रहे हैं। जिले के पांच ऊन पिंजाई केंद्रों में बीते वर्ष 32 हजार किलोग्राम ऊन की पिंजाई हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 22 हजार किलोग्राम तक पहुंच गई है।
पिंजाई केंद्राें में मशीनें खराब होने के कारण भी भेड़ पालक परेशानियां झेल रहे हैं। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ स्थिति ऊन पिंजाई केंद्र में जनवरी 2023 से एक मशीन खराब पड़ी है, जबकि एक अन्य मशीन से कार्य चल रहा है। इस वर्ष जून से भावानगर में एक खराब मशीन से काम चलाया जा रहा है। पूह में दो मशीनों में से एक से काम चलाया जा रहा है। यहां एक मशीन 2016 से खराब पड़ी है। सांगला में इस वर्ष जून माह से दो मशीनें खराब पड़ी हैं। ऐसे में यहां भेड़ पालकों को ऊन पिंजाई की सुविधा नहीं मिल रही। जिले के चोलिंग में बीते तीन माह से एक मशीन के सहारे ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में यहां पहुंचने वाले भेड़ पालकों की ऊन की पिंजाई समय पर नहीं हो रही है।
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खराब मशीनें ठीक करने की मांग
छितकुल के पूर्व उपप्रधान अरविंद नेगी, सुंगरा के उपप्रधान अजय नेगी, नाथपा के उपप्रधान संजय युलाम, बड़ा कंबा की प्रधान मोनिका नेगी, छोटा कंबा की प्रधान स्नेहप्रभा नेगी, व्यापार मंडल अध्यक्ष सांगला भूपेश नेगी, उपाध्यक्ष किशोरी नेगी, कोठी के प्रधान ओम प्रकाश नेगी, उपप्रधान महेश नेगी, पूह के प्रधान राजेश नेगी, ज्ञाबुंग के प्रधान ज्ञान सिंह नेगी सहित अन्य ने बताया कि ऊन पिंजाई केंद्रों में मशीनें खराब होने के कारण भेड़ पालकों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। उन्हाेंने प्रदेश सरकार और खादी ग्रामोद्योग प्रबंधन से जल्द से जल्द खराब पड़ी मशीनों को दुरुस्त करने की मांग उठाई है।
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किन्नौर जिले में भेड़ पालन का व्यवसाय वर्ष-दर-वर्ष घट रहा है। जिले के लोग अब भेड़ पालन अपनी आर्थिकी सशक्त करने के लिए नहीं कर रहे हैं। भेड़ पालन का कार्य पलायन पर आधारित रहता है। इसके चलते अब लोग भेड़ पालन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। यदि कोई भेड़ पालन करना चाहता है, तो उसे प्रधानमंत्री सृजन योजना के तहत 25 से 35 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। - संजीव जस्टा, नोडल अधिकारी, हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग शिमला
किन्नौर जिले में भेड उत्पादन घट रहा है। वर्ष 2018 में हुई जनगणना के मुताबिक किन्नौर जिले में 84281 भेड़ें थी। इनसे110 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा था। जिले में इस वर्ष के अंत तक भेड़ उत्पादन के सही आंकड़े उपलब्ध हो पाएंगे। - डाॅ. अजय नेगी, उप निदेशक, पशुपालन विभाग किन्नौर

सांगला में छह माह से कार्यालय में खरबा ऊन पिंजाई मशीन