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सतलुज नदी से शनिधाम और लक्ष्मीनारायण मंदिर का होगा संरक्षण
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सतलुज नदी से ढहा लक्ष्मी नारायण मंदिर का डंगा।
- फोटो : RAMPUR-HP
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रामपुर बुशहर। सतलुज का जलस्तर बढ़ने से रामपुर के दो मंदिरों के भवनों को नुकसान हुआ है। शहर का शनिधाम मंदिर जहां खतरे की जद में आ गया है, वहीं साथ लगते लक्ष्मीनारायण मंदिर का डंगा ढहने से मंदिर भवन पर खतरा मंडरा रहा है।
सतलुज नदी के किनारे सुरक्षा दीवार लगाने के लिए जल शक्ति विभाग ने प्रशासन को 2.30 करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार कर भेजा है। इसके लिए प्रशासन डिजास्टर मैनेजमेंट फंड के तहत राशि जुटाएगा। गौरतलब है कि रामपुर के वार्ड नंबर तीन में शनिधाम मंदिर को बीते माह सतलुज नदी के बढ़े जलस्तर से क्षति पहुंची थी। इससे मंदिर में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। मंदिर कभी भी ध्वस्त हो सकता है।
प्रशासन ने इस मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। वहीं साथ लगते सदियों पुराने लक्ष्मीनारायण मंदिर का भी तीन दिन पहले डंगा ढह चुका है। दोनों मंदिर खतरे की जद में आ गए हैं। प्रशासन ने बीते एक अगस्त को जल शक्ति विभाग को मंदिरों की सुरक्षा और सतलुज बेसिन में सुरक्षा दीवार लगाने को लेकर एस्टिमेट तैयार करने के निर्देश दिए थे। जल शक्ति विभाग रामपुर ने प्रारंभिक एस्टिमेट तैयार कर प्रशासन को भेजा है। सुरक्षा दीवार के लिए आईपीएच विभाग के तहत ही कार्य किया जाना है।
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हालांकि विभाग ने इस संबंध में खाका तैयार कर सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) पुणे को भेजा था। जल शक्ति विभाग ने सतलुज नदी के साथ सटे इलाके की सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षा दीवार लगाने को लेकर 2.30 करोड़ रुपये का एस्टिमेट भेजा है। स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन फंड के तहत सुरक्षा दीवार लगाने जिला प्रशासन को मामला भेजा है। यदि समय रहते बजट का प्रावधान हो जाता है तो दोनों मंदिरों को सुरक्षा दी जा सकती है।
एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन ने बताया कि आईपीएच विभाग को एक अगस्त को सुरक्षा दीवार लगाने के संबंध में एस्टिमेट तैयार करने को कहा था। इसे जिला प्रशासन को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि बजट जारी होते ही सुरक्षा दीवार लगाने का काम शुरू होगा।
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सतलुज नदी के किनारे सुरक्षा दीवार लगाने के लिए जल शक्ति विभाग ने प्रशासन को 2.30 करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार कर भेजा है। इसके लिए प्रशासन डिजास्टर मैनेजमेंट फंड के तहत राशि जुटाएगा। गौरतलब है कि रामपुर के वार्ड नंबर तीन में शनिधाम मंदिर को बीते माह सतलुज नदी के बढ़े जलस्तर से क्षति पहुंची थी। इससे मंदिर में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। मंदिर कभी भी ध्वस्त हो सकता है।
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प्रशासन ने इस मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। वहीं साथ लगते सदियों पुराने लक्ष्मीनारायण मंदिर का भी तीन दिन पहले डंगा ढह चुका है। दोनों मंदिर खतरे की जद में आ गए हैं। प्रशासन ने बीते एक अगस्त को जल शक्ति विभाग को मंदिरों की सुरक्षा और सतलुज बेसिन में सुरक्षा दीवार लगाने को लेकर एस्टिमेट तैयार करने के निर्देश दिए थे। जल शक्ति विभाग रामपुर ने प्रारंभिक एस्टिमेट तैयार कर प्रशासन को भेजा है। सुरक्षा दीवार के लिए आईपीएच विभाग के तहत ही कार्य किया जाना है।
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हालांकि विभाग ने इस संबंध में खाका तैयार कर सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) पुणे को भेजा था। जल शक्ति विभाग ने सतलुज नदी के साथ सटे इलाके की सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षा दीवार लगाने को लेकर 2.30 करोड़ रुपये का एस्टिमेट भेजा है। स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रबंधन फंड के तहत सुरक्षा दीवार लगाने जिला प्रशासन को मामला भेजा है। यदि समय रहते बजट का प्रावधान हो जाता है तो दोनों मंदिरों को सुरक्षा दी जा सकती है।
एसडीएम रामपुर सुरेंद्र मोहन ने बताया कि आईपीएच विभाग को एक अगस्त को सुरक्षा दीवार लगाने के संबंध में एस्टिमेट तैयार करने को कहा था। इसे जिला प्रशासन को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि बजट जारी होते ही सुरक्षा दीवार लगाने का काम शुरू होगा।