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Rampur Bushahar News: किन्नौर के करीब दस विभागों ने नहीं की केरोसिन तेल की अदायगी
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दो वित्त वर्षों में 34,67,342 की देय राशि पर विभागों ने मारी कुंडली, सर्दी से बचने के लिए हर वर्ष 60 विभागों को केरोसिन उपलब्ध करवाता है निगम
रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। सीमांत क्षेत्र जिला किन्नौर में भारी हिमपात और सर्दियों में विभागों के कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए हर वर्ष नागरिक आपूर्ति निगम विभागों को केरोसिन तेल उपलब्ध करवाता है। सुविधा मिलने के बावजूद करीब दस विभागों ने तेल के बिल की अदायगी नहीं की है। इस कारण निगम को व्यवस्था बनाना मुश्किल हो गया है। दो वित्तीय वर्षों में इन विभागों ने करीब 34,67,342 रुपये की राशि का भुगतान नहीं किया है। सर्दी से बचने के लिए निगम हर वर्ष 60 विभागों को केरोसिन तेल उपलब्ध करवाता है। गौर हो कि जनजातीय जिला किन्नौर में सर्दियों में कार्यालय संबंधी कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए छह माह में एक लाख 97 हजार 178 लीटर केरोसिन तेल सप्लाई किया, जिसकी लागत एक करोड़ 98 लाख 40 हजार 918 रुपये बनती है। अक्तूबर 2023 से मार्च 2024 तक जिले के 60 सरकारी और गैर सरकारी विभागों को हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम रिकांगपिओं ने ने केरोसिन तेल सप्लाई की, लेकिन निगम को वित्तय वर्ष 2023-2024 अभी तक कुल एक करोड़ 40 लाख 419 रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जबकि 8 से 10 विभागों ने अभी तक केरोसिन तेल का कीमत नहीं चुकाई है। यह सिलसिला हर साल चलता है। वर्ष 2022-2023 की लंबित राशि जो करीब 18 लाख 15 हजार 495 रुपये बनती है, अब तक निगम के पास जमा नहीं हो पाई है। दो वित्तीय वर्षों में कुल 34 लाख 67 हजार 342 रुपये की अदायगी इन 10 सरकारी और गैर सरकारी विभागों ने नहीं की है। सर्दियों में केरोसिन तेल की सबसे ज्यादा खपत सरकारी अस्पतालों में होती है। इस वर्ष मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 26 हजार लीटर, तीनों शिक्षा खंडों के शिक्षा विभाग को 10 हजार लीटर, आयुष विभाग को 11 हजार लीटर, उप निदेशक पशुपालन विभाग को छह हजार लीटर और प्राथमिक शिक्षा विभाग को 9500 लीटर केरोसिन तेल सप्लाई किया गया है। बतातें चलें कि सरकार ने शीत मरुस्थल के नाम से विख्यात किन्नौर जिले के कार्यालयों में हर वर्ष अक्तूबर से अप्रैल माह तक केरोसिन हीटर का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार से किया है पत्राचार
उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार से अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता को देखते हुए पत्राचार किया है, ताकि बकाया बिलों का भुगतान किया जा सके। - संवाद
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रतन लाल नेगी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। सीमांत क्षेत्र जिला किन्नौर में भारी हिमपात और सर्दियों में विभागों के कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए हर वर्ष नागरिक आपूर्ति निगम विभागों को केरोसिन तेल उपलब्ध करवाता है। सुविधा मिलने के बावजूद करीब दस विभागों ने तेल के बिल की अदायगी नहीं की है। इस कारण निगम को व्यवस्था बनाना मुश्किल हो गया है। दो वित्तीय वर्षों में इन विभागों ने करीब 34,67,342 रुपये की राशि का भुगतान नहीं किया है। सर्दी से बचने के लिए निगम हर वर्ष 60 विभागों को केरोसिन तेल उपलब्ध करवाता है। गौर हो कि जनजातीय जिला किन्नौर में सर्दियों में कार्यालय संबंधी कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए छह माह में एक लाख 97 हजार 178 लीटर केरोसिन तेल सप्लाई किया, जिसकी लागत एक करोड़ 98 लाख 40 हजार 918 रुपये बनती है। अक्तूबर 2023 से मार्च 2024 तक जिले के 60 सरकारी और गैर सरकारी विभागों को हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम रिकांगपिओं ने ने केरोसिन तेल सप्लाई की, लेकिन निगम को वित्तय वर्ष 2023-2024 अभी तक कुल एक करोड़ 40 लाख 419 रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जबकि 8 से 10 विभागों ने अभी तक केरोसिन तेल का कीमत नहीं चुकाई है। यह सिलसिला हर साल चलता है। वर्ष 2022-2023 की लंबित राशि जो करीब 18 लाख 15 हजार 495 रुपये बनती है, अब तक निगम के पास जमा नहीं हो पाई है। दो वित्तीय वर्षों में कुल 34 लाख 67 हजार 342 रुपये की अदायगी इन 10 सरकारी और गैर सरकारी विभागों ने नहीं की है। सर्दियों में केरोसिन तेल की सबसे ज्यादा खपत सरकारी अस्पतालों में होती है। इस वर्ष मुख्य चिकित्सा अधिकारी को 26 हजार लीटर, तीनों शिक्षा खंडों के शिक्षा विभाग को 10 हजार लीटर, आयुष विभाग को 11 हजार लीटर, उप निदेशक पशुपालन विभाग को छह हजार लीटर और प्राथमिक शिक्षा विभाग को 9500 लीटर केरोसिन तेल सप्लाई किया गया है। बतातें चलें कि सरकार ने शीत मरुस्थल के नाम से विख्यात किन्नौर जिले के कार्यालयों में हर वर्ष अक्तूबर से अप्रैल माह तक केरोसिन हीटर का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार से किया है पत्राचार
उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार से अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता को देखते हुए पत्राचार किया है, ताकि बकाया बिलों का भुगतान किया जा सके। - संवाद
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