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सैनिक स्कूलों के निजीकरण और सांप्रदायिकता पर लगे रोक : एसएफआई
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। एसएफआई लोकल कमेटी रामपुर ने सैनिक स्कूलों को आरएसएस को दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। 2022 से 2023 के बीच केंद्र सरकार ने 40 सैनिक स्कूल समझौते के तहत आरएसएस से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को दिए गए। सैनिक स्कूलों सहित रक्षा क्षेत्र के निजीकरण और सांप्रदायिकरण दोनों के खतरों से गुजर रहा है। इकाई सचिव राहुल और राज्य उपाध्यक्ष बंटी ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय नौसेना अकादमी में दाखिला लेने वाले कैडेटों का महत्वपूर्ण हिस्सा सैनिक स्कूलों के छात्र हैं। ऐसे में सैनिक स्कूलों को सौंपने का कदम भाजपा-आरएसएस द्वारा भारत के रक्षाबलों पर कब्जा करने और सांप्रदायिकरण करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। भाजपा-आरएसएस शासित केंद्र निजीकरण के माध्यम से सांप्रदायिकरण का तरीका अपना रहा है। उन्होंने कहा कि एसएफआई ने शुरू से ही सैनिक स्कूलों के निजीकरण का विरोध किया है। इससे हमारे रक्षा बलों को होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। आरएसएस जैसे फासीवादी संगठनों को सैनिक स्कूल देने से सशस्त्र बलों के चरित्र और लोकाचार पर असर पड़ेगा। एसएफआई ने मांग उठाई कि केंद्र सरकार सैनिक स्कूलों और अन्य रक्षा क्षेत्र के संस्थानों के निजीकरण को वापस लें। इकाई ने रक्षा क्षेत्र के सभी हितधारकों और देश की आम जनता से आग्रह किया है कि वे भारत के रक्षाबलों को सांप्रदायिक बनाने के विनाशकारी प्रयासों का विरोध करने के लिए आगे आएं।
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रामपुर बुशहर। एसएफआई लोकल कमेटी रामपुर ने सैनिक स्कूलों को आरएसएस को दिए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। 2022 से 2023 के बीच केंद्र सरकार ने 40 सैनिक स्कूल समझौते के तहत आरएसएस से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों को दिए गए। सैनिक स्कूलों सहित रक्षा क्षेत्र के निजीकरण और सांप्रदायिकरण दोनों के खतरों से गुजर रहा है। इकाई सचिव राहुल और राज्य उपाध्यक्ष बंटी ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय नौसेना अकादमी में दाखिला लेने वाले कैडेटों का महत्वपूर्ण हिस्सा सैनिक स्कूलों के छात्र हैं। ऐसे में सैनिक स्कूलों को सौंपने का कदम भाजपा-आरएसएस द्वारा भारत के रक्षाबलों पर कब्जा करने और सांप्रदायिकरण करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है। भाजपा-आरएसएस शासित केंद्र निजीकरण के माध्यम से सांप्रदायिकरण का तरीका अपना रहा है। उन्होंने कहा कि एसएफआई ने शुरू से ही सैनिक स्कूलों के निजीकरण का विरोध किया है। इससे हमारे रक्षा बलों को होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया है। आरएसएस जैसे फासीवादी संगठनों को सैनिक स्कूल देने से सशस्त्र बलों के चरित्र और लोकाचार पर असर पड़ेगा। एसएफआई ने मांग उठाई कि केंद्र सरकार सैनिक स्कूलों और अन्य रक्षा क्षेत्र के संस्थानों के निजीकरण को वापस लें। इकाई ने रक्षा क्षेत्र के सभी हितधारकों और देश की आम जनता से आग्रह किया है कि वे भारत के रक्षाबलों को सांप्रदायिक बनाने के विनाशकारी प्रयासों का विरोध करने के लिए आगे आएं।