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Rampur Bushahar News: एफसीए के फेर में फंसा बहुतकनीकी कॉलेज, दफ्तरों में धूल फांक रहीं फाइलें
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वर्ष 2016 में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने किया था शिलान्यास, आठ वर्ष बाद भी तकनीकी शिक्षा मिलने का इंतजार कर रहे युवा
चुनाव का दौर आते ही फिर उठा बहुतकनीकी संस्थान दलाश का मुद्दा
आशीष शर्मा
दलाश (कुल्लू)। हर बार के चुनाव की भांति इस बार के लोकसभा चुनाव से पूर्व बहुतकनीकी संस्थान दलाश का मुद्दा उठा है। दलाश में प्रस्तावित बहुतकनीकी संस्थान के निर्माण को लेकर सभी राजनीतिक दल लोगों को लुभाने के प्रयास में जुटे हैं। हालांकि संस्थान का मुद्दा लंबे समय से (एफसीए) फॉरेस्ट क्लीयरेंस के फेर में फंसा हुआ है और इससे जुड़ी फाइलें कार्यालयों में धूल फांक रही हैं। शिलान्यास के आठ साल बाद भी संस्थान का कोई अता-पता नहीं है। क्षेत्र के युवा वर्षों से घरद्वार पर तकनीकी शिक्षा मिलने की आस लगाए हुए हैं। स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने सभी विभागीय औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इस मामले को विभाग को सौंपा, लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी यह संस्थान औपचारिकताओं के फेर में फंसा हुआ है। वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दलाश में बहुतकनीकी संस्थान खोलने की घोषणा की थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले निरमंड में इसका शिलान्यास किया गया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद भाजपा सरकार प्रदेश में सत्तासीन हुई और इस संस्थान को डिनोटिफाइड कर दिया। इसका कारण भाजपा सरकार ने आधी अधूरी नोटिफिकेशन बताया और फिर पुन: भाजपा सरकार ने वर्ष 2019 में इसे कैबिनेट से स्वीकृति प्रदान करके दलाश बहुतकनीकी संस्थान में 5 ट्रेड के साथ 97 पदों को स्वीकृति प्रदान की। बीते विधानसभा चुनावों में आनी विधानसभा क्षेत्रों के सभी पार्टियों और आजाद प्रत्याशियों ने इसे जल्द खोलने का हर मंच से वादा किया था, लेकिन चुनाव संपन्न होने के डेढ़ वर्ष बाद भी अभी तक यह संस्थान (एफसीए) फॉरेस्ट क्लीयरेंस के फेर में फंसा है और कोई भी राजनीतिक दल इस संस्थान को खोलने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। वहीं लोकसभा चुनाव में भी सभी दल संस्थान खोलने का एक बार फिर आश्वासन दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दलाश संस्थान तकनीकी शिक्षा में आनी और साथ लगती करीब आधा दर्जन विधानसभा क्षेत्रों का सबसे बड़ा संस्थान होगा। इसके साथ लगती आधा दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में भी ये संस्थान नहीं है। इसके यहां खुलने से इन सभी विधानसभा क्षेत्रों के विद्यार्थियों को घर-द्वार पर तकनीकी शिक्षा का लाभ मिलेगा। दलाश पंचायत प्रधान सत्येंद्र शर्मा, उपप्रधान सोहनी राम राठी, ब्यूंगल पंचायत प्रधान जालप राम, डिंगीधार पंचायत प्रधान बंसी लाल, बीडीसी अध्यक्ष आनी विजय कंवर सहित अन्य लोगों ने तकनीकी शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से इस संस्थान की सभी औपचारिकताएं पूरी कर संस्थान का काम जल्द शुरू करने की मांग की है।
कोट्सबहुतकनीकी संस्थान दलाश की फाइल एफसीए की क्लीयरेंस के लिए वन विभाग के पास भेजी गई है, जैसे ही वन विभाग से क्लीयरेंस रिपोर्ट आती है फिर आगे की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
अक्षय सूद, निदेशक तकनीकी शिक्षा विभाग सुंदरनगर
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चुनाव का दौर आते ही फिर उठा बहुतकनीकी संस्थान दलाश का मुद्दा
आशीष शर्मा
दलाश (कुल्लू)। हर बार के चुनाव की भांति इस बार के लोकसभा चुनाव से पूर्व बहुतकनीकी संस्थान दलाश का मुद्दा उठा है। दलाश में प्रस्तावित बहुतकनीकी संस्थान के निर्माण को लेकर सभी राजनीतिक दल लोगों को लुभाने के प्रयास में जुटे हैं। हालांकि संस्थान का मुद्दा लंबे समय से (एफसीए) फॉरेस्ट क्लीयरेंस के फेर में फंसा हुआ है और इससे जुड़ी फाइलें कार्यालयों में धूल फांक रही हैं। शिलान्यास के आठ साल बाद भी संस्थान का कोई अता-पता नहीं है। क्षेत्र के युवा वर्षों से घरद्वार पर तकनीकी शिक्षा मिलने की आस लगाए हुए हैं। स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने सभी विभागीय औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद इस मामले को विभाग को सौंपा, लेकिन कई वर्ष बीतने के बाद भी यह संस्थान औपचारिकताओं के फेर में फंसा हुआ है। वर्ष 2016 में कांग्रेस सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दलाश में बहुतकनीकी संस्थान खोलने की घोषणा की थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले निरमंड में इसका शिलान्यास किया गया। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद भाजपा सरकार प्रदेश में सत्तासीन हुई और इस संस्थान को डिनोटिफाइड कर दिया। इसका कारण भाजपा सरकार ने आधी अधूरी नोटिफिकेशन बताया और फिर पुन: भाजपा सरकार ने वर्ष 2019 में इसे कैबिनेट से स्वीकृति प्रदान करके दलाश बहुतकनीकी संस्थान में 5 ट्रेड के साथ 97 पदों को स्वीकृति प्रदान की। बीते विधानसभा चुनावों में आनी विधानसभा क्षेत्रों के सभी पार्टियों और आजाद प्रत्याशियों ने इसे जल्द खोलने का हर मंच से वादा किया था, लेकिन चुनाव संपन्न होने के डेढ़ वर्ष बाद भी अभी तक यह संस्थान (एफसीए) फॉरेस्ट क्लीयरेंस के फेर में फंसा है और कोई भी राजनीतिक दल इस संस्थान को खोलने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा। वहीं लोकसभा चुनाव में भी सभी दल संस्थान खोलने का एक बार फिर आश्वासन दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दलाश संस्थान तकनीकी शिक्षा में आनी और साथ लगती करीब आधा दर्जन विधानसभा क्षेत्रों का सबसे बड़ा संस्थान होगा। इसके साथ लगती आधा दर्जन विधानसभा क्षेत्रों में भी ये संस्थान नहीं है। इसके यहां खुलने से इन सभी विधानसभा क्षेत्रों के विद्यार्थियों को घर-द्वार पर तकनीकी शिक्षा का लाभ मिलेगा। दलाश पंचायत प्रधान सत्येंद्र शर्मा, उपप्रधान सोहनी राम राठी, ब्यूंगल पंचायत प्रधान जालप राम, डिंगीधार पंचायत प्रधान बंसी लाल, बीडीसी अध्यक्ष आनी विजय कंवर सहित अन्य लोगों ने तकनीकी शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार से इस संस्थान की सभी औपचारिकताएं पूरी कर संस्थान का काम जल्द शुरू करने की मांग की है।
कोट्सबहुतकनीकी संस्थान दलाश की फाइल एफसीए की क्लीयरेंस के लिए वन विभाग के पास भेजी गई है, जैसे ही वन विभाग से क्लीयरेंस रिपोर्ट आती है फिर आगे की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
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अक्षय सूद, निदेशक तकनीकी शिक्षा विभाग सुंदरनगर