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मिड-डे मील वर्करों को मिले 12 हजार रुपये न्यूनतम वेतन : कुलदीप

Thu, 11 Apr 2024 04:33 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 04:33 PM IST
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उच्च न्यायालय के आदेशानुसार दस के बजाय 12 माह का वेतन देने की भी उठाई मांग
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चेताया, जल्द मांगों को नहीं किया पूरा तो संघर्ष होगा तेज

संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मिड-डे मील योजना का निजीकरण करने की कोशिश कर रही है, जबकि देश बढ़ते कुपोषण और भुखमरी का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार की ओर से 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार मिड-डे मील मजदूरों को मजदूर का दर्जा देने, पेंशन, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य आदि सुविधा को लागू नहीं किया जा रहा है। यह बात सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, देवेंद्र कुमार, मिड-डे मील यूनियन सराहन अध्यक्ष मीना और महासचिव संगीता ने कही। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन संबंधित सीटू ब्लॉक इकाई सराहन की बैठक वीरवार को यूनियन अध्यक्ष मीना की अध्यक्षता में ज्यूरी में हुई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मिड-डे मील वर्करों के वेतन में 2014 के बाद से अब तक एक रुपये की वृद्धि नहीं की है। मोदी सरकार ने मिड-डे मील योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री पोषण योजना कर इसे खत्म करने का खाका तैयार कर लिया है। सरकार मिड-डे मिल योजना में केंद्रीय रसोई घर और डीबीटी शुरू कर रही है। स्कूलों में मिड-डे मील के खाते बंद कर दिए गए हैं। मोदी सरकार नई शिक्षा नीति को देश में लागू कर रही है। इसके चलते बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद किए जा रहे हैं। केंद्रीय बजट 2023-24, जोकि 2022-23 के संशोधित आवंटन से कम है, इसलिए मजदूर विरोधी मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के अलावा मजदूरों के पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार एमडीएम वर्करों के मानदेय में की गई पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी वर्करों के साथ मजाक है। प्रदेश सरकार ने कई स्कूल बंद कर दिए हैं जबकि युक्तिकरण नीति से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को बंद किया जा रहा है, जबकि सरकार मिड-डे मील मजदूरों के रोजगार को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना रही है। हिमाचल हाईकोर्ट के 31 अक्तूबर 2019 के निर्णय अनुसार मिड-डे मील वर्कर्स दस महीने के बजाय 12 महीने का वेतन देने के आदेश दिए थे, जिसे न तो पिछली सरकार और न ही वर्तमान सरकार लागू कर रही है। यूनियन ने सरकार से मिड-डे मील वर्कर का वेतन न्यूनतम वेतन 12,000 रुपये करने, वर्कर्स को मजदूर का दर्जा देने, हिमाचल हाईकोर्ट के 31 अक्तूबर 2019 के आदेशानुसार 12 महीने का वेतन देने, 45वें श्रम सम्मेलन अनुसार मजदूर का दर्जा देने, न्यूनतम वेतन, छुट्टियां, ग्रेच्युटी, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की है। यूनियन ने चेताया कि अगर इन मांगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में संघर्ष तेज किया जाएगा। इस मौके पर बिमला देवी, प्रोमिला, हिउकी देवी, आशा, विजय लक्ष्मी, रुकमणी, बबली देवी, कमला, कृष्णा और शांति देवी सहित अन्य मौजूद रहे।
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