{"_id":"658842bd050585592a000226","slug":"rampur-news-forest-fire-nerwa-rampur-hp-news-c-178-1-ssml1033-10026-2023-12-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: नेरवा के जंगलों में बढ़ रही आग की घटनाएं, चारों ओर फैला धुंआ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: नेरवा के जंगलों में बढ़ रही आग की घटनाएं, चारों ओर फैला धुंआ
विज्ञापन
सूखे के कारण बढ़ रही घटनाएं, जंगल के सौ मीटर के दायरे में आग लगाने की लेनी होगी अनुमति
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा(रोहड़ू)। लगातार सूखे के कारण चौपाल विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश भाग के जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जंगलों की आग के कारण पूरे क्षेत्र में धुंआ फैला हुआ है। इससे कई स्थानों पर दृश्यता मात्र 50 मीटर तक रह गई है। सबसे अधिक परेशानी अस्थमा के रोगियों को पेश आ रही है। जंगलों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं ने वन विभाग के कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वन परिक्षेत्राधिकारी नेरवा विजय कुमार चौहान का कहना है कि लोग पौधों की काटछांट में निकली टहनियों को आग लगाते हैं। सावधानीपूर्वक आग न बुझाने पर आग जंगलों तक पहुंच जाती है। भेड़पालक भी नए घास के लिए घासनियों में आग लगाते हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग शरारती तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्णय ले चुका है। जंगल के 100 मीटर के दायरे में आग लगाने के लिए वन मंडलाधिकारी या वन परिक्षेत्राधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक है। बिना अनुमति आग लगाने पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। निजी घासनी में भी आग लगाने के लिए वन विभाग की अनुमति लेना आवश्यक है। बिना अनुमति घासनी में आग लगाने पर भी पच्चीस सौ रुपये का जुर्माना है। उन्होंने कहा कि आग लगाना नॉन कंपाउंडेबल ऑफेंस हैं। दोषी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर करवाई जाएगी। अगर स्थानीय लोग आग बुझाने में वन विभाग की मदद नहीं करेंगे तो उनके टीडी अधिकार पांच साल के लिए सस्पेंड कर दिए जाएंगे।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नेरवा(रोहड़ू)। लगातार सूखे के कारण चौपाल विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश भाग के जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। जंगलों की आग के कारण पूरे क्षेत्र में धुंआ फैला हुआ है। इससे कई स्थानों पर दृश्यता मात्र 50 मीटर तक रह गई है। सबसे अधिक परेशानी अस्थमा के रोगियों को पेश आ रही है। जंगलों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं ने वन विभाग के कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वन परिक्षेत्राधिकारी नेरवा विजय कुमार चौहान का कहना है कि लोग पौधों की काटछांट में निकली टहनियों को आग लगाते हैं। सावधानीपूर्वक आग न बुझाने पर आग जंगलों तक पहुंच जाती है। भेड़पालक भी नए घास के लिए घासनियों में आग लगाते हैं। उन्होंने बताया कि वन विभाग शरारती तत्वों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्णय ले चुका है। जंगल के 100 मीटर के दायरे में आग लगाने के लिए वन मंडलाधिकारी या वन परिक्षेत्राधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक है। बिना अनुमति आग लगाने पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। निजी घासनी में भी आग लगाने के लिए वन विभाग की अनुमति लेना आवश्यक है। बिना अनुमति घासनी में आग लगाने पर भी पच्चीस सौ रुपये का जुर्माना है। उन्होंने कहा कि आग लगाना नॉन कंपाउंडेबल ऑफेंस हैं। दोषी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर करवाई जाएगी। अगर स्थानीय लोग आग बुझाने में वन विभाग की मदद नहीं करेंगे तो उनके टीडी अधिकार पांच साल के लिए सस्पेंड कर दिए जाएंगे।