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Rampur Bushahar News: निचले क्षेत्रों में सेब की पैदावार कम होने की संभावना, बागवान चिंतित
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कम ऊंचाई वाले बगीचों में फूल कम और पत्ते ज्यादा होने से उत्पादन पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक समय से पहले पतझड़ और कम बर्फबारी भी हो सकती है इसकी वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। निचले क्षेत्रों के सेब बगीचों में सेब की पैदावार इस साल कम रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि क्षेत्र के अधिकांश बगीचों में पत्ते अधिक और फूल बहुत कम निकल रहे हैं। इससे अच्छी पैदावार के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले बागवानों की लगातार चिंता बढ़नी शुरू हो गई है। सेब की अच्छी पैदावार का आकलन फूल गिरने के बाद ही हर साल लगता है। इसके बाद भी बागवानों को फल तुड़ान तक अंधड़, ओलावृष्टि जैसी कई परिस्थितियों के दौर से गुजरना होता है। पिछले साल सेब की कम पैदावार के बाद इस साल अच्छी फसल की उम्मीद को लेकर बागवान दिन-रात बगीचों में मेहनत करने में जुटे हैं लेकिन अब निचले और मध्यम ऊंचाई वाले सेब के बगीचों में फूल निकलने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्हें निराशा हाथ लगी है। अधिकांश बगीचाें में फूल नाममात्र के ही निकले हैं। बागवान विरेंद्र शर्मा और राजेश्वर ठाकुर सहित अन्य लोगों ने बताया कि छह हजार फुट की ऊंचाई तक के अधिकांश बगीचों में इस साल फूल बहुत कम निकले हैं। अब उनमें से कितने फूल कामयाब रहेंगे, उसका पता इस महीने के आखिर तक की पता चल सकेगा। उन्होंने कहा कि जिन बगीचों में पिछले साल पैदावार हुई इस साल वहां फूल बहुत कम है। बागवानी विशेषज्ञ नरेंद्र कायथ ने बताया कि बगीचों में वहां पर इस साल बहुत कम फूल देखने को मिल रहे जहां पर पिछले साल सेब की पत्तियां समय से पहले गिर गईं थी। इसलिए पौधों को सही पोषक तत्व पत्तझड़ तक नहीं मिल सके। उन्होंने कहा इस साल सर्दियों में हिमपात बहुत कम हुआ है। निचले क्षेत्रों में सेब की पौधों की चिलिंग समय की जरूरत पूरी नहीं हो सकी। कई बागवानों ने सेब के पौधों में पौध वृद्धि नियामक तत्वों का भारी छिड़काव किया है। इससे भी सेब की पैदावार पर एक साल असर रहता है। उन्होंने कहा अभी तक की जांच में कम फूलों को निकलने के कई कारण सामने आ रहे हैं।
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विशेषज्ञों के मुताबिक समय से पहले पतझड़ और कम बर्फबारी भी हो सकती है इसकी वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। निचले क्षेत्रों के सेब बगीचों में सेब की पैदावार इस साल कम रहने की उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि क्षेत्र के अधिकांश बगीचों में पत्ते अधिक और फूल बहुत कम निकल रहे हैं। इससे अच्छी पैदावार के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले बागवानों की लगातार चिंता बढ़नी शुरू हो गई है। सेब की अच्छी पैदावार का आकलन फूल गिरने के बाद ही हर साल लगता है। इसके बाद भी बागवानों को फल तुड़ान तक अंधड़, ओलावृष्टि जैसी कई परिस्थितियों के दौर से गुजरना होता है। पिछले साल सेब की कम पैदावार के बाद इस साल अच्छी फसल की उम्मीद को लेकर बागवान दिन-रात बगीचों में मेहनत करने में जुटे हैं लेकिन अब निचले और मध्यम ऊंचाई वाले सेब के बगीचों में फूल निकलने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद उन्हें निराशा हाथ लगी है। अधिकांश बगीचाें में फूल नाममात्र के ही निकले हैं। बागवान विरेंद्र शर्मा और राजेश्वर ठाकुर सहित अन्य लोगों ने बताया कि छह हजार फुट की ऊंचाई तक के अधिकांश बगीचों में इस साल फूल बहुत कम निकले हैं। अब उनमें से कितने फूल कामयाब रहेंगे, उसका पता इस महीने के आखिर तक की पता चल सकेगा। उन्होंने कहा कि जिन बगीचों में पिछले साल पैदावार हुई इस साल वहां फूल बहुत कम है। बागवानी विशेषज्ञ नरेंद्र कायथ ने बताया कि बगीचों में वहां पर इस साल बहुत कम फूल देखने को मिल रहे जहां पर पिछले साल सेब की पत्तियां समय से पहले गिर गईं थी। इसलिए पौधों को सही पोषक तत्व पत्तझड़ तक नहीं मिल सके। उन्होंने कहा इस साल सर्दियों में हिमपात बहुत कम हुआ है। निचले क्षेत्रों में सेब की पौधों की चिलिंग समय की जरूरत पूरी नहीं हो सकी। कई बागवानों ने सेब के पौधों में पौध वृद्धि नियामक तत्वों का भारी छिड़काव किया है। इससे भी सेब की पैदावार पर एक साल असर रहता है। उन्होंने कहा अभी तक की जांच में कम फूलों को निकलने के कई कारण सामने आ रहे हैं।