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Rampur Bushahar News: चायल की शाऊणे जाच मेले में देवता शाना ऋषि और देवी चैलासनी का भव्य मिलन
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आनी (कुल्लू)। निरमंड के चायल में सावन माह में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय शाऊणे जाच मेला धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसमें बागा सराहन के गढ़पति देवता शाना ऋषि सावन महीने की संक्रांति की शाम को ब्रामगढ़ के सगोफा में पहुंचते हैं और यहां मेला सजता है। इस दौरान मेले में शाना ऋषि और देवी चैलासनी का भव्य मिलन हुआ, जिसे देख लोग भावविभोर हो गए।
यहां दूसरे दिन देवता कांडू नामक स्थान से होकर ठारला में पहुंचेंगे। यहां स्थानीय महिलाओं द्वारा कुल्लवी वेशभूषा में पट्टू, रेजटा पहनकर देवता को पुष्पमाला, सूखे मेवे और धूप और वस्त्र अर्पित करेंगे। इसके बाद देवता टिकरू के लिए रवाना होंगे। यहां मेले में अतिथि के रूप में देवी चैलासनी शिरकत करेंगी।
देवता अपने माली (गूर) के माध्यम से क्षेत्र की सुख समृद्धि की भविष्यवाणी करते हैं। इस बार देवता ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि श्रीखंड महादेव यात्रा में देवी चैलासनी का वर्चस्व खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जिससे देवता काफी रोष में है। देवता शाना ऋषि ने साफ शब्दों में कहा है कि श्रीखंड महादेव यात्रा का विधान देवी चैलासनी के मंदिर से ही आरंभ होता है।
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प्राचीन काल से आ रही इस परंपरा को आज तोड़ा जा रहा है। यहां देवी पार्वती से श्रीखंड यात्रा के लिए इजाजत मांगी जाती थी और जाओं से ही पुजारी लेकर यात्रा के लिए निकलते थे। यात्रा में हर बार हो रही त्रासदी का मुख्य कारण देवी चैलासनी का वर्चस्व खत्म करने की कोशिश एक मुख्य कारण बताया है। वहीं जाओं निवासी देवता के पुरोहित मोहन शर्मा ने भी देवता की भविष्यवाणी को स्वीकार करते हुए हामी भरी कि श्रीखंड यात्रा में देवी चैलासनी के प्रांगण से ही यात्रा शुरू होने का विधान है।
यहां माता से आशीर्वाद लेकर श्रद्धालु यात्रा के लिए रवाना होते थे, मगर आज के दौर में बस स्टैंड से यात्री मंदिर परिसर में न आकर अपनी यात्रा के लिए निकल जाते हैं। इससे देवी काफी रोष में है। उन्होंने कहा कि शाऊणे जाच देवता शाना ऋषि का जेष्ठ पर्व माना जाता है, जहां ढाई फेरे लगाकर एक भव्य नाटी लगती है।
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यहां दूसरे दिन देवता कांडू नामक स्थान से होकर ठारला में पहुंचेंगे। यहां स्थानीय महिलाओं द्वारा कुल्लवी वेशभूषा में पट्टू, रेजटा पहनकर देवता को पुष्पमाला, सूखे मेवे और धूप और वस्त्र अर्पित करेंगे। इसके बाद देवता टिकरू के लिए रवाना होंगे। यहां मेले में अतिथि के रूप में देवी चैलासनी शिरकत करेंगी।
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देवता अपने माली (गूर) के माध्यम से क्षेत्र की सुख समृद्धि की भविष्यवाणी करते हैं। इस बार देवता ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि श्रीखंड महादेव यात्रा में देवी चैलासनी का वर्चस्व खत्म करने की कोशिश की जा रही है, जिससे देवता काफी रोष में है। देवता शाना ऋषि ने साफ शब्दों में कहा है कि श्रीखंड महादेव यात्रा का विधान देवी चैलासनी के मंदिर से ही आरंभ होता है।
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प्राचीन काल से आ रही इस परंपरा को आज तोड़ा जा रहा है। यहां देवी पार्वती से श्रीखंड यात्रा के लिए इजाजत मांगी जाती थी और जाओं से ही पुजारी लेकर यात्रा के लिए निकलते थे। यात्रा में हर बार हो रही त्रासदी का मुख्य कारण देवी चैलासनी का वर्चस्व खत्म करने की कोशिश एक मुख्य कारण बताया है। वहीं जाओं निवासी देवता के पुरोहित मोहन शर्मा ने भी देवता की भविष्यवाणी को स्वीकार करते हुए हामी भरी कि श्रीखंड यात्रा में देवी चैलासनी के प्रांगण से ही यात्रा शुरू होने का विधान है।
यहां माता से आशीर्वाद लेकर श्रद्धालु यात्रा के लिए रवाना होते थे, मगर आज के दौर में बस स्टैंड से यात्री मंदिर परिसर में न आकर अपनी यात्रा के लिए निकल जाते हैं। इससे देवी काफी रोष में है। उन्होंने कहा कि शाऊणे जाच देवता शाना ऋषि का जेष्ठ पर्व माना जाता है, जहां ढाई फेरे लगाकर एक भव्य नाटी लगती है।