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Rampur Bushahar News: नाथपा-झाकड़ी परियोजना से खाली बची भूमि पर गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को बसाने पर प्रदर्शन

Thu, 06 Nov 2025 11:49 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 11:49 PM IST
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Protests against the Nathpa-Jhakri project, demonstrations in Rampur
​विद्युत परियोजना की खाली बची भूमि पर बाहरी लोगो को बसाने पर प्रदर्शन करते विस्थापित। संवाद
एसडीएम कार्यालय के बाहर की नारेबाजी, राज्यपाल, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
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अर्जित की गई जमीन पर सबसे पहला हक विस्थापितों का : मंच
एसडीएम की अध्यक्षता में 22 को होगी बैठक, परियोजना के अधिकारी भी रहेंगे मौजूद

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। देश की सबसे बड़ी भूमिगत नाथपा-झाकड़ी जल विद्युत परियोजना के निर्माण को अर्जित भूमि गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को देने के विरोध में कोटला के ग्रामीण बिफर गए हैं। कोटला विस्थापित मंच के बैनर तले ग्रामीणों ने सरकार के इस निर्णय का विरोध जताया है। वीरवार को विस्थापितों ने रामपुर में एसडीएम कार्यालय का घेराव किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मंच ने एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह के माध्यम से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है, जिसमें सरकार के इस फैसले को वापस लेने और विस्थापितों की जमीन उन्हें लौटाने की मांग उठाई है। वहीं, एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को इस संबंध में 22 नवंबर को बैठक करने का आश्वासन दिया है। इस बैठक में परियोजना के अधिकारियों को भी बुलाया जाएगा।

विस्थापित लोगों ने एसडीएम को बताया कि वर्ष 1990 में रामपुर के कोटला गांव में नाथपा-झाकड़ी जलविद्युत निगम ने करीब 300 बीघा भूमि स्थानीय लोगों से अधिग्रहण की थी, लेकिन निगम ने करीब 100 बीघा भूमि ही उपयोग में ली। बाकी भूमि वर्ष 2015-16 तक खाली पड़ी रही। वर्ष 2015-16 में प्रदेश सरकार ने करीब 95.96 बीघा भूमि महात्मा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज के नाम हस्तांतरित कर दी। कुछ भूमि राजस्व विभाग के नाम कर दी। इस जमीन पर नियमानुसार यहां के स्थानीय लोगों का अधिकार है। उपयोग में न लाई गई जमीन को स्थानीय विस्थापित परिवारों को लौटाना चाहिए, क्योंकि इस जमीन पर पहला हक उनका है। सरकार ने इसके विपरीत चतुराई से लोगों की यह भूमि राजस्व विभाग के नाम कर दी। अब यह भूमि गुज्जर समुदाय और बाहरी लोगों को दी जा रही है। परियोजना निर्माण के लिए पूरा गांव विस्थापित किया गया था, लेकिन 8-10 लोगों को ही नौकरियां दी गईं। ग्रामीणों ने कहा कि गुज्जर समुदाय को यहां बसाने से स्थानीय लोगों के सारे हक खत्म हो जाएंगे। विस्थापित परिवारों में सरकार के इस निर्णय को लेकर रोष है। इस मौके पर ज्यूरी पंचायत प्रधान तंपा देवी, उप प्रधान अरुण शर्मा, विश्व हिंदू परिषद जिला अध्यक्ष सुरेश मेहता, जिला महामंत्री विष्णु शर्मा, नीलम लश्टी, धर्मसेन मेहता, कृष्ण लाल वर्मा, राज कुमार लश्टी, केवल राम, प्रेम सिंह, मंगल दास आदि मौजूद रहे।

विद्युत परियोजना की खाली बची भूमि पर बाहरी लोगो को बसाने पर प्रदर्शन करते विस्थापित। संवाद

विद्युत परियोजना की खाली बची भूमि पर बाहरी लोगो को बसाने पर प्रदर्शन करते विस्थापित। संवाद

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