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किसानों को दिए प्राकृतिक खेती के दिए टिप्स
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रामपुर बुशहर। रामपुर खंड की रचोली पंचायत के जबाहा में किसान-बागवानों को शुक्रवार को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। किसानों से विशेषज्ञों ने सुभाष पालेकर खेती के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने पर बल दिया। शिविर में विशेषज्ञों ने गोबर और गोमूत्र से खाद तैयार करने की विधि भी किसान-बागवानों को मौके पर ही तैयार कर सिखाई गई। दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के शुभारंभ पर करीब 36 किसानों ने भाग लिया। कृषि विभाग के आतमा प्रोजेक्ट के तहत शिविर आयोजित किया गया। इसमें प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित और प्रशिक्षित किया गया।
सहायक तकनीकी प्रबंधक अनु नेगी और मास्टर ट्रेनर ज्योति लाल साहनी ने कहा कि जहां एक ओर केमिकल के उपयोग से फसलों और फलों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, वहीं प्राकृतिक खेती के उपयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। शिविर के दौरान उन्होंने किसानों को रासायनिकों का उपयोग छोड़ गोबर और गोमूत्र से बनी खाद का इस्तेमाल करने पर बल दिया।
मौके पर किसान और बागवानों को गोबर गोमूत्र से खाद तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया। इसके अलावा उन्होंने सुभाष पालेकर खेती के तहत किसान-बागवानों को विभिन्न चीजों पर मिलने वाले अनुदान के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने सभी किसान-बागवानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाएं और फसलों की पैदावार को भी बढ़ाएं।
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सहायक तकनीकी प्रबंधक अनु नेगी और मास्टर ट्रेनर ज्योति लाल साहनी ने कहा कि जहां एक ओर केमिकल के उपयोग से फसलों और फलों पर बुरा प्रभाव पड़ता है, वहीं प्राकृतिक खेती के उपयोग से जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है। शिविर के दौरान उन्होंने किसानों को रासायनिकों का उपयोग छोड़ गोबर और गोमूत्र से बनी खाद का इस्तेमाल करने पर बल दिया।
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मौके पर किसान और बागवानों को गोबर गोमूत्र से खाद तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया। इसके अलावा उन्होंने सुभाष पालेकर खेती के तहत किसान-बागवानों को विभिन्न चीजों पर मिलने वाले अनुदान के बारे में भी जागरूक किया। उन्होंने सभी किसान-बागवानों से आग्रह किया कि वे प्राकृतिक खेती को अपनाकर जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाएं और फसलों की पैदावार को भी बढ़ाएं।
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