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निगुलसरी के समीप फिर दरकी चट्टानें, चौरा-रूपी सड़क बंद
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निगुलसेरी के पास भूस्खलन होने से बंद छोटा कंबा रूपी संपर्क मार्ग
- फोटो : RAMPUR-HP
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भावानगर(किन्नौर)। जनजातीय जिले के निगुलसरी के समीप शनिवार को फिर से पहाड़ी से चट्टानें दरकने का सिलसिला शुरू हो गया है। इससे चौरा-रूपी और बड़ा कंबा का संपर्क कट गया है। बीते अगस्त माह में भी निगुलसरी में पहाड़ी दरकने से इसकी चपेट में आए 28 लोगों की मौत हो गई थी। जिले में हुई बारिश के कारण फिर से पहाड़ डराने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार किन्नौर के निगुलसरी के समीप शनिवार सुबह करीब 10 बजे पहाड़ी से चट्टानें दरकना शुरू हो गई। इससे चट्टानें और पत्थर सड़क पर आ गिरे। इससे चौरा रूपी सड़क बाधित हो गई है। गनीमत रही कि भूस्खलन के समय सड़क पर कोई वाहन नहीं आया, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। गौर हो कि निगुलसरी में बीते अगस्त माह में हुए भूस्खलन की चपेट में आने से 28 लोगों ने अपनी जान चली गई थी। जिले के सांगला छितकुल मार्ग पर भी भूस्खलन के कारण आधा दर्जन करीब पर्यटकों की मौत हो गई थी।
बारिश औरर बर्फबारी के बीच पहाड़ियों के दरकने का खतरा पहले की अपेक्षा काफी बढ़ गया है। जिले के लोगों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से भू वैज्ञानिकों को बुलाकर स्थिति का जायजा लेकर रोकथाम करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि जिले में अत्यधिक विद्युत परियोजनाएं बनने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। परियोजनाओं ने किन्नौर के पहाड़ों को खोखला कर दिया है। हल्की बारिश होते ही ढीले पहाड़ गिरना शुरू हो जाते हैं, जिसे देखते हुए सरकार और प्रशासन को व्यापक बंदोबस्त करने की आवश्यकता है।
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एसडीएम भावानगर मनमोहन सिंह ने कहा कि शनिवार को चौरा-रूपी-बड़ा कंबा सड़क पर भूस्खलन के कारण मार्ग बाधित हो गया है। लोक निर्माण विभाग को मार्ग बहाली के निर्देश दिए गए हैं।
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जानकारी के अनुसार किन्नौर के निगुलसरी के समीप शनिवार सुबह करीब 10 बजे पहाड़ी से चट्टानें दरकना शुरू हो गई। इससे चट्टानें और पत्थर सड़क पर आ गिरे। इससे चौरा रूपी सड़क बाधित हो गई है। गनीमत रही कि भूस्खलन के समय सड़क पर कोई वाहन नहीं आया, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। गौर हो कि निगुलसरी में बीते अगस्त माह में हुए भूस्खलन की चपेट में आने से 28 लोगों ने अपनी जान चली गई थी। जिले के सांगला छितकुल मार्ग पर भी भूस्खलन के कारण आधा दर्जन करीब पर्यटकों की मौत हो गई थी।
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बारिश औरर बर्फबारी के बीच पहाड़ियों के दरकने का खतरा पहले की अपेक्षा काफी बढ़ गया है। जिले के लोगों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से भू वैज्ञानिकों को बुलाकर स्थिति का जायजा लेकर रोकथाम करने की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि जिले में अत्यधिक विद्युत परियोजनाएं बनने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है। परियोजनाओं ने किन्नौर के पहाड़ों को खोखला कर दिया है। हल्की बारिश होते ही ढीले पहाड़ गिरना शुरू हो जाते हैं, जिसे देखते हुए सरकार और प्रशासन को व्यापक बंदोबस्त करने की आवश्यकता है।
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एसडीएम भावानगर मनमोहन सिंह ने कहा कि शनिवार को चौरा-रूपी-बड़ा कंबा सड़क पर भूस्खलन के कारण मार्ग बाधित हो गया है। लोक निर्माण विभाग को मार्ग बहाली के निर्देश दिए गए हैं।