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Rampur Bushahar News: कोदे का चिलटा मधुमेह में होता है लाभदायक
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किन्नौर जिले के निचले क्षेत्रों में उगाया जाता है कोदा
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। आज के युग में सभी लोगों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले के समय में किन्नौर जिला में ही उगाए जाने वाले अनाज को लोग अपने भोजन में उपयोग किया करते थे, जिससे कोई बीमारी होने का खतरा नहीं हुआ करता था। आज के युग में सभी पुराने अनाजों को भूल कर बाजारों में मिलने वाले अनाज का इस्तेमाल अपने भोजन में कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ज्यादातर लोगों को मधुमेह की समस्या रह रही है। मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। हृदय और रक्त संचार संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। जिले के निचले क्षेत्रों में उगाए जाने वाला कोदा मधुमेह के नियंत्रण में फायदेमंद होता है। किन्नौर जिला के पोवारी गिरी ड्राई फ्रूट्स के मालिक माल नर नेगी ने बताया कि अप्रैल और मई के महीने में कोदा को लगाया जाता है और सितंबर के महीने में निकाला जाता है। कोदा को निकालने के बाद सुखाया जाता है। इसके बाद इसे डंडे की मदद से निकाल दिया जाता है। इसके बाद हवे में लगाकर उसमें रह गए तिनकों को निकाला जाता है। उसे धो कर पीसा जाता है। कोदा के चिलटे का उपयोग मधुमेह के बीमारी के लिए बहुत लाभदायक होता है। पिसा हुआ कोदे का आटा डेढ़ सौ रुपये तक की कीमत है और बिना पिसे हुए कोदे का मूल्य सौ रुपये से एक सौ बीस रुपये तक है। पहले के समय में लोग खुद ही खेती करते थे, लेकिन आज के युग में इसकी खेती कम हो गई है। उन्होंने बताया कि कोदा किन्नौर जिला के निचले क्षेत्रों में उगाया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। आज के युग में सभी लोगों को विभिन्न प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले के समय में किन्नौर जिला में ही उगाए जाने वाले अनाज को लोग अपने भोजन में उपयोग किया करते थे, जिससे कोई बीमारी होने का खतरा नहीं हुआ करता था। आज के युग में सभी पुराने अनाजों को भूल कर बाजारों में मिलने वाले अनाज का इस्तेमाल अपने भोजन में कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ज्यादातर लोगों को मधुमेह की समस्या रह रही है। मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त में शर्करा की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है। इससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। हृदय और रक्त संचार संबंधी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। जिले के निचले क्षेत्रों में उगाए जाने वाला कोदा मधुमेह के नियंत्रण में फायदेमंद होता है। किन्नौर जिला के पोवारी गिरी ड्राई फ्रूट्स के मालिक माल नर नेगी ने बताया कि अप्रैल और मई के महीने में कोदा को लगाया जाता है और सितंबर के महीने में निकाला जाता है। कोदा को निकालने के बाद सुखाया जाता है। इसके बाद इसे डंडे की मदद से निकाल दिया जाता है। इसके बाद हवे में लगाकर उसमें रह गए तिनकों को निकाला जाता है। उसे धो कर पीसा जाता है। कोदा के चिलटे का उपयोग मधुमेह के बीमारी के लिए बहुत लाभदायक होता है। पिसा हुआ कोदे का आटा डेढ़ सौ रुपये तक की कीमत है और बिना पिसे हुए कोदे का मूल्य सौ रुपये से एक सौ बीस रुपये तक है। पहले के समय में लोग खुद ही खेती करते थे, लेकिन आज के युग में इसकी खेती कम हो गई है। उन्होंने बताया कि कोदा किन्नौर जिला के निचले क्षेत्रों में उगाया जाता है।