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केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रामपुर में प्रदर्शन
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हिमाचल किसान सभा विभिन्न मुद्दों को लेकर रामपुर में विरोध प्रदर्शन करते हुए
- फोटो : RAMPUR-HP
रामपुर बुशहर। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रामपुर में सोमवार को किसान सभा, सीटू और एसएफआई ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महंगाई, मजदूर, किसान, छात्रों और जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 25 जुलाई से 8 अगस्त तक प्रचार अभियान के बाद सोमवार को भारत छोड़ो दिवस पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी, रंजीत ठाकुर, हिमाचल किसान सभा रामपुर अध्यक्ष हितेश हष्टा, महासचिव प्रेम चौहान, ओमप्रकाश भारती और दिनेश मेहता सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि जिस तरीके से देश को आजाद करने के लिए 9 अगस्त, 1942 को आज के ही दिन भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। इसी तरह से आज मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, आम जनता विरोधी और देश विरोधी नीतियों से देश बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी गदी छोड़ो की मुहिम शुरू की गई है। आज देश कोरोना माहमारी और आर्थिक मंदी की चपेट में है। इसके कारण देश में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है।
देश के किसानों की जमीन, कृषि बाजार और मंडियों को पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए देश में अलोकतांत्रिक तरीके से तीनों काले कानूनों को लागू किया जा रहा है। कोरोनाकाल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल और कई प्रदेश की सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के लिए आपदाकाल को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तबदील कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट के समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स, ठेका, दिहाड़ीदार और मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। केंद्र और राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। कोरोनाकाल में लाखों लोगों की नौकरियां छिन गई हैं और लोग बेरोजगार हो गए हैं।
उन्होंने सभी का इलाज मुफ्त में करने, महंगाई पर तुरंत रोक लगाने, महामारी चलने तक 10 किलो प्रति व्यक्ति मुफ्त राशन देने, अस्पतालों में तुरंत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की व्यवस्था करने, मनरेगा मजदूरों को 700 रुपये दिहाड़ी, 200 दिन का रोजगार देने, किसान-मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं और बिजली बिल 2020 को निरस्त करने, राजद्रोह कानून को खत्म करने सहित अन्य मांगों को पूरी करने के लिए प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेताया गया।
इस मौके पर कैलाश, आशा, दीपिका, मंजू, हेमराज, बीर सिंह, कृष्ण, बालाबीर, गुडी, प्रेमदासी, राजमणि, अनिल, भजन, राजेश, हेमराज भंडारी, ओमप्रकाश मेहता, चंद्र शेखर, जवाहर, प्रमोद, हरीश, कर्म चंद, अजय भैक, संतोष, बालक राम और निशा सहित कई अन्य मौजूद रहे।
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सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सीटू राज्य उपाध्यक्ष बिहारी सेवगी, रंजीत ठाकुर, हिमाचल किसान सभा रामपुर अध्यक्ष हितेश हष्टा, महासचिव प्रेम चौहान, ओमप्रकाश भारती और दिनेश मेहता सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि जिस तरीके से देश को आजाद करने के लिए 9 अगस्त, 1942 को आज के ही दिन भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। इसी तरह से आज मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, आम जनता विरोधी और देश विरोधी नीतियों से देश बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी गदी छोड़ो की मुहिम शुरू की गई है। आज देश कोरोना माहमारी और आर्थिक मंदी की चपेट में है। इसके कारण देश में बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है।
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देश के किसानों की जमीन, कृषि बाजार और मंडियों को पूंजीपतियों के हवाले करने के लिए देश में अलोकतांत्रिक तरीके से तीनों काले कानूनों को लागू किया जा रहा है। कोरोनाकाल का फायदा उठाते हुए मोदी सरकार के नेतृत्व में हिमाचल और कई प्रदेश की सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के लिए आपदाकाल को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तबदील कर दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट के समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स, ठेका, दिहाड़ीदार और मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। केंद्र और राज्य के मजदूरों को एक समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। कोरोनाकाल में लाखों लोगों की नौकरियां छिन गई हैं और लोग बेरोजगार हो गए हैं।
उन्होंने सभी का इलाज मुफ्त में करने, महंगाई पर तुरंत रोक लगाने, महामारी चलने तक 10 किलो प्रति व्यक्ति मुफ्त राशन देने, अस्पतालों में तुरंत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की व्यवस्था करने, मनरेगा मजदूरों को 700 रुपये दिहाड़ी, 200 दिन का रोजगार देने, किसान-मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं और बिजली बिल 2020 को निरस्त करने, राजद्रोह कानून को खत्म करने सहित अन्य मांगों को पूरी करने के लिए प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को चेताया गया।
इस मौके पर कैलाश, आशा, दीपिका, मंजू, हेमराज, बीर सिंह, कृष्ण, बालाबीर, गुडी, प्रेमदासी, राजमणि, अनिल, भजन, राजेश, हेमराज भंडारी, ओमप्रकाश मेहता, चंद्र शेखर, जवाहर, प्रमोद, हरीश, कर्म चंद, अजय भैक, संतोष, बालक राम और निशा सहित कई अन्य मौजूद रहे।