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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Gaushala Samiti Kinnaur, Unclaimed Animals, Kinnaur, Reckong Peo

Rampur Bushahar News: गोशाला से समिति का किनारा, लावारिस पशुओं को नहीं सहारा

Thu, 23 Jan 2025 11:53 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2025 11:53 PM IST
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तीन माह सेƑचारे और देखरेख के अभाव में 15 पशुओं की मौत
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वांगतू-काफनू सड़क पर स्थित रारंग पानुंग गोसदन झेल रहा अव्यवस्था की मार

गोसदन के भीतर, आसपास बिखरे मृत पशुओं के शव, नोंच रहे कुत्ते

सरकार और पशुपालन विभाग से नहीं मिल रही मदद, जिला प्रशासन भी मूक
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला(किन्नौर)। जनजातीय किन्नौर जिले में चारा, पानी और देखरेख के अभाव में तीन महीने में करीब 15 पशुओं की मौत हो चुकी है। जिले के रारंग-पानुंग स्थित गोसदन के भीतर और आसपास मृत पशुओं के शरीर पड़े हैं, जिन्हें कुत्ते नोंच रहे हैं। प्रदेश सरकार, पशु पालन विभाग से आर्थिक मदद के अभाव में पशुओं के मरने का सिलसिला जारी है, जबकि मामले को लेकर जिला प्रशासन भी मूकदर्शक बना हुआ है। किन्नौर जिले की वांगतू-काफनू सड़क पर रारंग पानुंग स्थित गोशाला में जिलेभर से पशु लाए जाते हैं। यहां श्री महेश्वर गोशाला प्रबंधन समिति की ओर से पशुओं की देखभाल और अन्य कार्य किए जाते हैं। वर्ष 2023 नवंबर से लेकर अप्रैल 2024 तक संचालन के लिए सरकार और पशुपालन विभाग से बजट मुहैया नहीं करवाया गया। नियमों के मुताबिक 30 से अधिक पशुओं की संख्या वाली गोशाला में संचालन के लिए प्रति पशु सात सौ रुपये प्रतिमाह पशु पालन विभाग मुहैया करवाता है, जबकि इन उक्त अवधि की राशि सरकार ने जारी नहीं की। सरकार ने संचालन समिति पर जांच बिठाई और इस जांच कुछ भी गड़बड़ नहीं पाई गई। इसके बाद गोशाला में रखे गए करीब 120 पशुओं को भावावैली के मूलिंग कंडे में छोड़ा गया। तीन माह पूर्व ये पशु रारंग पानुंग गोशाला पहुंचे, तो यहां संचालन समिति ने कार्य छोड़ दिया। अब देखरेख और चारे पानी के अभाव में पशुओं की मौत हो रही है। अब सवाल उठता है कि जब समिति सही रूप से कार्य कर रही थी, तो उस पर जांच क्यों बिठाई गई। अब समिति के कार्य छोड़ने पर क्या व्यवस्था बनेगी। तीन माह में 15 पशु अपनी जान गंवा चुके हैं। वर्तमान में गोशाला और आसपास के इलाके में करीब 40 से 50 पशु बेसहारा घूम रहे हैं।

समिति के साथ हो रहा पक्षपात
श्री महेश्वर गोशाला प्रबंधन समिति के अध्यक्ष देव सिंह नेगी ने बताया कि समिति के साथ सरकार पक्षपात कर रही है। पूर्व में भी राजनीतिक दबाव के चलते समिति पर जांच बिठाई गई थी। नवंबर 2023 से अप्रैल 2024 तक गोशाला संचालन के लिए बजट नहीं दिया गया। हालांकि, जांच में सब सही पाया गया है। इसके बावजूद सरकार, पशुपालन विभाग और जिला प्रशासन का गोशाला संचालन के लिए उचित सहयोग नहीं मिल रहा।
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गोशाला में जो पशु मर रहे हैं, उसकी जांच के लिए पशुपालन विभाग को मौके पर जाने के निर्देश दिए हैं। गोशाला संचालन समिति को व्यवस्था बनाए रखने को कहा जाएगा। - डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त किन्नौर
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