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Rampur Bushahar News: एचपीएमसी से खाद्य सामग्री न मिलने पर बागवान परेशान
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लोक मित्र केंद्र और तहसील के चक्कर काटने पर भी नहीं मिल रहा सामान
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पादन विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के माध्यम से मिलने वाली खाद्य सामग्री समय पर उपलब्ध न होने से बागवानों में भारी रोष है। बागवानों का कहना है कि वे लोकमित्र केंद्र और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन अंत में एचपीएमसी कार्यालय पहुंचने पर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। बागवान संजीव सांवत, मोहिंद्र पनैईक, राजिंद्र ठाकुर, रोशन लाल, रमेश कुमार, अजय रांटा ने बताया कि एचपीएमसी के नियमों के अनुसार यदि भूमि पर बागवान अकेला मालिक है, तो बिना पटवारी की स्टांप के भी खाद्य सामग्री के लिए आवेदन मान्य है, जबकि एक से अधिक शेयर होल्डर होने की स्थिति में पटवारी से हिस्से का पर्चा बनवाकर एचपीएमसी में जमा करना अनिवार्य है। बागवानों का आरोप है कि वे यह सारी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसके बावजूद एचपीएमसी के भंडार खाली पड़े हैं और कोई भी खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। इस समय सेब बागवानी के लिए स्प्रे ऑयल की अधिक आवश्यकता है। बागवानों का कहना है कि मंडी मध्यस्थ योजना के तहत उन्होंने अपनी उपज एचपीएमसी को दी थी और उसी के आधार पर वे स्प्रे ऑयल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री लेना चाहते हैं, लेकिन सामग्री न मिलने से वे मायूस हैं। समय पर स्प्रे न होने से फसल पर विपरीत असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। बागवानों ने प्रदेश सरकार और एचपीएमसी प्रबंधन से मांग की है कि जल्द भंडारों में खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जाए, ताकि बागवान समय रहते अपनी फसलों की देखभाल कर सकें। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो बागवानी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पादन विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के माध्यम से मिलने वाली खाद्य सामग्री समय पर उपलब्ध न होने से बागवानों में भारी रोष है। बागवानों का कहना है कि वे लोकमित्र केंद्र और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन अंत में एचपीएमसी कार्यालय पहुंचने पर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। बागवान संजीव सांवत, मोहिंद्र पनैईक, राजिंद्र ठाकुर, रोशन लाल, रमेश कुमार, अजय रांटा ने बताया कि एचपीएमसी के नियमों के अनुसार यदि भूमि पर बागवान अकेला मालिक है, तो बिना पटवारी की स्टांप के भी खाद्य सामग्री के लिए आवेदन मान्य है, जबकि एक से अधिक शेयर होल्डर होने की स्थिति में पटवारी से हिस्से का पर्चा बनवाकर एचपीएमसी में जमा करना अनिवार्य है। बागवानों का आरोप है कि वे यह सारी प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इसके बावजूद एचपीएमसी के भंडार खाली पड़े हैं और कोई भी खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। इस समय सेब बागवानी के लिए स्प्रे ऑयल की अधिक आवश्यकता है। बागवानों का कहना है कि मंडी मध्यस्थ योजना के तहत उन्होंने अपनी उपज एचपीएमसी को दी थी और उसी के आधार पर वे स्प्रे ऑयल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री लेना चाहते हैं, लेकिन सामग्री न मिलने से वे मायूस हैं। समय पर स्प्रे न होने से फसल पर विपरीत असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। बागवानों ने प्रदेश सरकार और एचपीएमसी प्रबंधन से मांग की है कि जल्द भंडारों में खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाई जाए, ताकि बागवान समय रहते अपनी फसलों की देखभाल कर सकें। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो बागवानी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।