{"_id":"5f7f3a588ebc3edc1f663b93","slug":"festival-rampur-hp-news-sml34769093","type":"story","status":"publish","title_hn":"सराहन दशहरा में नहीं निकलेगी रघुनाथ की रथयात्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सराहन दशहरा में नहीं निकलेगी रघुनाथ की रथयात्रा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। जिला स्तरीय सराहन दशहरा उत्सव में कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष रघुनाथ की रथयात्रा नहीं निकलेगी। रथ के बजाय रघुनाथ की रथयात्रा को पालकी से मचखंडी तक ले जाया जाएगा। पालकी के साथ पुजारी का दल और तीन देवताओं की छड़ी साथ में रहेगी।
इस वर्ष सराहन दशहरा मेले में दशकों से रथ यात्रा में शामिल होने वाले दर्जनों देवी-देवताओं, देवलुओं और ढोल नगाड़ों सहित हजारों लोगों की मौजूदगी नहीं रहेगी। दशहरा में इस वर्ष न तो जय श्रीराम के नारों की गूंज सुनने को मिलेगी और न ही सैकड़ों लोगों को रघुनाथ के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलेगा। कोरोना महामारी के कारण यह सारी परंपरा भी बदलने वाली है। इस वर्ष दशहरा उत्सव पर रघुनाथ को पालकी में बैठा कर चंद लोग और तीन देवता रघुनाथ मंदिर से मचखंडी तक ले जाएंगे। इनमें बोंडा नाग, दत्त महाराज बसाहरा और धराली के निनसु देवता की छड़ी के साथ करीब पांच-पांच लोग ही शामिल होंगे। रघुनाथ तीन दिन तक मचखंडी में रहने के बाद पालकी से ही मंदिर तक पहुुंचाए जाएंगे। इस वर्ष लोगों को दशहरा मेला देखने से वंचित रहना पड़ेगा। न तो बाजार सजेगा और न ही नाटियों का दौर चलेगा।
वहीं, मंदिर अधिकारी बीआर नेगी ने कहा कि देवताओं के साथ आए लोगों और आयोजकों को बाहर खाने की इजाजत नहीं होगी। इन सभी को भोजन बनाने और खाने की व्यवस्था मंदिर परिसर के अंदर ही रहेगी। एसडीएम सुरेंद्र मोहन ने बताया कि इस बार सराहन दशहरा मेले को रघुनाथ की रथयात्रा नहीं निकलेगी। कोरोना के चलते रघुनाथ को पालकी से ही ले जाया और लाया जाएगा। दशहरा मेले की मात्र रस्में ही निभाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि न मेला लगेगा और न ही बाजार सजेगा। एसडीएम ने लोगों से अपील की है कि दशहरा मेला इस वर्ष नहीं होगा इसलिए बेवजह सराहन पहुंच कर भीड़ इकट्ठा न करें। भीड़ के कारण कोरोना फैलने का डर बना रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस वर्ष सराहन दशहरा मेले में दशकों से रथ यात्रा में शामिल होने वाले दर्जनों देवी-देवताओं, देवलुओं और ढोल नगाड़ों सहित हजारों लोगों की मौजूदगी नहीं रहेगी। दशहरा में इस वर्ष न तो जय श्रीराम के नारों की गूंज सुनने को मिलेगी और न ही सैकड़ों लोगों को रघुनाथ के रथ को खींचने का सौभाग्य मिलेगा। कोरोना महामारी के कारण यह सारी परंपरा भी बदलने वाली है। इस वर्ष दशहरा उत्सव पर रघुनाथ को पालकी में बैठा कर चंद लोग और तीन देवता रघुनाथ मंदिर से मचखंडी तक ले जाएंगे। इनमें बोंडा नाग, दत्त महाराज बसाहरा और धराली के निनसु देवता की छड़ी के साथ करीब पांच-पांच लोग ही शामिल होंगे। रघुनाथ तीन दिन तक मचखंडी में रहने के बाद पालकी से ही मंदिर तक पहुुंचाए जाएंगे। इस वर्ष लोगों को दशहरा मेला देखने से वंचित रहना पड़ेगा। न तो बाजार सजेगा और न ही नाटियों का दौर चलेगा।
विज्ञापन
वहीं, मंदिर अधिकारी बीआर नेगी ने कहा कि देवताओं के साथ आए लोगों और आयोजकों को बाहर खाने की इजाजत नहीं होगी। इन सभी को भोजन बनाने और खाने की व्यवस्था मंदिर परिसर के अंदर ही रहेगी। एसडीएम सुरेंद्र मोहन ने बताया कि इस बार सराहन दशहरा मेले को रघुनाथ की रथयात्रा नहीं निकलेगी। कोरोना के चलते रघुनाथ को पालकी से ही ले जाया और लाया जाएगा। दशहरा मेले की मात्र रस्में ही निभाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि न मेला लगेगा और न ही बाजार सजेगा। एसडीएम ने लोगों से अपील की है कि दशहरा मेला इस वर्ष नहीं होगा इसलिए बेवजह सराहन पहुंच कर भीड़ इकट्ठा न करें। भीड़ के कारण कोरोना फैलने का डर बना रहेगा।
विज्ञापन