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मांगों को लेकर सड़क पर उतरेंगे कामगार और कर्मचारी
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रामपुर बुशहर। 26 नवंबर को होने वाली राष्ट्रव्यापी हड़ताल को लेकर सतलुज जल विद्युत कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन की बैठक झाकड़ी में हुई। इसमें फैसला लिया गया कि 26 नवंबर को केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ होने वाली हड़ताल में सतलुज जल विद्युत कांट्रेक्ट वर्कर्स यूनियन रतनपुर भी भाग लेगी। इस दिन झाकड़ी परियोजना के सभी मजदूर और सफाई कर्मचारी आंदोलन करेंगे।
सीटू राज्य उपाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं अथवा लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
किसान विरोधी तीन कानूनों को पारित करने के कारण 80 करोड़ से ज्यादा मजदूर और किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। आंगनबाड़ी, आशा, मिड- डे मील वर्कर के निजीकरण की साजिश की जा रही है। नई शिक्षा नीति से कर्मी बरबाद हो जाएंगे। उन्हें वर्ष 2013 के 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित कर्मचारी घोषित नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स, ठेका और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है। यूनियन ने मजदूरों का न्यूनतम वेतन इक्कीस हजार रुपये घोषित करने, केंद्र और राज्य का एक समान वेतन घोषित करने, किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने, मनरेगा में दो सौ दिन का रोजगार देने, 275 रुपये न्यूनतम दैनिक वेतन लागू करने, ठेका, आउटसोर्स और अनुबंध को समाप्त कर मजदूरों को नियमित करने की मांग की है। इस अवसर पर सीटू जिला शिमला के अध्यक्ष कुलदीप सिंह, यूनियन के प्रधान राजेश कुमार, सचिव नरेंद्र देष्टा, उपाध्यक्ष पोविंदर शर्मा, कोषाध्यक्ष श्याम लाल, रोशन लाल, प्रवीण शर्मा, पवन कुमार, श्यामा देवी, प्रोमिला, रणवीर नेगी, चंद्र शर्मा, मनमोहन सहित अन्य मौजूद रहे।
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सीटू राज्य उपाध्यक्ष ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूंजीपतियों के हित में कार्य कर रही है और मजदूर विरोधी निर्णय ले रही है। 44 श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताएं अथवा लेबर कोड बनाना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
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किसान विरोधी तीन कानूनों को पारित करने के कारण 80 करोड़ से ज्यादा मजदूर और किसान सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। आंगनबाड़ी, आशा, मिड- डे मील वर्कर के निजीकरण की साजिश की जा रही है। नई शिक्षा नीति से कर्मी बरबाद हो जाएंगे। उन्हें वर्ष 2013 के 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार नियमित कर्मचारी घोषित नहीं किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से 26 अक्तूबर 2016 को समान कार्य के लिए समान वेतन के आदेश को आउटसोर्स, ठेका और दिहाड़ीदार मजदूरों के लिए लागू नहीं किया जा रहा है। वर्ष 2003 के बाद नौकरी में लगे कर्मचारियों का नई पेंशन नीति के माध्यम से शोषण किया जा रहा है। यूनियन ने मजदूरों का न्यूनतम वेतन इक्कीस हजार रुपये घोषित करने, केंद्र और राज्य का एक समान वेतन घोषित करने, किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने, मनरेगा में दो सौ दिन का रोजगार देने, 275 रुपये न्यूनतम दैनिक वेतन लागू करने, ठेका, आउटसोर्स और अनुबंध को समाप्त कर मजदूरों को नियमित करने की मांग की है। इस अवसर पर सीटू जिला शिमला के अध्यक्ष कुलदीप सिंह, यूनियन के प्रधान राजेश कुमार, सचिव नरेंद्र देष्टा, उपाध्यक्ष पोविंदर शर्मा, कोषाध्यक्ष श्याम लाल, रोशन लाल, प्रवीण शर्मा, पवन कुमार, श्यामा देवी, प्रोमिला, रणवीर नेगी, चंद्र शर्मा, मनमोहन सहित अन्य मौजूद रहे।
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