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हृदय गति रूकने से एसएसबी जवान की हुई मौत
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रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर की भड़ावली पंचायत के निवासी एवं सशस्त्र सीमा बल में तैनात जवान नरसिंह मेहता की हृदयगति रुकने से मौत हो गई। वीरवार को नोगली में राजकीय सम्मान के साथ जवान को अंतिम विदाई दी गई। जवान की मौत के बाद समूचे क्षेत्र में शोक की लहर है।
गौरतलब है कि भड़ावली पंचायत के मतरेवल गांव से संबंध रखने वाले 52 वर्षीय जवान नरसिंह मेहता की बीते मंगलवार को हृदय गति रुकने के कारण निधन हो गया। मेहता सशस्त्र सीमा बल की 49वीं वाहिनी में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बतौर एएसआई (जीडी) पद पर तैनात थे। उनके आकस्मिक निधन की खबर सुनकर परिवार समेत समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। वीरवार सुबह 10:20 बजे नरसिंह मेहता का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ मतरेवल गांव लाया गया। एसएसबी के जवानों, परिजनों और ग्रामीणों ने पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए। परिजनों के आंसू थम नहीं रहे थे। इसके बाद घर से उनकी अंतिम यात्रा निकली, जिसमें परिजनों के साथ ग्रामीण और रिश्तेदार भी शामिल हुए। इस दौरान नरसिंह मेहता अमर रहे और भारत माता के जयकारों से समूचा कुमसू क्षेत्र गूंज उठा। नोकगली स्थित श्मशानघाट पर मेहता की अंत्येष्टि की गई। एसएसबी जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ सलामी दी।
जवान के छोटे भाई कैलाश मेहता ने बताया कि 18 तारीख को ड्यूटी पर जाने के लिए नरसिंह घर से रवाना हुए तो बीच सफर में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। 33 वर्ष पहले मात्र 18 वर्ष की आयु में नरसिंह एसएसबी में भर्ती हुए थे और देश के कई स्थानों पर अपनी ड्यूटी दी। तीन भाइयों में सबसे बड़े भाई और पारिवारिक सदस्य को खोने का असहनीय दु:ख है जिसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। नरसिंह ने समर्पित भाव से लगभग 32 वर्षों से भी अधिक समय सरहद पर रहकर देश सेवा में अपना अतुलनीय योगदान दिया है।
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गौरतलब है कि भड़ावली पंचायत के मतरेवल गांव से संबंध रखने वाले 52 वर्षीय जवान नरसिंह मेहता की बीते मंगलवार को हृदय गति रुकने के कारण निधन हो गया। मेहता सशस्त्र सीमा बल की 49वीं वाहिनी में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में बतौर एएसआई (जीडी) पद पर तैनात थे। उनके आकस्मिक निधन की खबर सुनकर परिवार समेत समूचे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। वीरवार सुबह 10:20 बजे नरसिंह मेहता का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ मतरेवल गांव लाया गया। एसएसबी के जवानों, परिजनों और ग्रामीणों ने पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किए। परिजनों के आंसू थम नहीं रहे थे। इसके बाद घर से उनकी अंतिम यात्रा निकली, जिसमें परिजनों के साथ ग्रामीण और रिश्तेदार भी शामिल हुए। इस दौरान नरसिंह मेहता अमर रहे और भारत माता के जयकारों से समूचा कुमसू क्षेत्र गूंज उठा। नोकगली स्थित श्मशानघाट पर मेहता की अंत्येष्टि की गई। एसएसबी जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ सलामी दी।
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जवान के छोटे भाई कैलाश मेहता ने बताया कि 18 तारीख को ड्यूटी पर जाने के लिए नरसिंह घर से रवाना हुए तो बीच सफर में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। 33 वर्ष पहले मात्र 18 वर्ष की आयु में नरसिंह एसएसबी में भर्ती हुए थे और देश के कई स्थानों पर अपनी ड्यूटी दी। तीन भाइयों में सबसे बड़े भाई और पारिवारिक सदस्य को खोने का असहनीय दु:ख है जिसको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। नरसिंह ने समर्पित भाव से लगभग 32 वर्षों से भी अधिक समय सरहद पर रहकर देश सेवा में अपना अतुलनीय योगदान दिया है।
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