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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Circuit court should be restarted in Nirmand

निरमंड में सर्किट कोर्ट दोबारा किया जाए शुरू : डोगरा

Tue, 11 Mar 2025 11:23 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Mar 2025 11:23 PM IST
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कोरोना काल के बाद घर द्वार न्याय पाने से वंचित 32 पंचायतों के ग्रामीण
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आनी कोर्ट पहुंचने के लिए 200 किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा तय
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। बार एसोसिएशन निरमंड की बैठक अधिवक्ता सीएल डोगरा की अध्यक्षता में तहसील कार्यालय निरमंड में हुई। बैठक में जेएमएफसी कोर्ट और सिविल कोर्ट आनी को पहले की भांति निरमंड में दोबारा सर्किट कोर्ट के रूप में शुरू करने का मुद्दा जोर-शोर से उठा। बैठक में प्रदेश सरकार और न्यायाधीश उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश से मांग उठाई कि निरमंड में पहले की तरह सर्किट कोर्ट शुरू किया जाए। कोर्ट शुरू न होने के कारण निरमंड क्षेत्र के दुर्गम और पिछड़े हुए क्षेत्रों के लोगों को न्याय पाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों में निरमंड में तीन बार सर्किट कोर्ट लगाया था, लेकिन कोरोना काल के बाद आज तक कोई सर्किट कोर्ट नहीं लगाया गया है। यहां तक कि अधिवक्ताओं और 32 पंचायतों के प्रधानों ने कई बार अपील की, तब उच्च न्यायालय ने आश्वासन दिया कि कोर्ट के विषय में फुल बेंच में निर्णय लिया जाएगा, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। निरमंड क्षेत्र के लोगों को आनी कोर्ट पहुंचने के लिए करीब 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों को पहले रामपुर पहुंचना पड़ता है और फिर वाया लूहरी होते हुए आनी कोर्ट के लिए जाना पड़ रहा है। कई बार भारी वर्षा के कारण लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर न्याय पाने के लिए पहुंचना पड़ रहा है। निरमंड सब डिवीजन में एसडीएम का कोर्ट तो सुचारु रूप से चल रहा है, लेकिन जज कोर्ट की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यहां मुकदमों की संख्या 1200 के आसपास है। निरमंड में दो थाने और एक पुलिस चौकी होने के बावजूद यहां एक स्थायी न्यायालय की अनुपस्थित एक गंभीर मुद्दा है। यह न केवल स्थायी न्याय प्रणाली की स्वतंत्रता व कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि स्थानीय निवासियों को भी प्रभावित करता है। जमीन का इंतकाल भी जुडिशियल कोर्ट के नाम पर कर दिया है। फिर भी कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक उपमंडल में एक सिविल जज अदालत खोलने की व्यवस्था की गई है, ताकि लोगों को घरद्वार न्याय मिल सके। इसके बावजूद लोगों को निरमंड में घर द्वार न्याय के लाभ से वंचित रखा जा रहा है। बैठक में प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय से आग्रह किया गया कि इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र न्यायालय की स्थापना की जाए या इसी बीच में जेएमएफसी या सिविल जज कोर्ट आनी का सर्किट सुचारु रूप से निरमंड में लगाया जाए। इस मुद्दे को उच्च न्यायालय द्वारा जनहित याचिका के रूप में संज्ञान में लिया जाए।
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