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Rampur Bushahar News: गर्मी से सेब की फसल पर पड़ रहे काले धब्बे
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मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के फलों में पड़ रहीं दरारें
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। इस साल लगातार सूखे के कारण कम और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के सेब बगीचों में फलों में दरारें पड़ रही हैं। कई बगीचों में फलों में दरारें पड़ने के बाद फटने से 20 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। अधिकांश बगीचों में सेब के फलों पर काले धब्बे पड़ गए हैं। इस बार सेब की फसल खराब होने से बागवान चिंतित हैं।
इस साल शुरू से बागवानी के लिए प्रतिकूल मौसम की मार के कारण संकट बना हुआ है। जमीन में नमी नहीं होने के कारण इस साल फलों का आकार विकसित नहीं हो रहा। फल विकास न होन से औसतन उत्पादन के अनुमान में कमी होने वाली है। आकार विकसित न होने से सेब सीजन शुरू होने में करीब बीस दिन की देरी हो रही है। बागवानों का कहना है कि अधिक सूखे के कारण मध्यम व कम ऊंचाई वाले बगीचों में खट्टी मिट्ठी किस्म के पौधों पर लगे फल दरारें आने से फट रहे हैं। कई बगीचों में फलों के फटने से 20 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। सेब के कुछ शंकर प्रजाति के फल काले धब्बे पड़ने से खराब हो चुके हैं। बागवानों का कहना है कि मौसम की मार के कारण बगीचों में अल्ट्ररनेरिया व मार्साेनिना के कारण पतझड़ की बीमारी को काबू पाने में जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इसके अलावा माईट के संक्रमण से बगीचे तबाह हो रहे हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में सूखे के बाद नमी आने से सेब की कुछ बैराइटियों के फल फटने की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा फटे फल का कोई उपचार नहीं हो सकता। उनका कहना है कि जहां पर बगीचों में फलों पर काले छोटे धब्बे नजर आ रहे हैं, उनको समय पर जांच के बाद पोषक तत्व के छिड़काव से पूरा नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा उद्यान विभाग की सिफारिश के अनुसार बगीचों में पतझड़ और माईट की बीमारी दवा के छिड़काव से नियंत्रण की जा सकती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। इस साल लगातार सूखे के कारण कम और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों के सेब बगीचों में फलों में दरारें पड़ रही हैं। कई बगीचों में फलों में दरारें पड़ने के बाद फटने से 20 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। अधिकांश बगीचों में सेब के फलों पर काले धब्बे पड़ गए हैं। इस बार सेब की फसल खराब होने से बागवान चिंतित हैं।
इस साल शुरू से बागवानी के लिए प्रतिकूल मौसम की मार के कारण संकट बना हुआ है। जमीन में नमी नहीं होने के कारण इस साल फलों का आकार विकसित नहीं हो रहा। फल विकास न होन से औसतन उत्पादन के अनुमान में कमी होने वाली है। आकार विकसित न होने से सेब सीजन शुरू होने में करीब बीस दिन की देरी हो रही है। बागवानों का कहना है कि अधिक सूखे के कारण मध्यम व कम ऊंचाई वाले बगीचों में खट्टी मिट्ठी किस्म के पौधों पर लगे फल दरारें आने से फट रहे हैं। कई बगीचों में फलों के फटने से 20 प्रतिशत तक फसल खराब हो चुकी है। सेब के कुछ शंकर प्रजाति के फल काले धब्बे पड़ने से खराब हो चुके हैं। बागवानों का कहना है कि मौसम की मार के कारण बगीचों में अल्ट्ररनेरिया व मार्साेनिना के कारण पतझड़ की बीमारी को काबू पाने में जद्दोजहद करनी पड़ रही है। इसके अलावा माईट के संक्रमण से बगीचे तबाह हो रहे हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के बगीचों में सूखे के बाद नमी आने से सेब की कुछ बैराइटियों के फल फटने की सूचनाएं मिल रही हैं। उन्होंने कहा फटे फल का कोई उपचार नहीं हो सकता। उनका कहना है कि जहां पर बगीचों में फलों पर काले छोटे धब्बे नजर आ रहे हैं, उनको समय पर जांच के बाद पोषक तत्व के छिड़काव से पूरा नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा उद्यान विभाग की सिफारिश के अनुसार बगीचों में पतझड़ और माईट की बीमारी दवा के छिड़काव से नियंत्रण की जा सकती है।
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