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खस्ताहाल सड़कों से मंडी तक कैसे पहुंचेगा सेब
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सांगला (किन्नौर)। जिले में चौरा से लेकर पोवारी तक नेशनल हाईवे-5 की हालत खस्ता बनी हुई है। हाईवे ही नहीं, जिले के तीनों खंडों कल्पा, पूह और निचार खंड की दर्जनों सड़कों की हालात भी बदतर बनी हुई है। ऐसे में जिले के हजारों लोगों खासकर बागवानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में सेब सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन सीजन से पहले सड़कों की हालत सुधारने में लोक निर्माण विभाग ने कोई पहल नहीं की।
गौरतलब है कि इन दिनों में जिले के अधिकतर निचले इलाकों में सेब सीजन शुरू हो चुका है। सड़कों की खस्ता हालत के चलते नकदी फसल सेब को मंडियों में पहुंचाना बागवानों के लिए मुश्किल हो गया है। सरकार, जिला प्रशासन, नेशनल हाईवे प्राधिकरण, सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग ने सड़कों की सुध नहीं ली। जिले में इस वर्ष बरसात भी अधिक नहीं हुई है, बावजूद इसके सड़कों की हालत खस्ता बनी हुई है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमेश नेगी ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय विधायक जगत सिंह नेगी ने 42 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था, लेकिन भाजपा के सत्ता में आते ही एनएच की ही हालत नहीं सुधर पाई तो ग्रामीण सड़कों की हालत कैसे सुधरेगी? इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। बीरसिंह नेगी, प्रीतम सिंह नेगी, प्रेम कुमार नेगी और प्रताप सिंह नेगी ने सरकार और जिला प्रशासन एनएच सहित जिले की ग्रामीण सड़कों को दुरुस्त करने की मांग की है।
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उधर, सीमा सड़क संगठन के ओसी पोवारी डीके राघव, एनएच प्राधिकरण रामपुर एक्सईएन वीरेंद्र सिंह गुलेरिया, एक्सईएन लोनिवि कल्पा पीसी नेगी, एक्सईएन भावानगर राहुल सूद ने बताया कि सड़कों को सुधारने के प्रयास जारी हैं।
इन सड़कों पर सफर खतरनाक
जिले की चोरा-रूपी, चोरा-कंबा, भावानगर-नाथपा, कटगांव-क्राबा, चोलिंग-मीरू, युला, उरनी, चगांव, कड़छम-ब्रुआ, कड़छम-शौंग, सांगला-छितकुल, नेसंग, लिप्पा, आसरंग, स्पीलो-कानम, मूरंग झुला-कुन्नोचारंग, खाब-टाशीगांग, लियो, हांगो, चूलिंग सहित जिले की अधिकतर ग्रामीण सड़कों की खस्ताहाल बागवानों पर भारी पड़ रही है।
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गौरतलब है कि इन दिनों में जिले के अधिकतर निचले इलाकों में सेब सीजन शुरू हो चुका है। सड़कों की खस्ता हालत के चलते नकदी फसल सेब को मंडियों में पहुंचाना बागवानों के लिए मुश्किल हो गया है। सरकार, जिला प्रशासन, नेशनल हाईवे प्राधिकरण, सीमा सड़क संगठन और लोक निर्माण विभाग ने सड़कों की सुध नहीं ली। जिले में इस वर्ष बरसात भी अधिक नहीं हुई है, बावजूद इसके सड़कों की हालत खस्ता बनी हुई है।
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कांग्रेस जिलाध्यक्ष उमेश नेगी ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार के समय विधायक जगत सिंह नेगी ने 42 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था, लेकिन भाजपा के सत्ता में आते ही एनएच की ही हालत नहीं सुधर पाई तो ग्रामीण सड़कों की हालत कैसे सुधरेगी? इसकी सहज कल्पना की जा सकती है। बीरसिंह नेगी, प्रीतम सिंह नेगी, प्रेम कुमार नेगी और प्रताप सिंह नेगी ने सरकार और जिला प्रशासन एनएच सहित जिले की ग्रामीण सड़कों को दुरुस्त करने की मांग की है।
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उधर, सीमा सड़क संगठन के ओसी पोवारी डीके राघव, एनएच प्राधिकरण रामपुर एक्सईएन वीरेंद्र सिंह गुलेरिया, एक्सईएन लोनिवि कल्पा पीसी नेगी, एक्सईएन भावानगर राहुल सूद ने बताया कि सड़कों को सुधारने के प्रयास जारी हैं।
इन सड़कों पर सफर खतरनाक
जिले की चोरा-रूपी, चोरा-कंबा, भावानगर-नाथपा, कटगांव-क्राबा, चोलिंग-मीरू, युला, उरनी, चगांव, कड़छम-ब्रुआ, कड़छम-शौंग, सांगला-छितकुल, नेसंग, लिप्पा, आसरंग, स्पीलो-कानम, मूरंग झुला-कुन्नोचारंग, खाब-टाशीगांग, लियो, हांगो, चूलिंग सहित जिले की अधिकतर ग्रामीण सड़कों की खस्ताहाल बागवानों पर भारी पड़ रही है।