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Rampur Bushahar News: नित्थर में सेब सीजन समाप्ति पर, कम पैदावार से बागवान मायूस
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बीते वर्ष के मुकाबले आधे से भी कम हुआ सेब उत्पादन
सेब से हटकर स्टोन फ्रूट्स की ओर बढ़ रहा बागवानों का रुझान
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। उपतहसील नित्थर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन अंतिम चरण में है। इस वर्ष सेब उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। क्षेत्र के बागवानों में मायूसी है और अब गुठलीदार फलों की खेती अपनाने का विचार कर रहे हैं। नित्थर पंचायत के ऊपरी क्षेत्रों एड़शी, बोआई, शिल्लाबाग, झल्ली, केउरी, ढमाह और कुठेड़ के कई इलाकों में इस बार सेब का सीजन लगभग समाप्ति पर है। सेब के दाम मंडियों में कम पैदावार के कारण अच्छे मिल रहे हैं। सेब की एक पेटी 2 हजार से अधिक बिक रही है, लेकिन सेब उत्पादकों में सेब की कम पैदावार के कारण मायूसी छाई है। कीटनाशक दवाओं, खाद, मजदूरों का खर्चा वहन करना भी मुश्किल हो गया है। नित्थर के बागवान प्रदीप रंगून, भूपिंदर चौहान, सुनील भारती सहित अन्य का कहना है कि पिछली साल क्षेत्र में करीब 20 हजार के करीब सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा 8 हजार सेब की पेटियों पर ही सिमट गया है। इसका मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग, आगजनी और सर्दियों में मौसम का न बरसना बताया जा रहा है। दिन-प्रतिदिन नमी कम हो रही है और सर्दियों में बर्फ नहीं पड़ रही है, जिससे नमी में भारी कमी दर्ज की गई है। बागवान भूपिंदर चौहान, प्रदीप रंगून और यशपाल का कहना है कि सेब पर काम न करके अब बागवानों को स्टोन फ्रूट्स की तरफ जाना पड़ेगा। बागवानों को अब पलम, अखरोट, खुमानी, जापानी फल और सब्जियों में फूलगोभी, काला जीरा, मिर्च, हल्दी और धनिये की पैदावार कर अपनी आर्थिकी मजबूत करनी होगी।
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सेब से हटकर स्टोन फ्रूट्स की ओर बढ़ रहा बागवानों का रुझान
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। उपतहसील नित्थर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन अंतिम चरण में है। इस वर्ष सेब उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। क्षेत्र के बागवानों में मायूसी है और अब गुठलीदार फलों की खेती अपनाने का विचार कर रहे हैं। नित्थर पंचायत के ऊपरी क्षेत्रों एड़शी, बोआई, शिल्लाबाग, झल्ली, केउरी, ढमाह और कुठेड़ के कई इलाकों में इस बार सेब का सीजन लगभग समाप्ति पर है। सेब के दाम मंडियों में कम पैदावार के कारण अच्छे मिल रहे हैं। सेब की एक पेटी 2 हजार से अधिक बिक रही है, लेकिन सेब उत्पादकों में सेब की कम पैदावार के कारण मायूसी छाई है। कीटनाशक दवाओं, खाद, मजदूरों का खर्चा वहन करना भी मुश्किल हो गया है। नित्थर के बागवान प्रदीप रंगून, भूपिंदर चौहान, सुनील भारती सहित अन्य का कहना है कि पिछली साल क्षेत्र में करीब 20 हजार के करीब सेब की पेटियों का उत्पादन हुआ था, लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा 8 हजार सेब की पेटियों पर ही सिमट गया है। इसका मुख्य कारण ग्लोबल वार्मिंग, आगजनी और सर्दियों में मौसम का न बरसना बताया जा रहा है। दिन-प्रतिदिन नमी कम हो रही है और सर्दियों में बर्फ नहीं पड़ रही है, जिससे नमी में भारी कमी दर्ज की गई है। बागवान भूपिंदर चौहान, प्रदीप रंगून और यशपाल का कहना है कि सेब पर काम न करके अब बागवानों को स्टोन फ्रूट्स की तरफ जाना पड़ेगा। बागवानों को अब पलम, अखरोट, खुमानी, जापानी फल और सब्जियों में फूलगोभी, काला जीरा, मिर्च, हल्दी और धनिये की पैदावार कर अपनी आर्थिकी मजबूत करनी होगी।