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सेब सीजन में टैक्सी संचालकों को लूट की छूट
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रोहडू। सेब सीजन के लिए दूसरे राज्यों से मजदूरों को लाने के सरकारी सभी दावे कोरे साबित हुए हैं। सेब बगीचों में काम करने के लिए बागवानों की ओर से बुलाए जा रहे मजदूरों को टैक्सी संचालक खूब लूट रहे हैं। करोना संकट के बीच पांच हजार रुपये के रूट का टैक्सी वाले पंद्रह हजार रुपये किराया मांग रहे हैं। सरकार की ओर से सेब सीजन निपटाने के दावे की शुरुआतमें ही पोल खुल गई है।
सेब सीजन के लिए प्रदेश के बाहर से आने वाले मजदूरों को पहुंचाने के लिए एसडीएम कार्यालय को पास जारी करने के सरकार ने निर्देश जारी कर रखे हैं। आवेदन करते समय मजदूरों को लाने के लिए भेजे जाने वाले वाहन का नंबर अंकित करने पर ही सरकार की ओर से पास जारी किया जाता है। ऐसे में बागवान को बाहरी क्षेत्रों से मजदूरों लाने से पहले टैक्सी का प्रबंध करने के बाद ही पास में वाहन नंबर भरा जाता है। एसडीएम कार्यालय की ओर से वाहन में लोगों के बैठने की क्षमता जांचने के बाद ही पास जारी किया जाता है। आरोप है कि ऐसे में टैक्सी संचालक बागवानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। मजदूरों को बगीचों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने टैक्सी के किराये की कोई दरें तय नहीं की हैं। रोहड़ू के बागवान मनोज ने देहरादून से रोहडू के लिए मजदूरों को लाने के लिए टैक्सी का भाड़ा पता किया तो यूनियन से 11 सीट वाली गाड़ी (ट्रैक्स) का किराया पंद्रह हजार रुपये मांगा गया। रोहडू से देहरादून की दूरी मात्र 195 किलोमीटर है। ऐसे में रोहडू से देहरादून और हरिद्वार के लिए टैक्सी में पांच से छह हजार रुपये किराया वसूला जाता है। वर्तमान में 11 सीट वाली टैक्सी में चालक के साथ एक सह चालक होने के कारण मजदूरों के बैठने की क्षमता केवल नौ ही बचती है। इसी प्रकार परवाणू, चंडीगढ़, हरिद्वार सहित बाहरी राज्यों से मजदूरों को लाने का आजकल मनमाना किराया वसूला जा रहा है। बागवान सोनू, कुलदीप सिंह और विरेंद्र ने बताया कि सरकार ने सेब सीजन से पहले मजदूरों को निशुल्क लाने का वायदा बागवानों से किया था लेकिन अब बागवानों को किराये के नाम पर लूटा जा रहा है। मजदूरों की कमी के कारण अधिकांश बागवानों को जेब से भुगतान कर मजदूरों का प्रबंध करना पड़ रहा है। बागवानों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेब सीजन में प्रदेश के बाहरी क्षेत्रों से मजदूरों को लाने के लिए टैक्सी का किराया प्रति किलोमीटर तय किया जाए।
एसडीएम बीआर शर्मा ने बताया कि यदि टैक्सी चालक लोगों से मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं तो शिकायत के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि टैक्सी यूनियनों को भी इसके बारे में जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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सेब सीजन के लिए प्रदेश के बाहर से आने वाले मजदूरों को पहुंचाने के लिए एसडीएम कार्यालय को पास जारी करने के सरकार ने निर्देश जारी कर रखे हैं। आवेदन करते समय मजदूरों को लाने के लिए भेजे जाने वाले वाहन का नंबर अंकित करने पर ही सरकार की ओर से पास जारी किया जाता है। ऐसे में बागवान को बाहरी क्षेत्रों से मजदूरों लाने से पहले टैक्सी का प्रबंध करने के बाद ही पास में वाहन नंबर भरा जाता है। एसडीएम कार्यालय की ओर से वाहन में लोगों के बैठने की क्षमता जांचने के बाद ही पास जारी किया जाता है। आरोप है कि ऐसे में टैक्सी संचालक बागवानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। मजदूरों को बगीचों तक पहुंचाने के लिए सरकार ने टैक्सी के किराये की कोई दरें तय नहीं की हैं। रोहड़ू के बागवान मनोज ने देहरादून से रोहडू के लिए मजदूरों को लाने के लिए टैक्सी का भाड़ा पता किया तो यूनियन से 11 सीट वाली गाड़ी (ट्रैक्स) का किराया पंद्रह हजार रुपये मांगा गया। रोहडू से देहरादून की दूरी मात्र 195 किलोमीटर है। ऐसे में रोहडू से देहरादून और हरिद्वार के लिए टैक्सी में पांच से छह हजार रुपये किराया वसूला जाता है। वर्तमान में 11 सीट वाली टैक्सी में चालक के साथ एक सह चालक होने के कारण मजदूरों के बैठने की क्षमता केवल नौ ही बचती है। इसी प्रकार परवाणू, चंडीगढ़, हरिद्वार सहित बाहरी राज्यों से मजदूरों को लाने का आजकल मनमाना किराया वसूला जा रहा है। बागवान सोनू, कुलदीप सिंह और विरेंद्र ने बताया कि सरकार ने सेब सीजन से पहले मजदूरों को निशुल्क लाने का वायदा बागवानों से किया था लेकिन अब बागवानों को किराये के नाम पर लूटा जा रहा है। मजदूरों की कमी के कारण अधिकांश बागवानों को जेब से भुगतान कर मजदूरों का प्रबंध करना पड़ रहा है। बागवानों ने जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेब सीजन में प्रदेश के बाहरी क्षेत्रों से मजदूरों को लाने के लिए टैक्सी का किराया प्रति किलोमीटर तय किया जाए।
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एसडीएम बीआर शर्मा ने बताया कि यदि टैक्सी चालक लोगों से मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं तो शिकायत के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि टैक्सी यूनियनों को भी इसके बारे में जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
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