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Rampur Bushahar News: नित्थर में 20 से घटकर 8 हजार पेटी रहा सेब उत्पादन
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बीते वर्ष के मुकाबले आधे से भी कम मिली फसल
बागवान सेब छोड़ स्टोन फ्रूट्स उगाने का बना रहे मन
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। उपतहसील नित्थर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन अंतिम चरण में है। इस वर्ष सेब उत्पादन में भारी गिरावट से बागवान मायूस हैं। कम उत्पादन के कारण मंडियों में सेब के दाम अच्छे मिल रहे हैं, लेकिन बागवानों को इसका लाभ अपेक्षित उत्पादन न होने के कारण नहीं मिल पा रहा है। अब कई बागवान गुठलीदार फलों की खेती की ओर रुख करने का विचार कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत नित्थर के ऊपरी क्षेत्रों एड़शी, बुआई, शिल्लाबाग, झल्ली, केउरी और ढमाह सहित ग्राम पंचायत कुठेड़ के कई इलाकों में सेब सीजन लगभग समाप्त हो चुका है। मंडियों में एक पेटी सेब 2 हजार रुपये से अधिक में बिक रही है। इसके बावजूद कम उत्पादन के कारण बागवानों में मायूसी है। बागवानों का कहना है कि कीटनाशक, खाद और मजदूरों पर होने वाला खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
नित्थर के बागवान प्रदीप रंगून, भूपिंदर चौहान और सुनील भारती सहित अन्य ने बताया कि पिछले वर्ष क्षेत्र में करीब 20 हजार पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष उत्पादन घटकर करीब 8 हजार पेटी रह गया है। बागवानों ने कम उत्पादन के लिए ग्लोबल वार्मिंग, अग्निकांड और सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि लगातार घटती नमी और सर्दियों में बर्फ न पड़ने से बागों पर असर पड़ रहा है।
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बागवान भूपिंद्र चौहान, प्रदीप रंगून और यशपाल ने कहा कि अब सेब के बजाय गुठलीदार फलों की ओर रुख करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बागवान पलम, अखरोट, खुमानी और जापानी फल के साथ फूलगोभी, काला जीरा, मिर्च, हल्दी और धनिये जैसी फसलों की खेती कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं।
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बागवान सेब छोड़ स्टोन फ्रूट्स उगाने का बना रहे मन
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। उपतहसील नित्थर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन अंतिम चरण में है। इस वर्ष सेब उत्पादन में भारी गिरावट से बागवान मायूस हैं। कम उत्पादन के कारण मंडियों में सेब के दाम अच्छे मिल रहे हैं, लेकिन बागवानों को इसका लाभ अपेक्षित उत्पादन न होने के कारण नहीं मिल पा रहा है। अब कई बागवान गुठलीदार फलों की खेती की ओर रुख करने का विचार कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत नित्थर के ऊपरी क्षेत्रों एड़शी, बुआई, शिल्लाबाग, झल्ली, केउरी और ढमाह सहित ग्राम पंचायत कुठेड़ के कई इलाकों में सेब सीजन लगभग समाप्त हो चुका है। मंडियों में एक पेटी सेब 2 हजार रुपये से अधिक में बिक रही है। इसके बावजूद कम उत्पादन के कारण बागवानों में मायूसी है। बागवानों का कहना है कि कीटनाशक, खाद और मजदूरों पर होने वाला खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
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नित्थर के बागवान प्रदीप रंगून, भूपिंदर चौहान और सुनील भारती सहित अन्य ने बताया कि पिछले वर्ष क्षेत्र में करीब 20 हजार पेटी सेब का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष उत्पादन घटकर करीब 8 हजार पेटी रह गया है। बागवानों ने कम उत्पादन के लिए ग्लोबल वार्मिंग, अग्निकांड और सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि लगातार घटती नमी और सर्दियों में बर्फ न पड़ने से बागों पर असर पड़ रहा है।
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बागवान भूपिंद्र चौहान, प्रदीप रंगून और यशपाल ने कहा कि अब सेब के बजाय गुठलीदार फलों की ओर रुख करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बागवान पलम, अखरोट, खुमानी और जापानी फल के साथ फूलगोभी, काला जीरा, मिर्च, हल्दी और धनिये जैसी फसलों की खेती कर अपनी आर्थिकी मजबूत कर सकते हैं।