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Rampur Bushahar News: सूखे की मार से सेब की फसल तबाह
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बारिश न होने से सेब के पौधों में लग रहे विभिन्न प्रकार के रोग
नित्थर क्षेत्र के बागवानों को वर्ष भर का खर्चा निकालना हुआ मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। लंबे समय से बारिश न होने से प्रदेश में सूखे की स्थिति हो गई है। इसका दुष्प्रभाव सेब की फसल पर पड़ रहा है। सेब की फसल पर बीमारी लगनी शुरू हो गई है। सेब में काले दाग पड़ रहे हैं, हालांकि क्षेत्र में इस वर्ष भी ओलावृष्टि से सेब की फसल तबाह हुई है।
बताते चलें कि नित्थर के निचले क्षेत्रों शांनी, घोरला अधिकतर ग्राम पंचायत पलेही और ग्राम पंचायत नित्थर के गांव खोबड़ी खड्ड, खदवेचा, नित्थर के ऊपरी क्षेत्र एडशी, बुआई, ढमाह, केऊरी में इस बार मौसम की मार पड़ी है। इन क्षेत्रों में हर वर्ष लाखों पेटी सेब का उत्पादन होता है, लेकिन इस वर्ष बागवानों का साल भर का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है। बागवानों की आर्थिकी पर इसका विपरीत असर पड़ता दिख रहा है। नित्थर के अधिकतर व्यापारियों का कहना है कि इसका असर बाजार में दिख रहा है। स्थानीय बागवानों सुनील भारती, जयसुख, सिकंदर ठाकुर, चिंटू ठाकुर, हुकुम चंद, विजय ठाकुर, अक्षय कुमार सहित अन्य का कहना है कि सेब पर सर्दी में भी सूखे की मार पड़ी है। दो तीन महीने का समय सूखे में निकला और फिर रही सही कसर मई माह हुई ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। अब बारिश का न होना। इससे बचे हुए सेब में बीमारियां लगनी शुरू हो गई हैं। सेब के पौधों में अल्टनेरिया, लीफ ब्लॉच, माइट, निकोरोटिक जैसी बीमारियां फैल रही हैं। सूखे के चलते इन बीमारियों पर रोक लगाना मुश्किल है।
उधर, उद्यान विभाग आनी के विषय विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने बताया कि वह लगातार निरमंड और आनी के सेब बहुल क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। हालांकि विभिन्न स्थानों पर बेहतर फसल उत्पादन हो रहा है, लेकिन नित्थर और आसपास के क्षेत्रों में सेब पर सूखे की मार पड़ रही है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि सेब के बगीचों में अच्छी घास से पेड़ों के पास नमी बनाकर रखें। अब खाद का बगीचों में बिलकुल इस्तेमाल न करें।
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नित्थर क्षेत्र के बागवानों को वर्ष भर का खर्चा निकालना हुआ मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर(कुल्लू)। लंबे समय से बारिश न होने से प्रदेश में सूखे की स्थिति हो गई है। इसका दुष्प्रभाव सेब की फसल पर पड़ रहा है। सेब की फसल पर बीमारी लगनी शुरू हो गई है। सेब में काले दाग पड़ रहे हैं, हालांकि क्षेत्र में इस वर्ष भी ओलावृष्टि से सेब की फसल तबाह हुई है।
बताते चलें कि नित्थर के निचले क्षेत्रों शांनी, घोरला अधिकतर ग्राम पंचायत पलेही और ग्राम पंचायत नित्थर के गांव खोबड़ी खड्ड, खदवेचा, नित्थर के ऊपरी क्षेत्र एडशी, बुआई, ढमाह, केऊरी में इस बार मौसम की मार पड़ी है। इन क्षेत्रों में हर वर्ष लाखों पेटी सेब का उत्पादन होता है, लेकिन इस वर्ष बागवानों का साल भर का खर्चा निकालना मुश्किल हो गया है। बागवानों की आर्थिकी पर इसका विपरीत असर पड़ता दिख रहा है। नित्थर के अधिकतर व्यापारियों का कहना है कि इसका असर बाजार में दिख रहा है। स्थानीय बागवानों सुनील भारती, जयसुख, सिकंदर ठाकुर, चिंटू ठाकुर, हुकुम चंद, विजय ठाकुर, अक्षय कुमार सहित अन्य का कहना है कि सेब पर सर्दी में भी सूखे की मार पड़ी है। दो तीन महीने का समय सूखे में निकला और फिर रही सही कसर मई माह हुई ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। अब बारिश का न होना। इससे बचे हुए सेब में बीमारियां लगनी शुरू हो गई हैं। सेब के पौधों में अल्टनेरिया, लीफ ब्लॉच, माइट, निकोरोटिक जैसी बीमारियां फैल रही हैं। सूखे के चलते इन बीमारियों पर रोक लगाना मुश्किल है।
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उधर, उद्यान विभाग आनी के विषय विशेषज्ञ उत्तम पराशर ने बताया कि वह लगातार निरमंड और आनी के सेब बहुल क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। हालांकि विभिन्न स्थानों पर बेहतर फसल उत्पादन हो रहा है, लेकिन नित्थर और आसपास के क्षेत्रों में सेब पर सूखे की मार पड़ रही है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि सेब के बगीचों में अच्छी घास से पेड़ों के पास नमी बनाकर रखें। अब खाद का बगीचों में बिलकुल इस्तेमाल न करें।
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