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Rampur Bushahar News: मोटा अनाज उगाया, 175 किसानों ने मनरेगा योजना का लाभ पाया
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कुपवी ब्लाॅक में विलुप्ट हो रहे अनाज के संरक्षण के लिए एक पहल
मुहिम में भागीदार बनने वालों को भूमि सुधार, सुरक्षा दीवार और टैंकों के निर्माण की योजनाएं स्वीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल(रोहड़ू) । कुपवी में मोटा अनाज की पैदावार से लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कुपवी ब्लाॅक में खंड विकास अधिकारी की ओर से शुरू की गई 'मोटा अनाज उगाओ, मनरेगा पाओ' योजना का सैकड़ों किसान लाभ उठा रहे है। कुपवी की 15 पंचायतों के 175 किसानों ने कोदा, बाजरा, चौलाई, कांवणी, जावरी, ओगला, चिनई आदि मोटे अनाज की पैदावार कर योजना का लाभ प्राप्त किया। कुपवी के बीडीओ अरविंद गुलेरिया ने विलुप्त हो रहे मोटे अनाज के संरक्षण के लिए यह योजना शुरू की। स्थानीय एफएसी और कृषि विभाग के सहयोग से किसानों को कोदा, बाजरा और अन्य मोटे अनाज उगाने पर भूमि विकास, सुरक्षा दीवार और वर्षा जल संचयन टैंक जैसी मनरेगा योजनाओं से प्रोत्साहित किया गया है। इस वर्ष इस योजना के काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। अब तक 175 किसानों को इस योजना के तहत एक करोड़ 33 लाख रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन योजनाओं में भूमि सुधार के लिए 85 किसानों को 75 लाख, सुरक्षा दीवार के लिए 70 किसानों को 40 लाख और टैंकों के निर्माण के लिए 20 किसानों को 18 लाख रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
गुलेरिया ने कहा कि स्थानीय एफएसी और कृषि विभाग के सहयोग से किसानों को कोदा, बाजरा व अन्य मोटे परंपरागत अनाज उगाने के लिए किसानों को भूमि विकास, सुरक्षा दीवार और वर्षा जल संचयन टैंक जैसी मनरेगा योजनाओं से प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा किसानों के उत्पाद को मार्किट तक पंहुचाने के लिए भी विकास खंड की ओर से प्रबंध करने का प्रयास है, ताकि किसानों की आर्थिकी भी सुदृढ़ हो सके। किसानों की ओर से तैयार उत्पादों को 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन' (एनआरएलएम) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बाजार में बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की 82 प्रतिशत भूमि वर्षा आधारित है और बदलती वैश्विक जलवायु से स्थानीय कृषि और खाद्य सुरक्षा को भी खतरा है।
बीडीओ अरविंद गुलेरिया की इस योजना से न केवल रोजगार की गारंटी को बढ़ावा मिला है, अपितु आज की पीढ़ी जिस मोटे अनाज के नाम तक से अनभिज्ञ हो चुकी है। उनके संरक्षण की दिशा में भी यह सराहनीय पहल है। इस योजना से मोटे अनाज के संरक्षण की दिशा में भविष्य में बेहतरीन संभावनाएं देखी जा रही है।
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- तुलसी राम जमालटा, प्रधान, कृषि सलाहकार समिति कुपवी खंड
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मुहिम में भागीदार बनने वालों को भूमि सुधार, सुरक्षा दीवार और टैंकों के निर्माण की योजनाएं स्वीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
चौपाल(रोहड़ू) । कुपवी में मोटा अनाज की पैदावार से लोग अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कुपवी ब्लाॅक में खंड विकास अधिकारी की ओर से शुरू की गई 'मोटा अनाज उगाओ, मनरेगा पाओ' योजना का सैकड़ों किसान लाभ उठा रहे है। कुपवी की 15 पंचायतों के 175 किसानों ने कोदा, बाजरा, चौलाई, कांवणी, जावरी, ओगला, चिनई आदि मोटे अनाज की पैदावार कर योजना का लाभ प्राप्त किया। कुपवी के बीडीओ अरविंद गुलेरिया ने विलुप्त हो रहे मोटे अनाज के संरक्षण के लिए यह योजना शुरू की। स्थानीय एफएसी और कृषि विभाग के सहयोग से किसानों को कोदा, बाजरा और अन्य मोटे अनाज उगाने पर भूमि विकास, सुरक्षा दीवार और वर्षा जल संचयन टैंक जैसी मनरेगा योजनाओं से प्रोत्साहित किया गया है। इस वर्ष इस योजना के काफी अच्छे परिणाम सामने आए हैं। अब तक 175 किसानों को इस योजना के तहत एक करोड़ 33 लाख रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन योजनाओं में भूमि सुधार के लिए 85 किसानों को 75 लाख, सुरक्षा दीवार के लिए 70 किसानों को 40 लाख और टैंकों के निर्माण के लिए 20 किसानों को 18 लाख रुपये की योजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
गुलेरिया ने कहा कि स्थानीय एफएसी और कृषि विभाग के सहयोग से किसानों को कोदा, बाजरा व अन्य मोटे परंपरागत अनाज उगाने के लिए किसानों को भूमि विकास, सुरक्षा दीवार और वर्षा जल संचयन टैंक जैसी मनरेगा योजनाओं से प्रोत्साहित किया गया है। इसके अलावा किसानों के उत्पाद को मार्किट तक पंहुचाने के लिए भी विकास खंड की ओर से प्रबंध करने का प्रयास है, ताकि किसानों की आर्थिकी भी सुदृढ़ हो सके। किसानों की ओर से तैयार उत्पादों को 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन' (एनआरएलएम) के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बाजार में बेचा जाएगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल की 82 प्रतिशत भूमि वर्षा आधारित है और बदलती वैश्विक जलवायु से स्थानीय कृषि और खाद्य सुरक्षा को भी खतरा है।
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बीडीओ अरविंद गुलेरिया की इस योजना से न केवल रोजगार की गारंटी को बढ़ावा मिला है, अपितु आज की पीढ़ी जिस मोटे अनाज के नाम तक से अनभिज्ञ हो चुकी है। उनके संरक्षण की दिशा में भी यह सराहनीय पहल है। इस योजना से मोटे अनाज के संरक्षण की दिशा में भविष्य में बेहतरीन संभावनाएं देखी जा रही है।
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- तुलसी राम जमालटा, प्रधान, कृषि सलाहकार समिति कुपवी खंड