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Rampur Bushahar News: हेरोइन मामले में आरोपी बरी, अभियोजन पक्ष संदेह साबित करने में विफल
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पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया
अदालत ने कहा कि कागजी कार्रवाई बाद में थाने में की गई प्रतीत होती है
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस दल दो फरवरी 2023 की रात 10.40 बजे गश्त पर था। नोगली के पास पावर हाउस लिंक रोड पर जितेंद्र को एक बैग के साथ देखा गया। पुलिस को देखकर वह घबरा गया और झाड़ियों में छिपाने की कोशिश की। तलाशी के दौरान उसके बैग से 18.21 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने 11 गवाहों की जांच की। अदालत ने पाया कि गश्ती दल में पांच पुलिसकर्मी थे, लेकिन तस्वीरों में केवल तीन दिख रहे थे। पुलिस वाहन भी तस्वीरों में मौजूद नहीं था, जबकि पूरी कार्रवाई वाहन की हेडलाइट में होने का दावा किया गया। चालक को गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि तस्वीरों से तारीख और समय जानबूझकर हटाया गया था। जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि दस्तावेज हवलदार ने लिखे थे, लेकिन इस बात का कोई नोट नहीं था कि यह उनके निर्देश पर किया गया। नोगली एक व्यस्त जगह है जहां कई घर और दुकानें हैं। इसके बावजूद, पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। उच्चतम न्यायालय ने कृष्ण चंद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में कहा था कि स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करना अभियोजन के मामले को कमजोर करता है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी सरवन दास बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में इसी तरह की टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि कागजी कार्रवाई बाद में थाने में की गई प्रतीत होती है। एनसीबी फॉर्म में बरामदगी का समय दो फरवरी 2023 की रात 11.10 बजे के बजाय तीन फरवरी 2023 की रात 12.10 बजे दर्ज था। हेड कांस्टेबल ने निजी वाहन से थाने आने-जाने की बात स्वीकार की। जबकि स्वतंत्र गवाहों के लिए निजी वाहन उपलब्ध नहीं थे। आधिकारिक वाहन के लॉग बुक में भी दो फरवरी 2023 की कोई प्रविष्टि नहीं थी। इन सभी विसंगतियों के कारण अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले को संदेह से परे नहीं माना। जितेंद्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
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अदालत ने कहा कि कागजी कार्रवाई बाद में थाने में की गई प्रतीत होती है
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। विशेष न्यायाधीश की अदालत ने चिट्टा (हेरोइन) बरामदगी मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपना मामला साबित करने में विफल रहा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस दल दो फरवरी 2023 की रात 10.40 बजे गश्त पर था। नोगली के पास पावर हाउस लिंक रोड पर जितेंद्र को एक बैग के साथ देखा गया। पुलिस को देखकर वह घबरा गया और झाड़ियों में छिपाने की कोशिश की। तलाशी के दौरान उसके बैग से 18.21 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पुलिस ने 11 गवाहों की जांच की। अदालत ने पाया कि गश्ती दल में पांच पुलिसकर्मी थे, लेकिन तस्वीरों में केवल तीन दिख रहे थे। पुलिस वाहन भी तस्वीरों में मौजूद नहीं था, जबकि पूरी कार्रवाई वाहन की हेडलाइट में होने का दावा किया गया। चालक को गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि तस्वीरों से तारीख और समय जानबूझकर हटाया गया था। जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि दस्तावेज हवलदार ने लिखे थे, लेकिन इस बात का कोई नोट नहीं था कि यह उनके निर्देश पर किया गया। नोगली एक व्यस्त जगह है जहां कई घर और दुकानें हैं। इसके बावजूद, पुलिस ने किसी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। उच्चतम न्यायालय ने कृष्ण चंद बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में कहा था कि स्वतंत्र गवाहों को शामिल न करना अभियोजन के मामले को कमजोर करता है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी सरवन दास बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में इसी तरह की टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा कि कागजी कार्रवाई बाद में थाने में की गई प्रतीत होती है। एनसीबी फॉर्म में बरामदगी का समय दो फरवरी 2023 की रात 11.10 बजे के बजाय तीन फरवरी 2023 की रात 12.10 बजे दर्ज था। हेड कांस्टेबल ने निजी वाहन से थाने आने-जाने की बात स्वीकार की। जबकि स्वतंत्र गवाहों के लिए निजी वाहन उपलब्ध नहीं थे। आधिकारिक वाहन के लॉग बुक में भी दो फरवरी 2023 की कोई प्रविष्टि नहीं थी। इन सभी विसंगतियों के कारण अदालत ने अभियोजन पक्ष के मामले को संदेह से परे नहीं माना। जितेंद्र को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।