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प्रदेश में वाहनों के भी बनेंगे फूड लाइसेंस
Rampur
Updated Wed, 06 Mar 2013 05:31 AM IST
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रामपुर बुशहर। प्रदेश में दूध, दहीं और ब्रैड सहित अन्य खाद्य सामग्री की सप्लाई करने वाले वाहनों को भी फूड लाइसेंस लेना जरूरी कर दिए गए है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम में साफ किया गया है कि जो भी वाहन खाद्य सामग्री की सप्लाई कर रहे है, उनके लाइसेंस बनाने होंगे। ऐसा न करने पर वाहन मालिक के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड एक्ट के तहत मामला दर्ज किए जाएगा।
प्रदेश में दूध, दही, पनीर सहित अन्य खाद्य सामग्री सप्लाई करनी अब आसान नहीं होगी। किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री की सप्लाई करने से पहले गाड़ियों के मालिकों को भी फूड लाइसेंस लेने होंगे। वाहन मालिकों को बताना होगा की उनकी गाड़ियां केवल खाद्य सामग्री की ही सप्लाई कर रही है। खाद्य सुरक्षा अधिनियिम के तहत बताए गए सभी नियमों का पालन कर रही है।
खाद्य सामग्री की सप्लाई करने वाली गाड़ियों पर नजर रखने के लिए सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निदेशालय की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए है। इधर, इस बारे में निदेशक फूड सेफ्टी एंड रेगुलेशन अशोक शर्मा ने बताया कि एक्ट के तहत वाहनाें के लिए भी फूड लाइसेंस लेना जरूरी किए गए है। लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं हो सके। खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र चौहान का कहना है कि एक्ट के तहत बिना लाइसेंस के काम करने पर पकड़े जाने पर पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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क्या होता था पहले
इसके पहले ट्रांसपोर्ट की किसी भी गाड़ी में खाद्य सामग्री की सप्लाई की जा सकती थी। ऐसे में मिलावट का काला कारोबार करने वाले व्यापारी छुपा कर मिलावटी खाद्य सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे। लाइसेंस बनने के बाद इस तरह के मामलों पर रोक लगेगी।
प्रदेश में दूध, दही, पनीर सहित अन्य खाद्य सामग्री सप्लाई करनी अब आसान नहीं होगी। किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री की सप्लाई करने से पहले गाड़ियों के मालिकों को भी फूड लाइसेंस लेने होंगे। वाहन मालिकों को बताना होगा की उनकी गाड़ियां केवल खाद्य सामग्री की ही सप्लाई कर रही है। खाद्य सुरक्षा अधिनियिम के तहत बताए गए सभी नियमों का पालन कर रही है।
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खाद्य सामग्री की सप्लाई करने वाली गाड़ियों पर नजर रखने के लिए सभी खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निदेशालय की ओर से आदेश भी जारी कर दिए गए है। इधर, इस बारे में निदेशक फूड सेफ्टी एंड रेगुलेशन अशोक शर्मा ने बताया कि एक्ट के तहत वाहनाें के लिए भी फूड लाइसेंस लेना जरूरी किए गए है। लोगों के स्वास्थ्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं हो सके। खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र चौहान का कहना है कि एक्ट के तहत बिना लाइसेंस के काम करने पर पकड़े जाने पर पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
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क्या होता था पहले
इसके पहले ट्रांसपोर्ट की किसी भी गाड़ी में खाद्य सामग्री की सप्लाई की जा सकती थी। ऐसे में मिलावट का काला कारोबार करने वाले व्यापारी छुपा कर मिलावटी खाद्य सामग्री एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते थे। लाइसेंस बनने के बाद इस तरह के मामलों पर रोक लगेगी।