{"_id":"5a4a3be34f1c1bb34a8b9914","slug":"71514814435-rampur-bushahar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"न लाडा राशि दी, न ही नौकरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न लाडा राशि दी, न ही नौकरी
Updated Mon, 01 Jan 2018 10:15 PM IST
विज्ञापन
लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रामपुर बुशहर। करेरी समल हाइड्रो पावर परियोजना ने न तो लाडा की राशि जमा की और न ही प्रभावितों के लिए कोई योजना बनाई है। इससे क्षेत्र के लोगों में कंपनी के प्रति काफी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना का निर्माण कार्य शुरू हुए दो माह हो चुके हैं। लेकिन प्रोजेक्ट प्रबंधन की तरफ से प्रभावितों के लिए कोई भी योजना व अन्य जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है।
ग्रामीणों ने सोमवार को किसान सभा के बैनर तले एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। जिला परिषद सदस्य दलीप कायथ ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों के पास कृषि व वन भूमि बहुत कम है। चारागाह, जड़ी-बूटियां और प्राकृतिक जल स्रोतों पर परियोजना निर्माण से बुरा असर पड़ेगा। परियोजना प्रबंधन से भी कई बार बात की गई। लेकिन प्रबंधन की ओर से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग पत्र में कहा कि लाडा राशि के तहत परियोजना का काम शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्र में पहली किश्त का दस फीसदी जमा करवाना चाहिए थी। इसके अतिरिक्त प्रभावित गांव के बेरोजगार युवाओं को परियोजना में स्थायी और अस्थायी रोजगार देने की योजना पहले सार्वजनिक करनी चाहिए थी। सिंचाई के पानी की व्यवस्था करवाने में प्रोजेक्ट प्रबंधन क्या कार्य करेगा इस पर भी स्थिति पहले ही स्पष्ट होनी चाहिए। इस दौरान दिला राम, राजेंद्र सिंह, सुभाष आदि पूर्ण, राजकुमार, कृष्ण, सुंधीर, मोहन, सुनीता, बसंत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
ये कार्य होते हैं लाडा के तहत
लाडा के तहत सेरी पुल से प्रभावित गांव तक सड़क का निर्माण करना, प्रभावित गांव में वर्षा शालिका, पक्के रास्ते, महिला मंडल, युवक मंडल और स्कूल भवन का निर्माण, खेल मैदान, मंदिरों की मरम्मत, सिंचाई पानी के टैंक की व्यवस्था और निजी भवनों को परियोजना निर्माण से हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजा देना शामिल है। साथ ही भारी विस्फोटकों का प्रयोग बंद करना, फसलों नुकसान का मुआवजा, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना, भूमि कटाव की रोकथाम और परियोजना की आय का एक फीसद रॉयलटी के रूप में देना आदि शामिल है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ग्रामीणों ने सोमवार को किसान सभा के बैनर तले एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। जिला परिषद सदस्य दलीप कायथ ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीणों के पास कृषि व वन भूमि बहुत कम है। चारागाह, जड़ी-बूटियां और प्राकृतिक जल स्रोतों पर परियोजना निर्माण से बुरा असर पड़ेगा। परियोजना प्रबंधन से भी कई बार बात की गई। लेकिन प्रबंधन की ओर से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग पत्र में कहा कि लाडा राशि के तहत परियोजना का काम शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्र में पहली किश्त का दस फीसदी जमा करवाना चाहिए थी। इसके अतिरिक्त प्रभावित गांव के बेरोजगार युवाओं को परियोजना में स्थायी और अस्थायी रोजगार देने की योजना पहले सार्वजनिक करनी चाहिए थी। सिंचाई के पानी की व्यवस्था करवाने में प्रोजेक्ट प्रबंधन क्या कार्य करेगा इस पर भी स्थिति पहले ही स्पष्ट होनी चाहिए। इस दौरान दिला राम, राजेंद्र सिंह, सुभाष आदि पूर्ण, राजकुमार, कृष्ण, सुंधीर, मोहन, सुनीता, बसंत सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
विज्ञापन
ये कार्य होते हैं लाडा के तहत
लाडा के तहत सेरी पुल से प्रभावित गांव तक सड़क का निर्माण करना, प्रभावित गांव में वर्षा शालिका, पक्के रास्ते, महिला मंडल, युवक मंडल और स्कूल भवन का निर्माण, खेल मैदान, मंदिरों की मरम्मत, सिंचाई पानी के टैंक की व्यवस्था और निजी भवनों को परियोजना निर्माण से हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजा देना शामिल है। साथ ही भारी विस्फोटकों का प्रयोग बंद करना, फसलों नुकसान का मुआवजा, पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करना, भूमि कटाव की रोकथाम और परियोजना की आय का एक फीसद रॉयलटी के रूप में देना आदि शामिल है।
विज्ञापन