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सी-ग्रेड सेब खरीद पर 30 बोरी की सीमा अन्यायपूर्ण : बरागटा
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बोले- बागवानी विभाग समय पर दवाइयां नहीं करवा पा रहा उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। एमआईएस के तहत बागवानों से सी-ग्रेड सेब की खरीद अधिकतम 30 बोरी तक सीमित किए जाने के निर्णय पर भाजपा आईटी एवं सोशल मीडिया सेल के प्रदेश प्रभारी चेतन बरागटा ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के हजारों बागवानों के हितों के खिलाफ है।
बरागटा ने कहा कि इस वर्ष बागवान पहले ही ओलावृष्टि, बागीचों में फैली बीमारियों और समय से पहले पतझड़ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन परिस्थितियों के कारण बड़ी मात्रा में सेब सी-ग्रेड श्रेणी में पहुंच गया है। ऐसे में यदि एचपीएमसी केवल 30 बोरी तक ही सी-ग्रेड सेब खरीदेगी, तो अतिरिक्त उपज बागवान कहां बेचेंगे। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि बागवानी विभाग भी समय पर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिससे बागवानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। बरागटा ने सरकार से बागवानों के लंबित भुगतान जल्द जारी करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सी-ग्रेड सेब की खरीद को 30 बोरी तक सीमित करने की बाध्यता उचित नहीं है।
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कोटखाई (रोहड़ू)। एमआईएस के तहत बागवानों से सी-ग्रेड सेब की खरीद अधिकतम 30 बोरी तक सीमित किए जाने के निर्णय पर भाजपा आईटी एवं सोशल मीडिया सेल के प्रदेश प्रभारी चेतन बरागटा ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के हजारों बागवानों के हितों के खिलाफ है।
बरागटा ने कहा कि इस वर्ष बागवान पहले ही ओलावृष्टि, बागीचों में फैली बीमारियों और समय से पहले पतझड़ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इन परिस्थितियों के कारण बड़ी मात्रा में सेब सी-ग्रेड श्रेणी में पहुंच गया है। ऐसे में यदि एचपीएमसी केवल 30 बोरी तक ही सी-ग्रेड सेब खरीदेगी, तो अतिरिक्त उपज बागवान कहां बेचेंगे। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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उन्होंने आरोप लगाया कि बागवानी विभाग भी समय पर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिससे बागवानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। बरागटा ने सरकार से बागवानों के लंबित भुगतान जल्द जारी करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सी-ग्रेड सेब की खरीद को 30 बोरी तक सीमित करने की बाध्यता उचित नहीं है।
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