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बाहवा पंचायत में दस साल से जल संकट
Updated Wed, 31 Jan 2018 09:48 PM IST
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ब्रौ (रामपुर बुशहर)। निरमंड खंड की बाहवा पंचायत के हजारों लोग करीब दस साल से पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि पंचायत क्षेत्र के चार गांव में जल संकट है। आईपीएच विभाग ग्रामीणों को पर्याप्त व समय पर पेयजल सप्लाई देने में नाकाम साबित हो रहा है। ग्रामीणों को विभाग आठ दिन में एक बार पेयजल आपूर्ति देता है। लेकिन यह आपूर्ति मात्र 15 मिनट तक ही मिल पाती है। कई ग्रामीणों तक तो यह पानी पहुंच भी नहीं सकता। लोगों को टैंकर से 700 रुपये में 500 लीटर पानी खरीदना पड़ रहा है।
बाहवा पंचायत में पहले लोग प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझा रहे थे। लेकिन रामपुर जल विद्युत परियोजना के निर्माण के बाद क्षेत्र के सभी जल स्रोत सूख गए हैं। ऐेस में ग्रामीण पेयजल किल्लत झेल रहे हैं। प्रभावित पंचायत को अन्य पंचायतों की तर्ज पर चार करोड़ रुपये से पेयजल योजना का निर्माण किया जा रहा था। लेकिन करीब 10 साल से यह काम अधर में है। लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। पंचायत के बाहवा, शटलधार, जडोली और चंभू गांव में वर्षों से लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। बाहवा पंचायत के परस राम, नीरथ सिंह, लाल चंद, दौलत राम, जयशील पुजारी, बुद्धराम, किरत राम, योगराज, फूला देवी, ममता देवी, रीता देवी, आरती, कांता देवी, श्याम देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे जल संकट से परेशान हैं। पैसे देकर पानी खरीद रहे पर कोई उनकी सुध नहीं ले रहा है। इस बारे में आईपीएच विभाग को बार-बार शिकायत की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाई है। पंचायत प्रधान बाहवा रामचंद्र जोशी का कहना है कि पेयजल समस्या को लेकर पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिल चुका है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को भी जल्द इस समस्या को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
जल स्रोत में पानी की गिरावट से समस्या
आईपीएच विभाग निरमंड के एसडीएम नवल किशोर का कहना है कि पेयजल स्रोत में पानी की आपूर्ति 50 से 60 प्रतिशत तक घट गई है, जिस कारण समस्या हो रही है। ग्रामीणों को चार दिन बाद पेयजल आपूर्ति दी जा रही है।
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बाहवा पंचायत में पहले लोग प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझा रहे थे। लेकिन रामपुर जल विद्युत परियोजना के निर्माण के बाद क्षेत्र के सभी जल स्रोत सूख गए हैं। ऐेस में ग्रामीण पेयजल किल्लत झेल रहे हैं। प्रभावित पंचायत को अन्य पंचायतों की तर्ज पर चार करोड़ रुपये से पेयजल योजना का निर्माण किया जा रहा था। लेकिन करीब 10 साल से यह काम अधर में है। लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। पंचायत के बाहवा, शटलधार, जडोली और चंभू गांव में वर्षों से लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। बाहवा पंचायत के परस राम, नीरथ सिंह, लाल चंद, दौलत राम, जयशील पुजारी, बुद्धराम, किरत राम, योगराज, फूला देवी, ममता देवी, रीता देवी, आरती, कांता देवी, श्याम देवी सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे जल संकट से परेशान हैं। पैसे देकर पानी खरीद रहे पर कोई उनकी सुध नहीं ले रहा है। इस बारे में आईपीएच विभाग को बार-बार शिकायत की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाई है। पंचायत प्रधान बाहवा रामचंद्र जोशी का कहना है कि पेयजल समस्या को लेकर पंचायत का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिल चुका है। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को भी जल्द इस समस्या को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
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जल स्रोत में पानी की गिरावट से समस्या
आईपीएच विभाग निरमंड के एसडीएम नवल किशोर का कहना है कि पेयजल स्रोत में पानी की आपूर्ति 50 से 60 प्रतिशत तक घट गई है, जिस कारण समस्या हो रही है। ग्रामीणों को चार दिन बाद पेयजल आपूर्ति दी जा रही है।
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