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झील के दायरे में खडे किए बिजली के टावर बनेगे टीसीएल के गले का फांस
Updated Thu, 22 Nov 2018 10:03 PM IST
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बिना जमीन अधिग्रहण किए
खड़े कर दिए बिजली के टावर
सावड़ा कुड्डू विद्युत परियोजना की डैम साइट का मामला
आरोप-झील के दायरे में टावर खड़े कर पुराना सर्वे बदला
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। सावड़ा कुड्डू परियोजना की हाटकोटी में बनने वाली झील के दायरे में खड़े किए गए बिजली के टावर प्रदेश ट्रांसमिशन कारपोरेशन के गले की फांस बनने वाले हैं। लोगों को आरोप है कि नियमों को ताक पर रख कर अधिकारियों की मिली भगत से झील के दायरे में टावर खड़े कर पुराना सर्वे बदला गया है। पानी के अंदर आने वाली भूमि पर जहां बिजली के टावर खड़े किए गए हैं, उस भूमि का अधिग्रहण तक नहीं हुआ है।
हिमाचल ट्रांसमिशन कारपोरेशन ने टावर लगाने की अनुमिति वन विभाग की ओर से दूसरी जगह पर ली गई है। सर्वे के अनुसार टावर लाइन नेशलन हाईवे से ऊपर पहाड़ी की ओर बननी थी। टीसीएल टावर लाइन अब सड़क से नीचे नदी के साथ पांच सौ मीटर की दूरी पर खड़ी कर रहा है। वन विभाग की ओर से भी अभी तक इस मामले को अनदेखा किया गया। राजस्व विभाग के पास भी भू अधिग्रहण का कोई ब्योरा नहीं हैं।
जानकारों के अनुसार टावर लाईन लगाने के लिए सर्वे के अनुसार भूमि का चयन करने के बाद वन विभाग से अनुमति लेनी होती है। यदि सर्वे को बदला जाए तो सर्वे रिवाइज की रिपोर्ट में दोबारा अनुमिति लेनी होती है। टावर कार्डिनेशन रिपोर्ट के आधार पर बनाए जाते हैं। उसके बाद टावर लाइन खड़ा करने से पहले भूमि का अधिग्रहण किया जाता है। जिस स्थान पर दो टावर झील के दायरे में खड़े किए गए वहां झील के दायरे से पांच मीटर की ऊंचाई तक किसी भी निर्माण कार्य और टावर को लगाने की अनुमति नहीं होती है। जिस भूमि पर टावर खड़े किए गए हैं उस भूमि का झील के नाम पर अधिग्रहण हुआ है। इसके आसपास दर्जनों पेड़ों और फलदार पौधों की झील बनाने के नाम पर बलि दी गई। अब वहां पर खड़े टावर टीसीएल की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं पंचायत के प्रधान सुभाष पांटा, घुंसा गांव निवासी निक्की बाल्टू, प्रदीप बाल्टू सहित ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को भेजी है। इस मामले को अब न्यायालय में चुनौती देने का ऐलान कर दिया है।
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डीएफओ रोहडू सीबी चंदू तहशीलदार ने मामले से अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि एनवायरमेंट और फारेस्ट क्लीयरेंस उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से दी जाती है। एसडीएम बीआर शर्मा ने बताया कि टीसीएल की ओर से टावर के लिए कोई भू अधिग्रहण का मामला उनके पास नहीं आया। उन्होंने लोगों की भूमि अपने स्तर पर खरीद की होगी।
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खड़े कर दिए बिजली के टावर
सावड़ा कुड्डू विद्युत परियोजना की डैम साइट का मामला
आरोप-झील के दायरे में टावर खड़े कर पुराना सर्वे बदला
अमर उजाला ब्यूरो
रोहड़ू। सावड़ा कुड्डू परियोजना की हाटकोटी में बनने वाली झील के दायरे में खड़े किए गए बिजली के टावर प्रदेश ट्रांसमिशन कारपोरेशन के गले की फांस बनने वाले हैं। लोगों को आरोप है कि नियमों को ताक पर रख कर अधिकारियों की मिली भगत से झील के दायरे में टावर खड़े कर पुराना सर्वे बदला गया है। पानी के अंदर आने वाली भूमि पर जहां बिजली के टावर खड़े किए गए हैं, उस भूमि का अधिग्रहण तक नहीं हुआ है।
हिमाचल ट्रांसमिशन कारपोरेशन ने टावर लगाने की अनुमिति वन विभाग की ओर से दूसरी जगह पर ली गई है। सर्वे के अनुसार टावर लाइन नेशलन हाईवे से ऊपर पहाड़ी की ओर बननी थी। टीसीएल टावर लाइन अब सड़क से नीचे नदी के साथ पांच सौ मीटर की दूरी पर खड़ी कर रहा है। वन विभाग की ओर से भी अभी तक इस मामले को अनदेखा किया गया। राजस्व विभाग के पास भी भू अधिग्रहण का कोई ब्योरा नहीं हैं।
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जानकारों के अनुसार टावर लाईन लगाने के लिए सर्वे के अनुसार भूमि का चयन करने के बाद वन विभाग से अनुमति लेनी होती है। यदि सर्वे को बदला जाए तो सर्वे रिवाइज की रिपोर्ट में दोबारा अनुमिति लेनी होती है। टावर कार्डिनेशन रिपोर्ट के आधार पर बनाए जाते हैं। उसके बाद टावर लाइन खड़ा करने से पहले भूमि का अधिग्रहण किया जाता है। जिस स्थान पर दो टावर झील के दायरे में खड़े किए गए वहां झील के दायरे से पांच मीटर की ऊंचाई तक किसी भी निर्माण कार्य और टावर को लगाने की अनुमति नहीं होती है। जिस भूमि पर टावर खड़े किए गए हैं उस भूमि का झील के नाम पर अधिग्रहण हुआ है। इसके आसपास दर्जनों पेड़ों और फलदार पौधों की झील बनाने के नाम पर बलि दी गई। अब वहां पर खड़े टावर टीसीएल की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं पंचायत के प्रधान सुभाष पांटा, घुंसा गांव निवासी निक्की बाल्टू, प्रदीप बाल्टू सहित ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को भेजी है। इस मामले को अब न्यायालय में चुनौती देने का ऐलान कर दिया है।
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डीएफओ रोहडू सीबी चंदू तहशीलदार ने मामले से अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि एनवायरमेंट और फारेस्ट क्लीयरेंस उपायुक्त कार्यालय के माध्यम से दी जाती है। एसडीएम बीआर शर्मा ने बताया कि टीसीएल की ओर से टावर के लिए कोई भू अधिग्रहण का मामला उनके पास नहीं आया। उन्होंने लोगों की भूमि अपने स्तर पर खरीद की होगी।