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दो सो प्रभावित परिवारों को नहीं मिला रॉयल्टी का एक फीसदी हिस्सा
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अमर उजाला ब्यूरो
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रामपुर बुशहर। 412 मेगावाट रामपुर हाइड्रो परियोजना के लगभग 200 प्रभावित किसानों ने रॉयल्टी का 1 प्रतिशत हिस्सा न मिलने पर उच्च न्यायालय में रिट पिटीशन दायर की है। श्री दत्तात्रेय स्वामी पर्यावरण एवं किसान विकास समिति की अगुआई में प्रभावितों की ओर से दायर की गई रिट पिटीशन को उच्च न्यायालय ने स्वीकार करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार को 1 मई 2019 तक जवाब फाइल करने के आदेश जारी कर लिए हैं।
दत्तात्रेय स्वामी पर्यावरण एवं किसान विकास समिति के कानूनी सलाहकार ऋषि राम भलैक ने कहा कि परियोजना प्रभावित लगभग 200 किसान परिवार ऐसे हैं, जिन्हें परियोजना के राजस्व से मिलने वाली 1 प्रतिशत रॉयल्टी राशि का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। इनमें से ज्यादातर किसान परिवार ऐसे हैं, जिनकी जमीन तो परियोजना प्रभावित क्षेत्र में है, लेकिन वे रहते दूसरी जगह है। प्रभावित किसानों ने कई बाद इस राशि के भुगतान के लिए परियोजना प्रबंधन वर्ग से बात की, लेकिन उनकी मांग को दरकिनार कर उन्हें अभी तक इस राशि से वंचित रखा गया है।
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प्रभावितों ने मजबूरन अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। प्रभावितों ने प्रभावित राजस्व चक में सभी बंदोबस्त अधिकार पात्रता वाले राजस्व विभाग में दर्ज भूस्वामी परिवारों को 1 प्रतिशत रॉयल्टी भुगतान के लिए अनुमोदित सूची में शामिल करने की मांग उठाई है। साथ ही प्रभावितों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की ऊर्जा नीति में संशोधन किया जाए जिससे तमाम परियोजना प्रभावित क्षेत्र में भू-स्वामी परिवारों को लाभ मिल सके।
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1 मई तक फाइल करना होगा जवाब
उच्च न्यायालय के माननीय चीफ जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस संदीप शर्मा ने सीडब्ल्यूपी नंबर 47 ऑफ 2019 दिनांक 11 मार्च 2019 को आदेश जारी कर हिमाचल प्रदेश सरकार को 1 मई 2019 तक जवाब फाइल करने को कहा है। उच्च न्यायालय के दखल के बाद प्रभावितों में आस जगी है कि अब जल्द ही उन्हें रॉयल्टी की राशि मिलेगी।
न्यायालय के फैसले का स्वागत किया
श्री दत्तात्रेय स्वामी पर्यावरण एवं किसान विकास समिति के अध्यक्ष मोहन सिंह ठाकुर, सचिव अश्वनी चौहान, कोषाध्यक्ष शिवलाल गुप्ता, कानूनी सलाहकार ऋषि राम भलैक, अशोक ठाकुर, लाल चंद कौशल, संजीव जिष्टू, नुपा राम, कैलाश शर्मा, दर्शन दास सहित अन्य प्रभावितों ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई कि जल्द ही प्रभावितों की मांगें पूरी होंगी।