फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   लचर स्वास्थ्य सेवाएं के खिलाफ नेरवा अस्पताल के बाहर लोगों ने की नारेबाजी

लचर स्वास्थ्य सेवाएं के खिलाफ नेरवा अस्पताल के बाहर लोगों ने की नारेबाजी

Sun, 24 Feb 2019 09:43 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 24 Feb 2019 09:43 PM IST
विज्ञापन
नेरवा से शिमला रेफर बच्चे की
विज्ञापन

मौत पर लोगों ने किया प्रदर्शन
लचर स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ नेरवा अस्पताल के बाहर की नारेबाजी
अमर उजाला ब्यूरो
नेरवा(रोहड़ू)। नेरवा अस्पताल में लचर स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सकों के व्यवहार से परेशान लोगों ने रविवार को नेरवा अस्पताल के बाहर जमकर नारेबाजी की। लोगों का आरोप है कि अस्पताल में तैनात चिकित्सक मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ ठीक से व्यवहार नहीं करते हैं। अस्पताल में आपातकाल के समय 108 एंबुलेंस की सेवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। इस कारण रविवार को नेरवा अस्पताल से आईजीएमसी शिमला रेफर किए चार माह के बच्चे की रास्ते में ही मौत हो गई।
नेरवा अस्पताल से शिमला रेफर बच्चे की मौत के बाद रविवार को लोगों का गुस्सा अस्पताल प्रशासन पर फूटा। रविवार को लोगों ने नेरवा अस्पताल के बाहर अस्पताल प्रबंधन और मामले में कोताही बरतने वाली एक चिकित्सक और 108 एंबुलेंस प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। लोगों ने बच्चे की मौत मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। इस संदर्भ में लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल तहसीलदार नेरवा ऋषभ शर्मा से मिला और उनके माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपकर मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच करने की मांग उठाई।
विज्ञापन

नेरवा के भरटो निवासी बलदेव चौहान ने बताया कि वे अपने चार माह के बीमार बच्चे को अन्य परिजनों के साथ नेरवा अस्पताल लेकर आया था। नेरवा अस्पताल से बच्चे को शिमला रेफर किया गया, लेकिन शिमला ले जाते रास्ते में देहा के पास बच्चे की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में न तो उन्हें 108 सेवा मिल पाई न ही ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक समय पर अस्पताल पहुंची। चिकित्सक के समय पर अस्पताल न आने पर परिजनों ने इसकी शिकायत खंड चिकित्सा अधिकारी नेरवा से भी की। खंड चिकित्सा अधिकारी को शिकायत करने के बाद ही चिकित्सक अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल पहुंचने पर भी चिकित्सक का रवैया नकारात्मक ही रहा। बच्चे को आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया, लेकिन आपात स्थिति में उन्हें 108 सेवा अस्पताल उपलब्ध नहीं हुई। इस कारण वे एक निजी वाहन और ऑक्सीजन का इंतजाम कर बच्चे को शिमला ले गए, लेकिन देहा के समीप ऑक्सीजन समाप्त होने के कारण बच्चे ने प्राण त्याग दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

नेरवा निवासी बबिता तंगड़ाइक ने भी इस चिकित्सक के खिलाफ आरोप लगाते हुए कहा कि वह शुक्रवार कि रात अपनी बहन को लेकर नेरवा अस्पताल गई थी। अस्पताल में तैनात स्टाफ ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक को बुलाया, लेकिन चिकित्सक ने फोन पर अस्पताल स्टाफ को निर्देश देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली। जब चिकित्सक को मरीज को रेफर करने के लिए कहा गया तो उसने कहा कि मरीज की रेफर स्लिप सुबह आठ बजे ही मिल पाएगी। चिकित्सक से इस तरह का जवाब मिलने पर परिजनों को मजबूरन मरीज कि गंभीर हालत को देखते हुए उसे शिमला लेकर जाना पड़ा। खंड चिकित्सा अधिकारी नेरवा डा. सुनील नेगी ने बताया कि मामले की उनके पास शिकायत आई है। इस संबंध में जांच के बाद ही आगामी कार्रवाई अमल में जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed