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बर्फ के गोले मारकर हुआ देवता का अभिनंदन
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तीन दिन तक चला अनूठा
फाग मेला धूमधाम से संपन्न
बर्फ के गोले मारकर हुआ देवता का अभिनंदन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। छौहारा विकास खंड के सबसे दुर्गम गांव जांगलिख में अनूठा फाग मेला धूमधाम से संपन्न हो गया है। बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला मेला तीन दिनों तक चला। बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करने की अनोखी परंपरा मेले का मुख्य आकर्षण रही।
देवता साहिब जाख के आह्वान पर आयोजित हुए फाग मेले के समापन के साथ ही देवता साहित जाख अपने मंदिर की ओर से प्रस्थान कर चुके हैं। मेले के अंतिम दिन देवता साहिब जाख के मंदिर पर बर्फ के गोले दागने की परंपरा मुख्य आकर्षण रही। विशेष रुप से बैतियानी गांव के लोग ने पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पर बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन किया। मेले में तीन दिनों तक मेहमान नवाजी का दौर चलता रहा। मेहमानों की खातिरदारी पारंपरिक एवं अनूठे व्यंजनों से की गई। मेले की परंपरा है कि गांव के ग्रामीण एक दूसरे के घरों में जाकर मेहमानवाजी करते हैं। तीन दिनों तक यह सिलसिला चलता है। दिन भर स्थानीय लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर थिरकते हैं। जांगलिख के साथ-साथ गोक्सवाड़ी, तांगणू, पेखा व दिऊदी गांव में भी पारंपरिक फाग मेला संपन्न हो गया है।
देवता साहिब जाख जागंलखि के मोतमीन रोशन लाल ने बताया कि फाग मेला कई सदियों से उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला मेला सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। मेले के आयोजन देवता साहिब जाख के आवाहन पर किया जाता है।
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फाग मेला धूमधाम से संपन्न
बर्फ के गोले मारकर हुआ देवता का अभिनंदन
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। छौहारा विकास खंड के सबसे दुर्गम गांव जांगलिख में अनूठा फाग मेला धूमधाम से संपन्न हो गया है। बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला मेला तीन दिनों तक चला। बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन करने की अनोखी परंपरा मेले का मुख्य आकर्षण रही।
देवता साहिब जाख के आह्वान पर आयोजित हुए फाग मेले के समापन के साथ ही देवता साहित जाख अपने मंदिर की ओर से प्रस्थान कर चुके हैं। मेले के अंतिम दिन देवता साहिब जाख के मंदिर पर बर्फ के गोले दागने की परंपरा मुख्य आकर्षण रही। विशेष रुप से बैतियानी गांव के लोग ने पारंपरिक वेशभूषा में मंदिर पर बर्फ के गोले मारकर देवता का अभिनंदन किया। मेले में तीन दिनों तक मेहमान नवाजी का दौर चलता रहा। मेहमानों की खातिरदारी पारंपरिक एवं अनूठे व्यंजनों से की गई। मेले की परंपरा है कि गांव के ग्रामीण एक दूसरे के घरों में जाकर मेहमानवाजी करते हैं। तीन दिनों तक यह सिलसिला चलता है। दिन भर स्थानीय लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर थिरकते हैं। जांगलिख के साथ-साथ गोक्सवाड़ी, तांगणू, पेखा व दिऊदी गांव में भी पारंपरिक फाग मेला संपन्न हो गया है।
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देवता साहिब जाख जागंलखि के मोतमीन रोशन लाल ने बताया कि फाग मेला कई सदियों से उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाला मेला सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। मेले के आयोजन देवता साहिब जाख के आवाहन पर किया जाता है।
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