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बिजली कानून संशोधन विधेयक 201
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बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 का विरोध
बिजली बोर्ड कर्मचारियों और अभियंताओं ने किया प्रदर्शन
कहा-विधेयक पास होने से उपभोक्ताओं को होगा नुकसान
पुरानी पेंशन जल्द से जल्द बहाल करे सरकार : जिष्टू
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। राष्ट्रीय बिजली कर्मचारी एवं अभियंताओं की समन्वय समिति के आह्वान पर बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। यह बिल 2019 के संसद में शीतकालीन अधिवेशन के दौरान पास होने के लिए रखा जाना है। बिजली बोर्ड कर्मचारियों और अभियंताओं ने रामपुर वृत्त कार्यालय परिसर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को आनी, निरमंड, कुमासैन, ननखड़ी, रामपुर और किन्नौर के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
कर्मचारियों ने पुराना बस स्टैंड पर जनसभा की और नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय परिसर में पहुंचे। प्रदर्शन के बाद उन्होंने मांगों को लेकर एसडीएम रामपुर नरेंद्र चौहान को ज्ञापन सौंपा। वहीं उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति और पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की भी मांग रखी। ज्ञापन में कहा कि विधेयक के पास होने से घरेलू उपभोक्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ जाने से बिजली की सब्सिडी समाप्त होने से घरेलू उपभोक्ताओं को भारी बिल चुकाने पड़ेंगे। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देेनजर दुर्गम इलाकों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसे क्रॉस सब्सिडी से कम किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक उपकरणों और बिजली के फीडरों को अलग करने का खर्चा भी उपभोक्ताओं से ही वसूला जाएगा।
यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज जिष्टू के अनुसार सरकार बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 को 2019 के संसद में शीतकालीन अधिवेशन में पास होने के लिए रखा जाना है, जिसका कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि 48 कैटागिरी के कर्मचारियों की जो ग्रेड पे कम की गई है, उसे फिर से बहाल किया जाए। जल्द ही उपरोक्त मांगों पर सरकार गौर नहीं करेगी तो उन्हें राष्ट्रीय समन्वय समिति का निर्णय मान्य होगा। इस अवसर पर उपाध्यक्ष रामानंद, गौरी शंकर नेगी, मुकेश नेगी, धर्मेंद्र कुमार, सीताराम नेगी, झाबेराम, रघुवीर, जयपाल भंडारी, लायक राम और जयपाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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बिजली बोर्ड कर्मचारियों और अभियंताओं ने किया प्रदर्शन
कहा-विधेयक पास होने से उपभोक्ताओं को होगा नुकसान
पुरानी पेंशन जल्द से जल्द बहाल करे सरकार : जिष्टू
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर। राष्ट्रीय बिजली कर्मचारी एवं अभियंताओं की समन्वय समिति के आह्वान पर बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। यह बिल 2019 के संसद में शीतकालीन अधिवेशन के दौरान पास होने के लिए रखा जाना है। बिजली बोर्ड कर्मचारियों और अभियंताओं ने रामपुर वृत्त कार्यालय परिसर में इसको लेकर विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को आनी, निरमंड, कुमासैन, ननखड़ी, रामपुर और किन्नौर के कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
कर्मचारियों ने पुराना बस स्टैंड पर जनसभा की और नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय परिसर में पहुंचे। प्रदर्शन के बाद उन्होंने मांगों को लेकर एसडीएम रामपुर नरेंद्र चौहान को ज्ञापन सौंपा। वहीं उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति और पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने की भी मांग रखी। ज्ञापन में कहा कि विधेयक के पास होने से घरेलू उपभोक्ताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ जाने से बिजली की सब्सिडी समाप्त होने से घरेलू उपभोक्ताओं को भारी बिल चुकाने पड़ेंगे। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों के मद्देेनजर दुर्गम इलाकों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसे क्रॉस सब्सिडी से कम किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक उपकरणों और बिजली के फीडरों को अलग करने का खर्चा भी उपभोक्ताओं से ही वसूला जाएगा।
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यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज जिष्टू के अनुसार सरकार बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 को 2019 के संसद में शीतकालीन अधिवेशन में पास होने के लिए रखा जाना है, जिसका कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों ने मांग की है कि 48 कैटागिरी के कर्मचारियों की जो ग्रेड पे कम की गई है, उसे फिर से बहाल किया जाए। जल्द ही उपरोक्त मांगों पर सरकार गौर नहीं करेगी तो उन्हें राष्ट्रीय समन्वय समिति का निर्णय मान्य होगा। इस अवसर पर उपाध्यक्ष रामानंद, गौरी शंकर नेगी, मुकेश नेगी, धर्मेंद्र कुमार, सीताराम नेगी, झाबेराम, रघुवीर, जयपाल भंडारी, लायक राम और जयपाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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