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रिकांगपिओ में सूचना का अधिकार अधिनियम प्रशिक्षण शिविर का हुआ आयोजन
Updated Tue, 09 Oct 2018 09:44 PM IST
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सूचना के अधिकार की दी जानकारी
उपायुक्त कार्यालय के सभागार में प्रशिक्षण शिविर आयोजित
रिकांगपिओ (किन्नौर)। उपायुक्त कार्यालय के सभागार में प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान शिमला के सौजन्य से सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के बारे में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें जिला किन्नौर के सभी विभागों के जनसूचना अधिकारियों, सहायक जन सूचना अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण शिविर में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, प्राप्त अपीलों की हैंडलिंग और निपटाने पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी आरएस कपूर, कोर्स निदेशक हिप्पा के अनुसार इस कार्यशाला का उद्देश्य सूचना क्रांति के दौर में सूचनाओं का आदान प्रदान सरल सस्ता ओर तेजी से हो रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आने के बाद वर्ष 2005 से 2016 तक भष्टाचार के मामलों में 22 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले लगभग 12 से 13 वर्षो में भारत की लगभग एक प्रतिशत आबादी ही सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रयोग कर रहे हैं।
आयुक्त उपायुक्त सुरेंद्र ठाकुर ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का उद्देेश्य सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रत्येक जन सूचना अधिकारी का नैतिक दायित्व है कि आवेदक को निर्धारित समय के भीतर सूचना उपलब्ध करवाने में किसी भी प्रकार की कोताही न बरते और आवेदक को नियम अनुसार सूचना प्राथमिकता पर उपलब्ध करवाए। उपमंडल अधिकारी कल्पा डॉ. अवनिंद्र कुमार ने भी इस अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को अपील व दायित्व के बारे में बताया और कहा कि सभी अधिकारी व कर्मचारी अधिनियम की नियमावली का अच्छी तरह से अध्ययन करे। जिससे सूचना देने में कोई गलती न हो। इस मौके पर सभी विभागों के अधिकारी और पंचायतों के जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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उपायुक्त कार्यालय के सभागार में प्रशिक्षण शिविर आयोजित
रिकांगपिओ (किन्नौर)। उपायुक्त कार्यालय के सभागार में प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान शिमला के सौजन्य से सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के बारे में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें जिला किन्नौर के सभी विभागों के जनसूचना अधिकारियों, सहायक जन सूचना अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण शिविर में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों, प्राप्त अपीलों की हैंडलिंग और निपटाने पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी आरएस कपूर, कोर्स निदेशक हिप्पा के अनुसार इस कार्यशाला का उद्देश्य सूचना क्रांति के दौर में सूचनाओं का आदान प्रदान सरल सस्ता ओर तेजी से हो रहा है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 आने के बाद वर्ष 2005 से 2016 तक भष्टाचार के मामलों में 22 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले लगभग 12 से 13 वर्षो में भारत की लगभग एक प्रतिशत आबादी ही सूचना के अधिकार अधिनियम का प्रयोग कर रहे हैं।
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आयुक्त उपायुक्त सुरेंद्र ठाकुर ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का उद्देेश्य सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को बढ़ाना है। प्रत्येक जन सूचना अधिकारी का नैतिक दायित्व है कि आवेदक को निर्धारित समय के भीतर सूचना उपलब्ध करवाने में किसी भी प्रकार की कोताही न बरते और आवेदक को नियम अनुसार सूचना प्राथमिकता पर उपलब्ध करवाए। उपमंडल अधिकारी कल्पा डॉ. अवनिंद्र कुमार ने भी इस अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को अपील व दायित्व के बारे में बताया और कहा कि सभी अधिकारी व कर्मचारी अधिनियम की नियमावली का अच्छी तरह से अध्ययन करे। जिससे सूचना देने में कोई गलती न हो। इस मौके पर सभी विभागों के अधिकारी और पंचायतों के जन प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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