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ढाई वर्ष से राजपुरा परियोजना का कार्य अधर में
Updated Wed, 08 Nov 2017 06:51 PM IST
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न मुआवजा मिला, न रोजगार
भड़ावली में निर्माणाधीन बिजली प्रोजेक्ट ढाई साल से बंद
दो दर्जन परिवार की परियोजना से छिनी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
हिमाचल प्रदेश की विद्युत परियोजनाएं जहां देश की आर्थिकी को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे रही हैं, वहीं कई परियोजनाओं के प्रभावितों को आज तक अपना हक नहीं मिलने से मायूसी है। परियोजनाओं में भूमि गंवाने के बाद भी ग्रामीणों को न तो रोजगार मिल पाया है और न ही अन्य लाभ। रामपुर उपमंडल की भड़ावली पंचायत में निर्माणाधीन 4.5 मेगावाट राजपुरा विद्युत परियोजना का कार्य बीते ढाई वर्ष से अधर में है। परियोजना निर्माण मेें जिन लोगों की जमीनें छिन गई हैं, उनके पास आज न तो जमीन बची और न ही रोजगार का कोई साधन।
प्रभावित आज भी परियोजना में रोजगार मिलने की आस लगाए हुए हैं। सरकार के परियोजनाओं में प्रभावितों को 70 प्रतिशत रोजगार मुहैया करवाने के दावों की भी हवा निकल रही है। परियोजना का निर्माण ठप होने से सरकार को भी करोड़ों का चूना लग रहा है। राजपुरा प्रोजेक्ट का कार्य बंद होने से जहां सरकार को नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं पंचायत प्रभावित क्षेत्र का विकास भी ठप पड़ा है। प्रभावितों को फसलों के नुकसान का मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है। निर्माणाधीन कंपनी और बैंक की आपसी लड़ाई का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। राजपुरा परियोजना का काम वर्ष 2015 से अधर में है। परियोजना से करीब दो दर्जन प्रभावित परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। परियोजना स्थल पर करोड़ों की मशीनरी में जंग लग रहा है और ग्रामीण रोजगार की राह ताक रहे हैं। उधर, भड़ावली पंचायत उप प्रधान दिनेश खमराल का कहना है कि इस बारे में जल्द ही प्रभावित उपायुक्त शिमला से मिलेंगे। लंकड़ावीर कल्याण समिति के सचिव राकेश चौहान का कहना है कि राजपुरा परियोजना का निर्माण कार्य बीते ढाई वर्ष से बंद पड़ा है। परियोजना प्रभावित दर्जनों युवा बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कंपनी से जल्द से जल्द परियोजना का कार्य शुरू कर प्रभावितों को रोजगार और मुआवजा देने की मांग की है।
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भड़ावली में निर्माणाधीन बिजली प्रोजेक्ट ढाई साल से बंद
दो दर्जन परिवार की परियोजना से छिनी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
हिमाचल प्रदेश की विद्युत परियोजनाएं जहां देश की आर्थिकी को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे रही हैं, वहीं कई परियोजनाओं के प्रभावितों को आज तक अपना हक नहीं मिलने से मायूसी है। परियोजनाओं में भूमि गंवाने के बाद भी ग्रामीणों को न तो रोजगार मिल पाया है और न ही अन्य लाभ। रामपुर उपमंडल की भड़ावली पंचायत में निर्माणाधीन 4.5 मेगावाट राजपुरा विद्युत परियोजना का कार्य बीते ढाई वर्ष से अधर में है। परियोजना निर्माण मेें जिन लोगों की जमीनें छिन गई हैं, उनके पास आज न तो जमीन बची और न ही रोजगार का कोई साधन।
प्रभावित आज भी परियोजना में रोजगार मिलने की आस लगाए हुए हैं। सरकार के परियोजनाओं में प्रभावितों को 70 प्रतिशत रोजगार मुहैया करवाने के दावों की भी हवा निकल रही है। परियोजना का निर्माण ठप होने से सरकार को भी करोड़ों का चूना लग रहा है। राजपुरा प्रोजेक्ट का कार्य बंद होने से जहां सरकार को नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं पंचायत प्रभावित क्षेत्र का विकास भी ठप पड़ा है। प्रभावितों को फसलों के नुकसान का मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है। निर्माणाधीन कंपनी और बैंक की आपसी लड़ाई का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। राजपुरा परियोजना का काम वर्ष 2015 से अधर में है। परियोजना से करीब दो दर्जन प्रभावित परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। परियोजना स्थल पर करोड़ों की मशीनरी में जंग लग रहा है और ग्रामीण रोजगार की राह ताक रहे हैं। उधर, भड़ावली पंचायत उप प्रधान दिनेश खमराल का कहना है कि इस बारे में जल्द ही प्रभावित उपायुक्त शिमला से मिलेंगे। लंकड़ावीर कल्याण समिति के सचिव राकेश चौहान का कहना है कि राजपुरा परियोजना का निर्माण कार्य बीते ढाई वर्ष से बंद पड़ा है। परियोजना प्रभावित दर्जनों युवा बेरोजगार हो गए हैं। उन्होंने कंपनी से जल्द से जल्द परियोजना का कार्य शुरू कर प्रभावितों को रोजगार और मुआवजा देने की मांग की है।
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