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सूखे से गर्मी में बढ़ेगा पेयजल संकट
Updated Sat, 20 Jan 2018 09:17 PM IST
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रोहड़ू। लगातार सूखे से बागवानी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। जंगलों में फैली आग से वन संपदा खाक हो रही। जंगलों में आग लग रही और बारिश नहीं हो रही है। शिमला जिला में रोहड़ू, जुब्बल-कोटखाई व चौपाल सबसे बड़े सेब उत्पादक क्षेत्र हैं। हर परिवार की मुख्य आजीविका का यही साधन है। आईपीएच के एक्सईएन एसपी शर्मा का कहना है कि बारिश, बर्फबारी नहीं होने से पेयजल स्रोतों मेें पानी का स्तर कम हो रहा है।
कहा कि यदि यह सूख कुछ समय के लिए और रहा तो तो गर्मी में भयंकर पेयजल संकट खड़ा होने वाला है। सर्दियों में हिमपात व बारिश से जमीन में पानी रिचार्ज होता है। इस साल आधी सर्दी का मौसम सूखा निकलने के बाद बागवान सेब के बगीचों में रखरखाव का कार्य पूरा नहीं कर पा रहे। सेब के बगीचों में खाद डालने, नए पौधे लगाने सहित अधिकांश कार्य सूखे में अधर में हैं। बगीचों में देखरेख का कार्य फरवरी के अंत तक पूरा करने जरूरी रहती है। नमी न होने के कारण कम समय में बगीचों के रखरखाव का कार्य पूरा होना संभव नहीं। लगातार सूखे के कारण बीते कई दिनों से जंगलों की आग लगातार फैल रही है। चारों ओर आग से पहाड़ियां जल गई। जंगलों में करोड़ों की वन संपदा खाक हो चुकी है। साथ ही वन्य प्राणी भी खतरे में है।
बेमौसमी सब्जियां पर पड़ी मार
क्षेत्र के निचले हिस्सों में कई लोग बेमौसमी सब्जियां उगाते हैं। सूखे के कारण किसान न तो सब्जी के लिए खेत तैयार कर पा रहे और न ही सब्जी लगाने के लिए समय बचा है। सब्जी उत्पादक सुरेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार, सुनील चौहान का कहना है कि सूखे के कारण पहले लगाई गई सब्जियां खराब हो चुकी हैं। नई सब्जियों के लिए खेत तैयार नहीं कर पा रहे।
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सूखे से बागवानी पर अधिक असर पड़ेगा : विशेषज्ञ
जिला कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के पौधे को डोरमेसी के दौरान 1300 से दो हजार घंटे तक अधिक ठंड की जरूरत रहती है। यदि यह जरूरत पूरी नहीं होती तो फसल को नुकसान की संभावना रहती है। सूखे में खाद डालना भी पौधे के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि सूखे से बागवानी पर अधिक असर आगे देखने को मिलेगा। उधर, उद्यान विकास अधिकारी आगरदास का कहना है कि सूखे के बाद सेब के बगीचों में रखरखाव का कार्य लटक चुका है। यहां पर बागवानी व खेतीबाड़ी मौसम पर निर्भर है। गेहूं व अन्य फसलों को भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में किसानों, बागवानों को भारी क्षति हो सकती है।
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कहा कि यदि यह सूख कुछ समय के लिए और रहा तो तो गर्मी में भयंकर पेयजल संकट खड़ा होने वाला है। सर्दियों में हिमपात व बारिश से जमीन में पानी रिचार्ज होता है। इस साल आधी सर्दी का मौसम सूखा निकलने के बाद बागवान सेब के बगीचों में रखरखाव का कार्य पूरा नहीं कर पा रहे। सेब के बगीचों में खाद डालने, नए पौधे लगाने सहित अधिकांश कार्य सूखे में अधर में हैं। बगीचों में देखरेख का कार्य फरवरी के अंत तक पूरा करने जरूरी रहती है। नमी न होने के कारण कम समय में बगीचों के रखरखाव का कार्य पूरा होना संभव नहीं। लगातार सूखे के कारण बीते कई दिनों से जंगलों की आग लगातार फैल रही है। चारों ओर आग से पहाड़ियां जल गई। जंगलों में करोड़ों की वन संपदा खाक हो चुकी है। साथ ही वन्य प्राणी भी खतरे में है।
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बेमौसमी सब्जियां पर पड़ी मार
क्षेत्र के निचले हिस्सों में कई लोग बेमौसमी सब्जियां उगाते हैं। सूखे के कारण किसान न तो सब्जी के लिए खेत तैयार कर पा रहे और न ही सब्जी लगाने के लिए समय बचा है। सब्जी उत्पादक सुरेंद्र सिंह, प्रमोद कुमार, सुनील चौहान का कहना है कि सूखे के कारण पहले लगाई गई सब्जियां खराब हो चुकी हैं। नई सब्जियों के लिए खेत तैयार नहीं कर पा रहे।
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सूखे से बागवानी पर अधिक असर पड़ेगा : विशेषज्ञ
जिला कृषि विज्ञान केंद्र रोहड़ू के प्रभारी डॉ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि सेब के पौधे को डोरमेसी के दौरान 1300 से दो हजार घंटे तक अधिक ठंड की जरूरत रहती है। यदि यह जरूरत पूरी नहीं होती तो फसल को नुकसान की संभावना रहती है। सूखे में खाद डालना भी पौधे के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि सूखे से बागवानी पर अधिक असर आगे देखने को मिलेगा। उधर, उद्यान विकास अधिकारी आगरदास का कहना है कि सूखे के बाद सेब के बगीचों में रखरखाव का कार्य लटक चुका है। यहां पर बागवानी व खेतीबाड़ी मौसम पर निर्भर है। गेहूं व अन्य फसलों को भी नुकसान हो रहा है। ऐसे में किसानों, बागवानों को भारी क्षति हो सकती है।